Sanwaliya Seth Temple Clash : सांवलिया सेठ मंदिर में ‘तालिबानी’ न्याय, दोपहर में पिटे गार्ड्स, तो रात को निर्दोष श्रद्धालु की फोड़ दी नाक!

Sanwaliya Seth Temple Clash

Sanwaliya Seth Temple Clash

THE TIMES OF MP EXCLUSIVELY: ‘टाइगर फोर्स’ के गार्ड्स ने ऑफिस में बंधक बनाकर दी बर्बर यातनाएं, मंदिर मंडल ने दबाव डालकर रुकवाई FIR!

चित्तौड़गढ़ (मंडफिया)। मेवाड़ की पावन धरा पर स्थित श्री सांवलिया सेठ का वह मंदिर, जिसका इतिहास त्याग और श्रद्धा की मिसाल रहा है, रविवार को ‘रणक्षेत्र’ में तब्दील हो गया। यह सिर्फ एक साधारण झड़प नहीं थी, बल्कि यह कहानी है एक ऐसे Sanwaliya Seth Temple Clash की, जिसमें ‘भक्ति’ और ‘सुरक्षा’ के बीच नफरत की एक खूनी लकीर खिंच गई।
The Times of MP के पास मौजूद पुख्ता सबूत और पीड़ित श्रद्धालु की आपबीती चीख-चीखकर बता रही है कि मंदिर परिसर अब निजी सुरक्षा एजेंसियों के ‘बदले’ का अड्डा बन चुका है।

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घटनाक्रम 1: दोपहर का वो ‘रक्त रंजित’ संघर्ष

इतिहास गवाह है कि सांवलिया जी के दरबार में हमेशा शांति का वास रहा है, लेकिन रविवार दोपहर को मर्यादा की सारी दीवारें ढह गईं। मंदिर के भीतर कुछ श्रद्धालु ठाकुरजी की छवि को अपने मोबाइल में कैद करने की कोशिश कर रहे थे। इसी गहमागहमी के बीच उनका पैर मंदिर के ‘भंडार’ (दानपात्र) को छू गया। मौके पर तैनात ‘टाइगर फोर्स’ के गार्ड कोमल प्रजापत और भैरू गुर्जर ने जब उन्हें टोकते हुए फोटो लेने से रोका, तो विवाद की चिंगारी सुलग उठी।

Sanwaliya Seth Temple Clash
घंटे के डंडे से घायल गार्ड

वो चिंगारी पल भर में दावानल बन गई। श्रद्धालुओं का आक्रोश इस कदर बढ़ा कि उन्होंने मंदिर की पवित्रता को दरकिनार कर आरती के भारी-भरकम ‘घंटे के डंडे’ को उठा लिया और दोनों गार्डों पर जानलेवा हमला कर दिया। मंदिर के भीतर चीख-पुकार मच गई और दोनों सुरक्षाकर्मी लहूलुहान होकर गिर पड़े। इस Sanwaliya Seth Temple Clash की पहली कड़ी ने सुरक्षाकर्मियों के भीतर आक्रोश का वो जहर भर दिया, जिसका खामियाजा रात को एक अनजान और निर्दोष श्रद्धालु को भुगतना पड़ा।

मंदिर मंडल के सुरक्षा प्रभारी गुलाब सिंह की रिपोर्ट पर मंडफिया थानाधिकारी गोकुल डांगी ने उदयपुर निवासी तनवीर सिंह (28) पुत्र सुरजीत सिंह और चरणवीर सिंह (19) पुत्र सुरजीत सिंह को शांति भंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है. 

घटनाक्रम 2: ‘आधी रात’ का खौफनाक प्रतिशोध

जैसे-जैसे सूरज ढला और रात का सन्नाटा पसरा, मंदिर परिसर में एक रहस्यमयी खामोशी छा गई। लेकिन यह खामोशी किसी बड़े तूफान की आहट थी। मध्य प्रदेश के नीमच जिले के कुकड़ेश्वर से आए श्रद्धालु प्रियांशु मालवीय को इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि दोपहर में हुई घटना की ‘खूनी भड़ास’ उनके ऊपर निकलने वाली है। प्रियांशु जब कॉरिडोर की जाली से मंदिर की एक तस्वीर लेने की कोशिश कर रहे थे, तभी गार्डों ने उन्हें घेर लिया।

यहाँ से सस्पेंस गहराता है। जानकारों का मानना है कि प्रियांशु को निशाना सिर्फ फोटो लेने के लिए नहीं बनाया गया, बल्कि यह दोपहर में हुई अपनी पिटाई का ‘बदला’ लेने की एक सोची-समझी साजिश थी। गार्डों ने प्रियांशु को घसीटते हुए ऐसी जगह ले गए जहाँ सीसीटीवी कैमरों की तीसरी आंख मौजूद नहीं थी। वहां जो हुआ, वो किसी ‘तालिबानी बर्बरता’ से कम नहीं था। प्रियांशु की नाक और पैरों से खून बहने लगा। वह रहम की भीख मांगता रहा, लेकिन वर्दी के पीछे छिपे प्रतिशोध ने उसकी एक न सुनी।

