2 साल का हिसाब: Dr Sampat Swaroop Jaju ने प्रभारी मंत्री निर्मला भूरिया को घेरा, दागे तीखे सवाल

Sampat Swaroop Jaju
नीमच (The Times of MP):
नीमच जिले की प्रभारी मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया के हालिया दौरे और प्रेस वार्ता को लेकर ‘The Times of MP’ द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित खबरों के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। हमारी खबरों के बाद अब विपक्ष ने भी सरकार को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में पूर्व विधायक Sampat Swaroop Jaju ने एक विस्तृत बयान जारी कर प्रभारी मंत्री के दौरे को केवल ‘खानापूर्ति’ करार दिया है।
डॉ. जाजू ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित प्रेस वार्ता में प्रभारी मंत्री नीमच जिले को धरातल पर क्या लाभ मिला, यह बताने में पूरी तरह असमर्थ रहीं।
प्रभारी मंत्री की भूमिका पर खड़े किए सवाल
पूर्व विधायक Sampat Swaroop Jaju ने अपने बयान में कहा कि प्रभारी मंत्री, जिन्हें पूर्व में पालक मंत्री कहा जाता था, का दायित्व केवल फीता काटना या रस्मी दौरे करना नहीं है। जिले की जनता उनसे अपेक्षा करती है कि वे सुख-दुख में भागीदार बनें, आम लोगों को सांत्वना दें और शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाएं।
उन्होंने कहा,
“यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रभारी मंत्री सुश्री भूरिया लंबे समय बाद नीमच आईं, लेकिन उनका यह दौरा भी केवल औपचारिकता तक सीमित रहा। केंद्र और राज्य सरकार की अधोसंरचना योजनाओं की समीक्षा करना,
धरातल पर निरीक्षण करना और जिले के बहुआयामी विकास के लिए रूपरेखा तैयार करना उनका कर्तव्य था, जिसमें वे विफल रहीं।”
प्रेस वार्ता में ‘चुप्पी’ और ‘अनभिज्ञता’
Dr Sampat Swaroop Jaju ने प्रभारी मंत्री की प्रेस वार्ता पर तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री के दो वर्षों की उपलब्धियों का बखान करने के लिए मीडिया को बुलाया, लेकिन जब पत्रकारों ने नीमच के स्थानीय मुद्दों पर सवाल किए, तो वे निरुत्तर हो गईं।
Sampat Swaroop Jaju ने कहा,
“प्रेस वार्ता में लगभग 50 सवाल पूछे गए, लेकिन प्रभारी मंत्री 90 प्रतिशत सवालों का जवाब नहीं दे सकीं। स्वास्थ्य, शिक्षा, यातायात, उद्योग, रोजगार और जर्जर सड़कों जैसे ज्वलंत मुद्दों पर जब जागरूक पत्रकारों ने सवाल दागे, तो मंत्री जी ने केवल अनभिज्ञता जाहिर की। उनका यह कहना कि ‘मामले को समझ रही हूँ, दिखवाऊँगी, करवाऊँगी’ यह साबित करता है कि वे जिले की जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं।”
स्थानीय जनप्रतिनिधियों का ‘मौन’ समर्थन
Dr Sampat Swaroop Jaju ने न केवल प्रभारी मंत्री बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब प्रभारी मंत्री घिरी हुई नजर आईं, तब मंचासीन स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौन धारण किए रहे।
डॉ. जाजू के अनुसार,
“स्थानीय नेताओं का यह मौन दर्शाता है कि उनका प्रभारी मंत्री से कोई समन्वय नहीं है और न ही उन्हें जिले के विकास में कोई रुचि है। वे केवल कागजों पर विकास के घोड़े दौड़ाकर वाहवाही लूटना चाहते हैं। जिला सलाहकार समिति के सदस्य भी वहां मौजूद थे, लेकिन उन्होंने भी पत्रकारों के जायज सवालों पर चुप्पी साधकर एक तरह से सरकार की नाकामी का अप्रत्यक्ष समर्थन किया।”
पत्रकारों को दिया साधुवाद
अपने बयान में Sampat Swaroop Jaju ने नीमच के पत्रकार बंधुओं का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा,
“मैं नीमच के जागरूक पत्रकारों को साधुवाद देता हूँ जिन्होंने पहली बार किसी प्रभारी मंत्री को स्थानीय मुद्दों पर इस तरह जवाबदेह ठहराया। पत्रकारों के तीखे तेवरों ने यह साफ कर दिया कि अब जनता और मीडिया को झूठे आश्वासनों से बहकाया नहीं जा सकता। 15 महीनों में प्रभारी मंत्री ने जिले की सुध नहीं ली, जिसका खामियाजा आज नीमच की जनता भुगत रही है।”
जनता मांग रही जवाब
Dr Sampat Swaroop Jaju ने अंत में कहा कि अब भी समय है कि प्रभारी मंत्री और स्थानीय प्रशासन जागें। केवल इमोशनल कार्ड खेलकर या हवा-हवाई घोषणाएं करके जनता का भावनात्मक शोषण अब नहीं चलेगा। नीमच की जनता अब यह समझ चुकी है कि ‘डबल इंजन’ की सरकार में नीमच का इंजन फेल हो चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शायद इस तीखी प्रतिक्रिया और मीडिया के दबाव के बाद प्रभारी मंत्री अब जिले के विकास कार्यों की सतत निगरानी करेंगी और स्वीकृत योजनाओं को समय सीमा में पूर्ण करवाएंगी।
नीमच के आम से लेकर खास लोगों में अब यही चर्चा है कि क्या प्रभारी मंत्री जी वाकई अपने ‘प्रभार’ के प्रति गंभीर हैं या यह दौरा भी महज एक रस्म अदायगी थी?
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