नीमच (मनासा): मध्यप्रदेश के नीमच जिले के मनासा में मंगलवार रात उस वक्त सनसनी फैल गई जब राजस्थान की पगारिया थाना पुलिस ने एक प्रतिष्ठित अनाज व्यापारी को अफीम तस्करी के आरोप में हिरासत में ले लिया। इस Manasa Opium Case ने उस वक्त नया मोड़ ले लिया जब पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में पूरा कस्बा एकजुट हो गया और अंततः तकनीक (CCTV) ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया।
तस्करी की साजिश और व्यापारी का नाम
इस पूरे Manasa Opium Case की शुरुआत दो दिन पहले राजस्थान के झालावाड़ जिले में हुई थी। पगारिया थाना पुलिस ने डग रोड पर नाकाबंदी के दौरान एक संदिग्ध लोडिंग टेम्पो को रोका था। तलाशी लेने पर पुलिस को मक्का के कट्टों के नीचे बेहद शातिर तरीके से छिपाई गई 1 किलो 800 ग्राम अवैध अफीम बरामद हुई। पुलिस ने तुरंत टेम्पो चालक यूनुस कुजड़ा को गिरफ्तार कर लिया।
एनडीपीएस एक्ट की कड़ी पूछताछ के दौरान आरोपी चालक ने अपना जुर्म कबूलने के बजाय मनासा के अनाज व्यापारी प्रफुल्ल पोरवाल का नाम ले लिया। उसने दावा किया कि उसने यह माल पोरवाल की दुकान से खरीदा है। इसी Manasa Opium Case आधार पर राजस्थान पुलिस की टीम सीधे मनासा पहुंची और Manasa Opium Case की जांच के नाम पर व्यापारी को थाने ले आई।
व्यापारियों का आक्रोश और थाने का घेराव
जैसे ही मनासा के व्यापारियों को Manasa Opium Case खबर मिली कि उनके बीच के एक निर्दोष साथी को राजस्थान पुलिस ने हिरासत में लिया है, पूरे बाजार में आक्रोश फैल गया। सैकड़ों की तादाद में व्यापारी और स्थानीय नागरिक मनासा थाने पर जमा हो गए। पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई और करीब 3 घंटे तक थाने का घेराव जारी रहा।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पुलिस किसी भी अपराधी के एकतरफा बयान पर किसी प्रतिष्ठित व्यापारी को अपराधी कैसे मान सकती है? तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए मनासा पुलिस को भी मोर्चा संभालना पड़ा।
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CCTV फुटेज: निर्दोष होने का सबसे बड़ा प्रमाण
जब हंगामा बढ़ता गया, तब व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस को व्यापारी प्रफुल्ल पोरवाल की दुकान के सीसीटीवी फुटेज सौंपे। Manasa Opium Case में यह फुटेज सबसे निर्णायक साबित हुए। फुटेज में स्पष्ट रूप से देखा गया कि आरोपी चालक यूनुस दुकान पर आया था और उसने केवल दो बोरी मक्का खरीदी थी। फुटेज में कहीं भी संदिग्ध सामग्री या अफीम की लेनदेन के संकेत नहीं मिले।
तकनीकी जांच और स्थानीय साक्ष्यों से यह स्पष्ट हो गया कि चालक ने व्यापारी से सिर्फ अनाज खरीदा था और अफीम उसने रास्ते में कहीं और से लोड की थी। चालक ने पुलिस को गुमराह करने और मुख्य तस्करों को बचाने के लिए व्यापारी का नाम लिया था।
सत्य की जीत और पुलिस की वापसी
सीसीटीवी के पुख्ता सबूतों और जनता के भारी विरोध के सामने राजस्थान पुलिस के पास व्यापारी को छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। पुख्ता तकनीकी साक्ष्य मिलने के बाद प्रफुल्ल पोरवाल को देर रात बाइज्जत रिहा कर दिया गया। मनासा थाना प्रभारी शिव रघुवंशी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि राजस्थान पुलिस की टीम साक्ष्यों की जांच के बाद संतुष्ट होकर वापस लौट गई है।
Manasa Opium Case ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अपराध की दुनिया में तस्कर खुद को बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। व्यापारियों ने मांग की है कि ऐसे मामलों में पुलिस को पहले गोपनीय जांच करनी चाहिए ताकि किसी निर्दोष की सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल न हो। फिलहाल मनासा में शांति है, लेकिन यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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