एंबुलेंस नहीं, ‘चलती-फिरती मौत’! RTO-स्वास्थ्य विभाग की ‘जुगाड़ एक्सप्रेस’ पर सवाल
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
18 नवम्बर 2025, (अपडेटेड 18 नवम्बर 2025, 9:00 पूर्वाह्न IST)

मरीज़ ‘लाइफ सपोर्ट’ पर, मगर ‘जीवन रक्षक सेवा’ ख़ुद ‘वेंटिलेटर’ पर हाँफ रही है!

नीमच | जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाएँ इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में हैं। नीमच की सड़कों पर जर्जर, कंडम अवस्था में दौड़ रही 108 और निजी एंबुलेंस न केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला हैं, बल्कि यह सीधे-सीधे आम नागरिकों की जान के लिए खतरा बन चुकी हैं।

जिस वाहन को मरीजों की सुरक्षा का आधार होना चाहिए, वह खुद उपचार की हालत में दिखाई दे रहा है। यह स्थिति जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की निगरानी प्रणाली पर कठोर प्रश्नचिह्न लगाती है।


जवाबदेही का ‘कंडम खेल’ — फिटनेस पर सवाल

स्थिति का सबसे चिंताजनक पक्ष यह है कि कंडम एंबुलेंसें बिना रोक-टोक के सड़क पर संचालित हो रही हैं। एंबुलेंस पर लिखा रहता है—
“आपकी सेवा में 24×7”,
लेकिन हालात देखकर लगता है मानो गाड़ी खुद किसी ट्रॉमा सेंटर की तलाश में हो।


MP-02/AV-7228: पीछे का टूटा दरवाज़ा—वीडियो ने खोली सच्चाई

CMHO ने स्वीकार किया कि रतनगढ़ में 108 सेवा की एक कंडम एंबुलेंस मौजूद है, हालांकि उन्होंने दावा किया कि “गाड़ी बिल्कुल सही है और मरीजों को लाती रहती है।”

लेकिन उपलब्ध वीडियो फुटेज ने यह दावा पूरी तरह गलत साबित कर दिया। फुटेज में:

  • एंबुलेंस का पीछे का लॉक टूटा हुआ है,

  • चलते समय दरवाज़ा बार-बार खुल रहा है,

  • वाहन की बॉडी काफी जर्जर दिखाई दे रही है।

इस हालत में गंभीर मरीज का सफर किसी बड़े खतरे से कम नहीं है।


क्या RTO का ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ टूटे दरवाज़ों को मंज़ूर करता है?

सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि इतनी खराब हालत वाली एंबुलेंस को फिटनेस कैसे दिया गया?
यदि सफर के दौरान दरवाज़ा खुलने से कोई मरीज या परिजन दुर्घटना का शिकार हो जाए, तो जवाबदेही किसकी होगी?


जवाबदेही की फुटबॉल — विभागों के बीच जिम्मेदारी इधर-उधर

जिले के शीर्ष अधिकारियों से बात करने पर विभागीय तालमेल का अभाव स्पष्ट रूप से सामने आया।

सवाल: जिले में कितनी 108 व निजी एंबुलेंस?

➡️ सिविल सर्जन: “यह जानकारी CMHO बताएंगे।”

सवाल: निजी एंबुलेंस कितनी?

➡️ CMHO: “मेरे पास जानकारी नहीं, यह सिविल सर्जन बताएंगे।”

सवाल: कितनी 108 एंबुलेंस संचालन में?

➡️ CMHO: “23। जिनमें 12 जननी एक्सप्रेस, 9 BLS (बेसिक लाइफ सपोर्ट) और 2 ALS  (एडवांस लाइफ सपोर्ट) शामिल हैं।”

सवाल: कंडम एंबुलेंस MP-02/AV-7228?

➡️ CMHO: “कंडम है, लेकिन सेवा में है।”
(वीडियो इसकी वास्तविक स्थिति इसके विपरीत दिखाता है।)

सवाल RTO से: कितनी एंबुलेंस फिट हैं?

➡️ RTO: “मैं CMHO से जानकारी लेकर बताता हूँ।”

विभागों के इन विरोधाभासी उत्तरों से स्पष्ट है कि जिले में एंबुलेंस संचालन की जिम्मेदारी किसी भी विभाग के पास स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं है।


VIP के लिए सुरक्षित वाहन, जनता के लिए जर्जर एंबुलेंस?

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि अपेक्षाकृत अच्छी स्थिति वाली एंबुलेंसें VIP गतिविधियों में लग जाती हैं, जबकि ग्रामीण व सामान्य मरीजों को पुरानी, क्षतिग्रस्त एंबुलेंस ही मिलती हैं। यह व्यवस्था न केवल गलत है, बल्कि यह स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता पर भी प्रश्न उठाती है।


मुख्य प्रश्न — यदि मरीज गिर गया तो जिम्मेदार कौन?

  1. क्या फिटनेस जारी करने वाला विभाग?

  2. क्या सेवा का संचालन करने वाली टीम?

  3. या वह प्रशासन जो निरीक्षण की जिम्मेदारी निभाने में असफल रहा?

जिला प्रशासन को इस गंभीर प्रश्न का जवाब देना ही होगा।


जिले के लिए तत्काल कदम आवश्यक

इस पूरे मामले में तीन प्रमुख समस्याएँ साफ नज़र आती हैं—

  • विभागीय समन्वय की कमी

  • एंबुलेंसों की वास्तविक स्थिति की जानकारी का अभाव

  • फिटनेस और निरीक्षण प्रणाली पर सवाल

जर्जर एंबुलेंस किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं।
इसलिए ज़रूरी है कि—

  • जिले की सभी एंबुलेंसों का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए,

  • फिटनेस जारी करने की प्रक्रिया की समीक्षा की जाए,

  • और स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जाए।

ताज़ा ख़बरों का अपडेट सीधा अपने फोन पर पाने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें

Aakash Sharma
Aakash Sharmahttps://thetimesofmp.com
आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

Hot this week

पालसोड़ा एक्सीडेंट में 1 युवक की मौत, 2 की हालत गंभीर

पालसोड़ा एक्सीडेंट: नीमच जिले के जीरन थाना क्षेत्र में...

उज्जैन शूटिंग रेंज मारपीट: VIDEO में कैद कोच पर हमला, सिस्टम पर उठे सवाल

उज्जैन (Ujjain Crime News)। उज्जैन शूटिंग रेंज मारपीट का...

रिद्धि राठौड़ का शानदार प्रदर्शन, 400 और 600 मीटर दौड़ में जीते स्वर्ण पदक

नीमच। शालेय संभाग स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में स्विमफ्लाय स्पोर्ट्स...

मनासा में घर में सो रहे 40 वर्षीय कालू को सांप ने काटा, समय पर अस्पताल पहुंचाया

मनासा। नीमच जिले के मनासा क्षेत्र में शुक्रवार अलसुबह...

Related Articles

Popular Categories