वाइस प्रिंसिपल बोली – “हम मैनेजमेंट के हिसाब से चलेंगे, कलेक्टर के नहीं।”
DEO सुजानमल मांगरिया बोले- “करेंगे कड़ी कार्यवाही”
नीमच (The Times of MP)। जिले में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी है। बढ़ते तापमान और विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, नीमच जिला शिक्षा अधिकारी ने कलेक्टर के अनुमोदन से स्कूलों के समय में बदलाव का कड़ा आदेश जारी किया था। आदेश के मुताबिक, अब जिले के सभी शासकीय और अशासकीय स्कूलों की छुट्टी दोपहर 1:00 बजे तक अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। प्रशासन इसे बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए उठाया गया अहम कदम बता रहा है।
हालांकि, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। नीमच के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर स्कूल (SSVM) की खुली मनमानी सामने आई है, जहां कलेक्टर के आदेशों को धता बताते हुए स्कूल का संचालन दोपहर 2:00 बजे तक बेधड़क किया जा रहा है।
1 बजे की छुट्टी का ‘शक्ति’ आदेश तार-तार
जिला कलेक्टर के स्पष्ट और ‘शक्ति’ आदेशों को नज़रअंदाज़ करते हुए, सरस्वती शिशु विद्या मंदिर स्कूल प्रशासन अपनी मनमर्ज़ी चला रहा है। भीषण गर्मी में, जब पूरा शहर लू के थपेड़ों से झुलस रहा होता है, तब भी यह स्कूल बच्चों को दोपहर 2:00 बजे तक कक्षा में बिठाकर उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। साफ है कि कलेक्टर के आदेश का इस स्कूल पर कोई असर नहीं हो रहा है।
दूसरी और सबसे अहम बात यह है कि दोपहर 1 बजे के बाद धूप अपने चरम पर होती है। अगर बच्चे 2 बजे स्कूल से छूटेंगे, तो वे सीधे लू के थपेड़ों और चिलचिलाती धूप का सीधा शिकार होंगे। यह समझना मुश्किल नहीं है कि 2 बजे डामर की सड़कों पर ऑटो, बसों या पैदल जाने वाले बच्चों का क्या हाल होता है। डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का सबसे ज्यादा खतरा इसी समय होता है।
द टाइम्स ऑफ एमपी टीम ने वाइस प्रिंसिपल से किया सवाल, मिला चौंकाने वाला जवाब
जब हमारी टीम ने इस विषय पर सरस्वती शिशु विद्या मंदिर स्कूल के वाइस प्रिंसिपल से बात की, तो उनका जवाब बेहद चौंकाने वाला और प्रशासन को खुली चुनौती देने वाला था। उन्होंने बेबाकी से कहा कि वे “मैनेजमेंट के हिसाब से चलेंगे।” साफ है कि स्कूल प्रबंधन को कलेक्टर के आदेशों से कोई सरोकार नहीं है और वे अपनी मनमानी चलाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
एक तरफ भीषण गर्मी के चलते प्रशासन बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है और इंदौर जैसे जिलों ने समय 12 बजे तक कर दिया है। वहीं नीमच का यह प्रतिष्ठित स्कूल प्रशासन के आदेशों को खुली चुनौती दे रहा है।
द टाइम्स ऑफ एमपी की टीम ने DEO सुजानमल मांगरिया से की बात: “करेंगे कड़ी कार्यवाही”
जब हमारी टीम ने इस गंभीर विषय और स्कूल की खुली चुनौती पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सुजानमल मांगरिया से बात की। मांगरिया ने स्कूल प्रबंधन के इस अड़ियल रवैये पर कड़ा रुख अपनाया।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि,
“यह आदेश जिले के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों पर समान रूप से लागू है।
बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
मांगरिया ने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि,
“अगर कोई स्कूल इस आदेश की अवहेलना करता पाया जाता है,
तो उस पर जांच के बाद कड़ी कार्यवाही की जाएगी।”
सिर्फ कागज़ों पर आदेश या सच में कार्रवाई?
नीमच प्रशासन का यह आदेश देखकर यही लगता है कि कागजों पर सिर्फ आदेश निकालने की रस्म पूरी की गई है, धरातल पर इसके असर का सटीक आंकलन नहीं किया गया। वाइस प्रिंसिपल के बयान ने तो प्रशासन की साख पर ही सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
अब देखना यह है कि जिला शिक्षा अधिकारी के कड़ी कार्यवाही के दावे में कितनी सच्चाई है। क्या प्रशासन वाकई सरस्वती शिशु विद्या मंदिर जैसी बड़ी संस्था पर कार्यवाही करने की हिम्मत जुटा पाएगा, या यह आदेश भी अन्य आदेशों की तरह सिर्फ फाइलों में दबकर रह जाएगा? प्रशासन को तुरंत इस खुली चुनौती पर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि अन्य स्कूल भी ऐसी मनमानी करने की हिम्मत न कर सकें।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q. नीमच में स्कूलों का नया समय क्या है?
Ans. नीमच जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश क्रमांक/सामान्य/2026/986 के अनुसार, जिले के सभी शासकीय और अशासकीय स्कूलों की छुट्टी दोपहर 1:00 बजे तक अनिवार्य रूप से होनी चाहिए।
Q. सरस्वती शिशु विद्या मंदिर नीमच की मनमानी क्या है?
Ans. सरस्वती शिशु विद्या मंदिर स्कूल जिला कलेक्टर के आदेशों की अनदेखी कर रहा है और दोपहर 2:00 बजे तक स्कूल का संचालन कर रहा है।
Q. स्कूल के वाइस प्रिंसिपल का इस बारे में क्या बयान है?
Ans. वाइस प्रिंसिपल ने कहा है कि वे ‘मैनेजमेंट के हिसाब से चलेंगे’, न कि कलेक्टर के आदेशों के।
Q. क्या प्राइवेट स्कूलों पर कलेक्टर के आदेश लागू हैं?
Ans. हाँ, कलेक्टर के आदेश जिले के सभी शासकीय, अशासकीय, सीबीएसई (CBSE) और आईसीएसई (ICSE) मान्यता प्राप्त स्कूलों पर समान रूप से लागू होते हैं।
Q. जिला प्रशासन को इस खुली चुनौती पर क्या कार्रवाई करनी चाहिए?
Ans. जिला प्रशासन को तुरंत इस खुली चुनौती पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि अन्य स्कूल भी ऐसी मनमानी करने की हिम्मत न कर सकें।
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