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श्मशान अतिक्रमण पर बढ़ा विवाद, विशन्या पंचायत ने कार्रवाई की मांग

श्मशान अतिक्रमण

नीमच। नीमच जिले के ग्राम विशन्या में श्मशान अतिक्रमण का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। गांव के लोगों और पंचायत प्रतिनिधियों में इस मुद्दे को लेकर लगातार नाराजगी बढ़ रही है। श्मशान भूमि, जो किसी भी गांव की सामाजिक और धार्मिक संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है, वहां हो रहे अतिक्रमण ने पूरे क्षेत्र में असंतोष का माहौल बना दिया है।

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ग्राम पंचायत विशन्या ने इस श्मशान अतिक्रमण के खिलाफ आवाज उठाते हुए कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा है। उपसरपंच पदम सिंह के नेतृत्व में दिए गए इस ज्ञापन में बताया गया कि श्मशान परिसर की सर्वे नंबर 155 और 158 की भूमि पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है।

श्मशान परिसर में पशु बांधने से बढ़ा आक्रोश

पंचायत के अनुसार, यह श्मशान अतिक्रमण केवल जमीन पर कब्जे तक सीमित नहीं है, बल्कि अतिक्रमण करने वाले लोग उसी परिसर में पशु बांध रहे हैं और नियमित गतिविधियां भी कर रहे हैं। इससे श्मशान की पवित्रता प्रभावित हो रही है, जो ग्रामीणों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की गतिविधियां पूरी तरह अनुचित हैं और प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।

दो बार नोटिस, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई

इस पूरे मामले में प्रशासनिक लापरवाही भी सामने आ रही है। जानकारी के मुताबिक, तहसील कार्यालय द्वारा दो बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं और बेदखली के आदेश भी पारित किए गए थे। इसके बावजूद अब तक श्मशान अतिक्रमण को हटाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

यही कारण है कि अब ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

विकास कार्य भी अटके, दिसंबर 2026 की डेडलाइन पर संकट

शासन द्वारा दिसंबर 2026 तक श्मशान परिसर में कई विकास कार्य प्रस्तावित हैं, जिनमें तार फेंसिंग, वृक्षारोपण और आधारभूत सुविधाओं का विस्तार शामिल है। लेकिन वर्तमान श्मशान अतिक्रमण के चलते ये सभी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।

यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो विकास कार्यों में देरी होना तय माना जा रहा है।

कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

उपसरपंच पदम सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि जल्द ही श्मशान अतिक्रमण को हटाकर भूमि को मुक्त नहीं कराया गया, तो पंचायत और ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले को प्राथमिकता में लेते हुए त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि गांव में व्यवस्था और संतुलन बना रहे।

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