Nirmala Bhuria Neemuch Visit: विकास का ‘कागजी’ जश्न और सवालों का ‘दंश’, मंत्री की ‘चुप्पी’ ने खोली सिस्टम की पोल
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
18 दिसम्बर 2025, (अपडेटेड 18 दिसम्बर 2025, 7:07 अपराह्न IST)

नीमच। मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार अपने कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने पर पूरे प्रदेश में ‘विकास पर्व’ मना रही है। ढोल-नगाड़ों और सरकारी प्रेस नोट के जरिए यह बताने की कोशिश की जा रही है कि प्रदेश में ‘रामराज्य’ आ गया है। लेकिन गुरुवार को नीमच में प्रभारी मंत्री निर्मला भूरिया के दौरे (Nirmala Bhuria Neemuch Visit) के दौरान जो कुछ हुआ, उसने ‘सुशासन’ के दावों की कलई खोलकर रख दी। कलेक्ट्रेट के एसी हॉल में आयोजित प्रेसवार्ता में जब पत्रकारों ने सरकारी दावों की चादर हटाकर जमीनी हकीकत के सवाल पूछे, तो मंत्री निरुत्तर हो गईं। उनके पास न तो बंगला-बगीचा समस्या का समाधान था और न ही अस्पताल में चल रही ‘लूट-खसोट’ का जवाब।

Nirmala Bhuria Neemuch Visit : दावों की चमक: मंत्री ने पेश की ‘गुलाबी तस्वीर’

प्रभारी मंत्री निर्मला भूरिया और जिला प्रशासन ने अपनी उपलब्धियों का जो रिपोर्ट कार्ड पेश किया, वह पहली नजर में बेहद शानदार लगता है। Nirmala Bhuria Neemuch Visit के दौरान ‘विकास और सेवा के दो वर्ष’ पुस्तिका का विमोचन करते हुए मंत्री ने नीमच को विकास के पथ पर दौड़ता हुआ जिला बताया।

सरकारी फाइल में दर्ज बड़ी उपलब्धियां:

  1. सोलर हब का तमगा: मंत्री ने दावा किया कि नीमच अब सौर ऊर्जा का पावरहाउस है। सिंगोली के बड़ी कवई में 300 मेगावाट का सोलर प्लांट शुरू हो चुका है, जिससे बिजली उत्पादन जारी है।

  2. शिक्षा और स्वास्थ्य का कायाकल्प: 350 करोड़ रुपये की लागत से बना मेडिकल कॉलेज और एमबीबीएस की 100 सीटों पर शुरू हुई पढ़ाई को सरकार ने अपनी पीठ थपथपाने का सबसे बड़ा जरिया बनाया। साथ ही मनासा में 100 बिस्तरीय अस्पताल को बड़ी उपलब्धि बताया।

  3. अरबों का निवेश: दावों के मुताबिक, एमपीआईडीसी के जरिए जिले में 11 वृहद इकाइयां आ रही हैं, जिनमें 5269 करोड़ का निवेश और लगभग 5000 लोगों को रोजगार मिलने की बात कही गई। इसके अलावा 150 एमएसएमई इकाइयों में भी करोड़ों के निवेश का हवाला दिया गया।

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हकीकत का आईना: जहाँ मंत्री की बोलती हुई बंद

विकास के इन चमकदार आंकड़ों के पीछे नीमच की जनता का दर्द छिपा हुआ है, जिसे प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों ने बेबाकी से उठाया। लेकिन अफसोस, Nirmala Bhuria Neemuch Visit के दौरान प्रभारी मंत्री एक ‘अभिभावक’ की भूमिका निभाने के बजाय, सवालों से बचती नजर आईं।

1. बंगला-बगीचा: 2 साल बाद भी ‘समझ’ ही रही है सरकार?

Nirmala Bhuria Neemuch Visit के दौरान नीमच शहर का नासूर बन चुकी ‘बंगला-बगीचा समस्या’ पर जब सवाल दागा गया, तो उम्मीद थी कि सरकार के दो साल पूरे होने पर मंत्री कोई ठोस रोडमैप रखेंगी। लेकिन निर्मला भूरिया ने वही रटा-रटाया जवाब दिया- “मैं अभी मामले को समझ रही हूं, इसे दिखवाऊंगी।”
सवाल यह है कि क्या दो साल का समय किसी समस्या को ‘समझने’ के लिए कम होता है? हजारों परिवार विस्थापन और अवैध कब्जे के डर के साये में जी रहे हैं, लेकिन सरकार के पास सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं है।

2. अस्पताल या ‘वसूली का अड्डा’?