EXCLUSIVE INTERVIEW: पीड़ित प्रियांशु की जुबानी, बर्बरता की कहानी

The Times of MP ने जब पीड़ित प्रियांशु से बात की, तो उन्होंने जो खुलासे किए वो रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। पेश है बातचीत के मुख्य अंश:

“मुझे घसीटकर उस ऑफिस में ले गए जहाँ सीसीटीवी नहीं था…” “मैं जाली के पास से फोटो ले रहा था। गार्ड ने गाली दी, मैंने मना किया तो वो दादागिरी पर उतर आए। वे मुझे खींचकर सिंह द्वार के पास बने उस कमरे (दान कार्यालय) में ले गए जहाँ लोग दान जमा करते हैं। वहां अंदर ले जाकर उन्होंने मुझे जानवरों की तरह मारा। मेरी नाक की हड्डी क्रैक (Fracture) हो गई, चेहरा खून से सन गया। मैं रहम की भीख मांगता रहा कि मुझे खून आ रहा है, पर वर्दी के नशे में चूर गार्ड्स मारते रहे।”

“सबूत मिटाने के लिए मेरा ही रुमाल इस्तेमाल किया…” “जब मेरी नाक से खून फर्श पर गिरने लगा, तो उन गार्ड्स ने पेशेवर अपराधियों की तरह व्यवहार किया। उन्होंने जबरन मेरा ही रुमाल छीना और मुझसे ही फर्श पर गिरा खून साफ करवाया ताकि कोई सबूत न बचे। मेरा फोन छीन लिया और धमकी दी कि अगर वीडियो बनाया तो फोन तोड़ देंगे।”

साक्ष्य मिटाने की साजिश: रुमाल से साफ हुआ खून

इस Sanwaliya Seth Temple Clash का सबसे डरावना मोड़ तब आया जब गार्डों ने पेशेवर अपराधियों की तरह सबूत मिटाना शुरू किया। प्रियांशु की नाक से गिरे खून को उसी के रुमाल से जबरन साफ करवाया गया। उसके मोबाइल को छीनकर मारपीट के तमाम वीडियो डिलीट कर दिए गए। ऐसा लग रहा था मानो ‘टाइगर फोर्स’ के गार्ड यह साबित करना चाहते थे कि वहां कुछ हुआ ही नहीं। लेकिन प्रियांशु के शरीर पर लगे घाव और उसकी आँखों में छिपी दहशत इस पूरे ‘प्रतिशोध’ की दास्तां बयां कर रही थी।

सनसनीखेज खुलासा: “11 बजने दो, फिर तुम्हें भगा-भगा कर मारेंगे”

प्रियांशु ने बताया कि मारपीट के बाद भी गार्ड्स का मन नहीं भरा। जब पीड़ित पुलिस के पास जाने लगा, तो ‘टाइगर फोर्स’ के गार्ड्स ने सरेआम धमकी दी:

“अभी भक्तों की भीड़ है, 11 बजने दो… एक बार भक्त चले जाएं फिर
तुम्हें और तुम्हारे साथियों को भगा-भगा कर मारेंगे।”


प्रशासनिक साठगांठ ?  क्यों दबाई गई एफआईआर ?

इस मामले का सबसे काला पक्ष यह है कि जब लहूलुहान प्रियांशु थाने पहुँचा, तो पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करने के बजाय टालमटोल की। मंदिर मंडल के रसूखदार पदाधिकारियों ने इंसाफ दिलाने के बजाय पीड़ित पर ही दबाव बनाना शुरू कर दिया।

प्रियांशु का बड़ा आरोप:

“मंदिर मंडल के लोगों ने मुझसे कहा कि तुम इन गार्ड्स और सुरक्षा एजेंसी से कभी नहीं जीत पाओगे। सरकार इनकी है, मंदिर मंडल इनका है और पुलिस भी इनका साथ देगी। तुम कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटते रह जाओगे। इसी दबाव में पुलिस के सामने ही मुझसे लिखित समझौता करवा लिया गया।”


The Times of MP के सुलगते सवाल— सरकार और मंदिर कमेटी जवाब दे!

  • सवाल 1: क्या सांवलिया सेठ मंदिर प्रशासन ने ‘टाइगर फोर्स’ को श्रद्धालुओं की हड्डियां तोड़ने का ठेका दिया है?

  • सवाल 2: मेडिकल रिपोर्ट में नाक का फ्रैक्चर आने के बावजूद संगीन धाराओं में मामला दर्ज क्यों नहीं हुआ? क्या समझौता करवा लेना ही पुलिस की ड्यूटी है?

  • सवाल 3: जिस कमरे (दान कार्यालय) में प्रियांशु को बंधक बनाकर पीटा गया, क्या वहां के सीसीटीवी फुटेज प्रशासन सार्वजनिक करेगा? या सबूत मिटा दिए गए हैं?

  • सवाल 4: क्या राजस्थान की भजनलाल सरकार ऐसे ‘वर्दीधारी गुंडों’ पर बुलडोजर चलाएगी या आस्था के केंद्र ऐसे ही कलंकित होते रहेंगे?


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