Operation Muskan Neemuch: पुलिस की 2 बड़ी सफलताएं; मनासा से अपहृत नाबालिग और रामपुरा से 2 साल से लापता महिला को पुलिस ने पाताल से खोज निकाला

नीमच : मध्यप्रदेश के पुलिस महकमें में इन दिनों ‘ऑपरेशन मुस्कान’ (Operation Muskan) की गूंज है। पुलिस मुख्यालय भोपाल और डीजीपी के सख्त निर्देशों के बाद पूरे प्रदेश में गुमशुदा बच्चों और महिलाओं की तलाश के लिए एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में Operation Muskan के तहत जिले की पुलिस ने रविवार को बेहतरीन पुलिसिंग की मिसाल पेश की है। पुलिस अधीक्षक (SP) अंकित जायसवाल के नेतृत्व में जिले के दो अलग-अलग थानों—मनासा और रामपुरा—ने मानवीय संवेदनाओं से जुड़े दो जटिल मामलों को सुलझाते हुए परिवारों के चेहरों पर खुशियां लौटा दी हैं।

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पुलिस ने न केवल 10 दिन पहले अपहृत हुई एक नाबालिग बालिका को सुरक्षित बचाया, बल्कि दो साल से रहस्यमय तरीके से गायब एक विवाहित महिला को भी दूसरे जिले से ढूंढ निकाला।

Operation Muskan : केस-1: मनासा पुलिस ने 9 दिन में नाबालिग को ढूंढा

Operation Muskan

 

पहला मामला मनासा थाना क्षेत्र का है, जहाँ पुलिस की तत्परता ने एक नाबालिग का जीवन बर्बाद होने से बचा लिया। दरअसल, 21 नवंबर 2025 को मनासा थाने में एक फरियादी ने अपनी 15 वर्षीय नाबालिग पुत्री के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामला नाबालिग से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने तत्काल भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 137(2) के तहत अपराध क्रमांक 517/25 दर्ज कर विवेचना शुरू की।

चूंकि मामला Operation Muskan अभियान के दौरान सामने आया था, इसलिए पुलिस अधीक्षक अंकित जायसवाल ने इसे प्राथमिकता में रखा। एएसपी नवल सिंह सिसोदिया और एसडीओपी (मनासा) शबेरा अंसारी के मार्गदर्शन में मनासा थाना प्रभारी ने एक विशेष टीम का गठन किया।

साइबर सेल ने निभाया अहम रोल इस मामले में पारंपरिक पुलिसिंग के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया गया। गठित विशेष टीम ने साइबर सेल की मदद ली। तकनीकी साक्ष्यों (Technical Evidence) और कॉल डिटेल्स के आधार पर पुलिस ने संदिग्ध स्थानों पर लगातार दबिश दी। पुलिस के इस व्यावसायिक कौशल का ही नतीजा था कि अपहरण के मात्र 9 दिनों के भीतर, यानी 30 नवंबर 2025 को पुलिस ने नाबालिग बालिका को सुरक्षित दस्तयाब कर लिया।

  • इनकी रही सराहनीय भूमिका: इस सफल ऑपरेशन में मनासा थाने के सहायक उप निरीक्षक (ASI) पन्नालाल चौहान और साइबर सेल के प्रधान आरक्षक (Head Constable) प्रदीप शिंदे का योगदान सबसे महत्वपूर्ण रहा।

Operation Muskan :केस-2: दो साल का इंतजार खत्म, रामपुरा पुलिस ने खंडवा से ढूंढा 

Operation Muskan

दूसरा मामला और भी अधिक पेचीदा था, क्योंकि इसमें वक्त बहुत ज्यादा गुजर चुका था। रामपुरा थाना क्षेत्र के ग्राम ब्रह्मपुरा निवासी मनीषा (पति नरेन्द्र, जाति बाछडा, उम्र 24 वर्ष) पिछले दो सालों से लापता थी। परिवार वाले अपनी बहू की आस लगभग छोड़ चुके थे, लेकिन Operation Muskan ने उनकी उम्मीदों को फिर से जिंदा कर दिया। रामपुरा थाना प्रभारी विजय सागरिया ने इस ठंडे बस्ते में पड़े मामले को दोबारा खोला। एसपी के निर्देश पर एक विशेष टीम बनाई गई। टीम ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि दूसरे जिलों और राज्यों की पुलिस से भी समन्वय (Coordination) स्थापित किया।

तकनीकी विश्लेषण और मुखबिर तंत्र की जीत पुलिस ने इस केस को क्रैक करने के लिए सीसीटीवी फुटेज, पुराने कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग का सहारा लिया। इसी बीच मुखबिर से पक्की सूचना मिली कि उक्त महिला खंडवा जिले में है। सूचना की तस्दीक होते ही पुलिस टीम खंडवा के लिए रवाना हुई और वहां से मनीषा को सुरक्षित दस्तयाब कर लिया। दो साल बाद जब पुलिस ने महिला को उसके परिजनों से मिलाया, तो थाने का माहौल भावुक हो गया।

  • सराहनीय भूमिका: इस जटिल गुत्थी को सुलझाने में निरीक्षक विजय सागरिया, प्रधान आरक्षक नरेन्द्र नागदा और नीमच साइबर सेल की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही।

क्या है Operation Muskan ?

आपको बता दें कि मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक के निर्देशानुसार, 1 नवंबर 2025 से 30 नवंबर 2025 तक पूरे मध्यप्रदेश में ‘ऑपरेशन मुस्कान’ (Operation Muskan) चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य गुमशुदा नाबालिग बालक-बालिकाओं और महिलाओं को तस्करों या अपराधियों के चंगुल से बचाकर उन्हें उनके परिवारों तक सुरक्षित पहुंचाना है। नीमच जिले में एसपी अंकित जायसवाल के नेतृत्व में यह अभियान काफी प्रभावी साबित हो रहा है।

पुलिस अधीक्षक की अपील नीमच पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे अपने बच्चों, विशेषकर नाबालिगों की गतिविधियों पर नजर रखें और सोशल मीडिया के दौर में उन्हें साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करें। पुलिस की यह सफलता बताती है कि अगर सही समय पर सूचना दी जाए और धैर्य रखा जाए, तो कानून के हाथ अपराधियों तक जरूर पहुंचते हैं।

 

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