नीमच जिला अस्पताल को लेकर मंत्री के सामने सबसे गंभीर मुद्दे उठाए गए।

  • रेफर सेंटर: करोड़ों का मेडिकल कॉलेज बनने के बावजूद जिला अस्पताल केवल ‘रेफर सेंटर’ बनकर रह गया है। गंभीर मरीज आज भी उदयपुर या इंदौर भागने को मजबूर हैं।

  • प्रसूता वार्ड में लूट: पत्रकारों ने साफ कहा कि डिलीवरी वार्ड में प्रसूताओं के परिजनों से खुलेआम अवैध वसूली की जा रही है। इस पर एक महिला मंत्री होने के नाते निर्मला भूरिया को सख्त एक्शन लेना चाहिए था, लेकिन उन्होंने इसे भी “दिखवाने” की बात कहकर टाल दिया। मंत्री की यह ढिलाई भ्रष्ट कर्मचारियों के हौसले बढ़ाने वाली है।

3. अटके प्रोजेक्ट्स पर ‘खामोशी’

Nirmala Bhuria Neemuch Visit के दौरान भादवा माता कॉरिडोर का काम कछुआ चाल से चल रहा है, सांदीपनी सीएम राइज स्कूल का निर्माण अधर में है और दिव्यांग पुनर्वास केंद्र की सिर्फ घोषणाएं हैं। इन तीखे सवालों पर मंत्री के पास कोई जवाब नहीं था। उनकी चुप्पी यह बताने के लिए काफी थी कि शिलान्यास और लोकार्पण के बीच में प्रोजेक्ट्स कैसे दम तोड़ देते हैं।

डैमेज कंट्रोल: जब पूर्व मंत्री को संभालना पड़ा मोर्चा

Nirmala Bhuria Neemuch Visit के दौरान प्रेसवार्ता में एक वक्त ऐसा आया जब प्रभारी मंत्री पत्रकारों के तीखे सवालों (Rapid Fire Questions) से घिर गईं। स्थिति को असहज होता देख, पास में बैठे पूर्व मंत्री और जावद विधायक ओमप्रकाश सकलेचा (Om Prakash Sakhlecha) को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने बात का रुख मोड़ते हुए जावद क्षेत्र में एआई (Artificial Intelligence) क्लास और डिजिटल शिक्षा के नवाचारों का गुणगान शुरू कर दिया। सकलेचा ने बताया कि कैसे 1400 बच्चे एआई पढ़ रहे हैं और सरकारी स्कूलों के नतीजे सुधरे हैं। यह हस्तक्षेप मंत्री को बचाने की कोशिश तो थी, लेकिन जनता यह समझ गई कि एआई की क्लास से टूटी सड़कें और अस्पताल की अव्यवस्था ठीक नहीं होने वाली।

जैविक हाट और न्यूट्री बास्केट: फोटो-ऑप या सरोकार?
विवादों से इतर, मंत्री ने टाउन हॉल में जैविक हाट बाजार का दौरा किया। यहाँ उन्होंने बांस के टूथब्रश और जैविक उत्पादों की तारीफ की। साथ ही 50 बच्चों को ‘न्यूट्री बास्केट’ बांटी और कुपोषण को मिटाने की बात कही।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जिस जिले में स्वास्थ्य सेवाएं ही वेंटीलेटर पर हों (रेफर सेंटर), वहां सिर्फ बास्केट बांटने से कुपोषण कैसे खत्म होगा?

सुशासन या सिर्फ आश्वासन?

Nirmala Bhuria Neemuch Visit ने यह साबित कर दिया है कि मोहन यादव सरकार के पास आंकड़ों की बाजीगरी तो है, लेकिन जमीनी समस्याओं के लिए इच्छाशक्ति की कमी है। प्रभारी मंत्री का काम जिले की नब्ज पहचानना होता है, लेकिन वे पूरी तरह से अफसरों द्वारा तैयार स्क्रिप्ट पढ़ती नजर आईं। जनता को ‘स्मार्ट क्लास’ और ‘सोलर हब’ की बातें अच्छी लगती हैं, लेकिन जब उसे इलाज के लिए पड़ोसी राज्य भागना पड़े या अपने ही घर (बंगला-बगीचा) के लिए कोर्ट के चक्कर काटने पड़ें, तो ये दावे खोखले साबित होते हैं।

नीमच की जनता अब “दिखवाऊंगी” और “करवाऊंगी” से आगे बढ़कर ठोस परिणाम चाहती है।


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Aakash Sharma
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