Neemuch Fake Note: 50 हजार की जाली करेंसी के साथ तस्कर गिरफ्तार, घर में चल रही थी नोट छापने की फैक्ट्री

Neemuch Fake Note
नीमच । मध्य प्रदेश के नीमच जिले में पुलिस ने अर्थव्यवस्था को दीमक की तरह चाटने वाले नकली नोटों के सौदागरों पर करारी चोट की है। शहर में सक्रिय Neemuch Fake Note (नीमच फेक नोट) गिरोह का पर्दाफाश करते हुए सिटी थाना पुलिस ने एक आरोपी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से 500-500 रुपये के बंडलों में कुल 50,000 रुपये की नकली करेंसी बरामद हुई है।
पुलिस की यह कार्रवाई किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थी। हाईवे पर बिछाए गए जाल और सटीक मुखबिर तंत्र ने यह सुनिश्चित किया कि आरोपी अपने मंसूबों में कामयाब न हो सके। हालांकि, पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि ये आरोपी पहले भी नीमच के पेट्रोल पंपों पर नकली नोट खपा चुके हैं।
सटीक मुखबिर तंत्र ने खोली पोल
Neemuch Fake Note के इस काले कारोबार की भनक पुलिस को 3 दिसंबर 2025 को लग गई थी। सिटी थाना प्रभारी पुष्पा सिंह चौहान को उनके विश्वस्त मुखबिर ने सूचना दी थी कि ग्राम सरजना का निवासी ईश्वर खारोल नकली नोटों की बड़ी खेप लेकर बाजार में उसे खपाने (Circulate) की फिराक में है।
सूचना मिलते ही पुलिस ने बिना वक्त गंवाए जाल बिछाया। थाना प्रभारी के निर्देशन में एक विशेष टीम गठित की गई और मालखेड़ा फोरलेन फंटे पर नाकाबंदी की गई। पुलिस को पता था कि तस्कर इसी रास्ते का इस्तेमाल करेगा। 4 दिसंबर को जैसे ही पुलिस ने MP 44 MS 1199 नंबर की संदिग्ध बाइक को आते देखा, टीम सतर्क हो गई।
तलाशी में मिला नकली नोटों का जखीरा
पुलिस ने बाइक सवार 23 वर्षीय ईश्वर पिता वर्दीचंद खारोल को रोका। जब उसकी तलाशी ली गई, तो उसकी जर्किन की जेब से नोटों की गड्डियां निकलीं। पहली नजर में असली दिखने वाले ये नोट दरअसल Neemuch Fake Note गिरोह की कारीगरी थे। पुलिस ने जब नोटों की जांच की, तो पाया कि कई नोटों के सीरियल नंबर एक ही थे।
जांच में 4 अलग-अलग सीरीज के कुल 100 जाली नोट बरामद हुए, जिनकी कुल कीमत 50,000 रुपये है। एक ही नंबर के कई नोट होना इस बात का पुख्ता सबूत था कि ये नोट कहीं और नहीं, बल्कि किसी प्राइवेट जगह पर छापे गए हैं।
घर को बना रखा था ‘मिनी टकसाल’
पुलिस की पूछताछ में आरोपी ईश्वर ने जो खुलासे किए, उसने पुलिस के कान खड़े कर दिए। यह मामला सिर्फ नोट खपाने का नहीं, बल्कि नोट छापने का भी निकला। आरोपी ने कबूला कि वह अपने साथी सुनील बैरागी के साथ मिलकर घर पर ही नोट छापने का काम करता था।
हैरानी की बात यह है कि Neemuch Fake Note गिरोह ने अपनी ‘क्वालिटी’ चेक करने के लिए नीमच के एक पेट्रोल पंप पर इन नोटों का इस्तेमाल भी किया था, जहां वे पकड़ में नहीं आए। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ गया और वे बड़ी खेप बाजार में उतारने निकल पड़े। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इन्होंने बाजार में अब तक कुल कितने नकली नोट फैलाए हैं।
फरार साथी की तलाश में जुटी पुलिस
इस गिरोह का दूसरा मुख्य सरगना सुनील बैरागी फिलहाल पुलिस की पकड़ से दूर है। पुलिस ने मौके से जाली नोटों के साथ-साथ अपराध में इस्तेमाल की गई बाइक और अन्य सामग्री भी जब्त की है।
सिटी थाना प्रभारी पुष्पा सिंह चौहान ने बताया:
“हमें Neemuch Fake Note गैंग के बारे में पुख्ता सूचना मिली थी। आरोपी घर पर ही नोट छापकर बाजार में चलाने का प्रयास कर रहे थे।
एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और 50 हजार की नकली करेंसी जब्त की गई है।
फरार आरोपी सुनील की तलाश जारी है, और जल्द ही हम इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंच जाएंगे।”
पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका
Neemuch Fake Note रैकेट का भंडाफोड़ करने और शहर को नकली करेंसी के खतरे से बचाने में सिटी थाना प्रभारी पुष्पा चौहान, एसआई लक्ष्मण सिंह राठौर, प्रधान आरक्षक जितेंद्र जगावत, आरक्षक लक्की शुक्ला, आरक्षक दशरथ थावरिया और आरक्षक मनोज प्रजापत की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। पुलिस की इस तत्परता ने दीवाली और शादियों के सीजन के बाद बाजार में नकली नोटों की बाढ़ आने से रोक दी है।
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