Mandsaur Pashupatinath Mandir Darshan: पशुपतिनाथ गर्भगृह में प्रवेश बंद, 8 मुखी प्रतिमा का हो रहा वैज्ञानिक संरक्षण
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
09 दिसम्बर 2025, (अपडेटेड 09 दिसम्बर 2025, 9:58 अपराह्न IST)

मंदसौर, मध्य प्रदेश : विश्व प्रसिद्ध अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ की नगरी मंदसौर से शिवभक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। यदि आप आने वाले दिनों में Mandsaur Pashupatinath Mandir Darshan की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए जानना बेहद जरूरी है। मंदिर प्रशासन ने भगवान पशुपतिनाथ के गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं के प्रवेश पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है।

यह निर्णय किसी प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण नहीं, बल्कि भगवान की दुर्लभ और प्राचीन प्रतिमा के संरक्षण और उसकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। वर्तमान में, गर्भगृह के भीतर पर्दों के पीछे एक विशेष वैज्ञानिक प्रक्रिया चल रही है, जिसका उद्देश्य प्रतिमा को क्षरण (Erosion) और स्क्रैच से बचाना है।

गर्भगृह में चल रहा है ‘वज्र-लेप’ और वैज्ञानिक संरक्षण

Mandsaur Pashupatinath Mandir Darshan भगवान पशुपतिनाथ की यह प्रतिमा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि पुरातात्विक दृष्टि से भी एक अमूल्य धरोहर है। जानकारी के अनुसार, प्रतिमा के संरक्षण के लिए इस समय गर्भगृह में विशेषज्ञों द्वारा काम किया जा रहा है। मंदिर के गर्भगृह को चारों तरफ से पर्दों से ढक दिया गया है, ताकि संरक्षण प्रक्रिया में तापमान और वातावरण का संतुलन बना रहे और किसी भी बाहरी व्यवधान के बिना यह सूक्ष्म कार्य संपन्न हो सके।

जानकारों का कहना है कि यह एक बेहद संवेदनशील प्रक्रिया है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में रासायनिक संरक्षण या ‘वज्र-लेप’ के समान माना जा सकता है। चूंकि यह प्रतिमा मूल रूप से शिवना नदी के गर्भ से प्राप्त हुई थी, इसलिए समय के साथ इस पर प्राकृतिक क्षरण का प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। इसी को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।

ASI और बंगाल के विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई

Mandsaur Pashupatinath Mandir Darshan के दौरान भक्त अक्सर प्रतिमा को स्पर्श करते हैं और जल-दुग्ध का अभिषेक करते हैं। लंबे समय तक ऐसा होने से प्रतिमा की सतह पर प्रभाव पड़ता है। इस संरक्षण कार्य की नींव आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) और पश्चिम बंगाल से आए पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों की रिपोर्ट पर रखी गई है।

हाल ही में, ASI की एक उच्च-स्तरीय टीम ने मंदिर का दौरा किया था। उन्होंने प्रतिमा का बारीकी से निरीक्षण (Survey) किया और पाया कि प्रतिमा के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल तकनीकी हस्तक्षेप की आवश्यकता है। इससे पहले, बंगाल के विशेषज्ञों ने भी प्रतिमा के पत्थर का सैंपल लिया था। इन दोनों रिपोर्ट्स के विश्लेषण के बाद ही वर्तमान में यह सुधार कार्य शुरू किया गया है।

पहले भी हो चुका है औरंगाबाद के कलाकारों द्वारा संरक्षण

Mandsaur Pashupatinath Mandir Darshan यह पहली बार नहीं है जब भगवान पशुपतिनाथ की प्रतिमा का संरक्षण किया जा रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने इस ऐतिहासिक संदर्भ पर प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि तत्कालीन कलेक्टर जी.के. सारस्वत के कार्यकाल में भी प्रतिमा की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई थी। उस समय औरंगाबाद से विशेष कलाकारों को बुलाया गया था, जिन्होंने प्रतिमा पर केमिकलयुक्त ‘वज्र-लेप’ लगाया था। यह लेप प्रतिमा को जल और अन्य पदार्थों के रसायनिक प्रभाव से बचाता है।

वर्तमान प्रक्रिया भी उसी दिशा में एक उन्नत कदम है। प्रशासन का उद्देश्य है कि आने वाली पीढ़ियां भी भगवान पशुपतिनाथ के इस दिव्य स्वरूप का दर्शन उसी भव्यता के साथ कर सकें, जैसा कि आज है।

श्रद्धालु कैसे कर पाएंगे दर्शन?

भक्तों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वे भगवान के दर्शन से वंचित रह जाएंगे? मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि Mandsaur Pashupatinath Mandir Darshan पूरी तरह बंद नहीं है। रोक केवल ‘गर्भगृह’ में प्रवेश और प्रतिमा स्पर्श पर है।

श्रद्धालु गर्भगृह के बाहर निर्धारित बैरिकेडिंग से भगवान के दर्शन कर सकते हैं। हालांकि, मुख्य प्रतिमा के चारों ओर पर्दे लगे होने के कारण अभी स्वरूप पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकता है, लेकिन मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान और आरती निर्बाध रूप से जारी रहेगी। प्रशासन ने भक्तों से सहयोग की अपील की है और कहा है कि यह कार्य हमारी आस्था के केंद्र को सुरक्षित रखने के लिए ही किया जा रहा है।

आस्था और विज्ञान का तालमेल

Mandsaur Pashupatinath Mandir Darshan नेपाल के पशुपतिनाथ के बाद विश्व का सबसे प्रमुख मंदिर माना जाता है। यहाँ की अष्टमुखी प्रतिमा अद्वितीय है। इस समय चल रहा संरक्षण कार्य आस्था और आधुनिक विज्ञान के तालमेल का एक बेहतरीन उदाहरण है। जिस तरह हम अपने आराध्य की पूजा करते हैं, उसी तरह उनकी प्रतिमा का भौतिक संरक्षण भी हमारी ही जिम्मेदारी है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही यह वैज्ञानिक प्रक्रिया पूरी होगी और भक्त पुनः गर्भगृह में जाकर बाबा पशुपतिनाथ का आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे।


ये खबर भी पढ़िए… अष्टमुखी महादेव के चेहरे पर वक्त के निशान: पशुपतिनाथ प्रतिमा की आंखों में स्क्रैच और उखड़ता वज्र लेप

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Aakash Sharma
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