Nayagaon News: सामुदायिक भवन की जमीन पर दुकानों का ‘खेल’, 1298 हेक्टेयर भूमि पर विवाद गहराया, ग्रामीणों ने खोला मोर्चा

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नीमच (नया गांव न्यूज़):– नगर परिषद नयागांव की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। मामला विकास का नहीं, बल्कि विकास के नाम पर सरकारी जमीन के ‘दुरुपयोग’ का है। Nayagaon News की सबसे बड़ी खबर वार्ड क्रमांक 09 से आ रही है, जहां सामुदायिक भवन के लिए आरक्षित जमीन पर रातों-रात दुकानों का निर्माण शुरू होने से स्थानीय रहवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।

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विवाद इतना बढ़ गया है कि अब कांग्रेस और किसान नेता भी इस लड़ाई में कूद पड़े हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जिस जमीन पर उनके बच्चों की शादियों के लिए भवन बनना था, वहां अब ‘मुनाफे की दुकानें’ सजाई जा रही हैं।

शमशान की जमीन से सामुदायिक भवन तक का सफर

मामले की तह तक जाने पर पता चला कि यह विवाद सर्वे नंबर 1566 से जुड़ा है। Nayagaon News को मिली जानकारी के अनुसार, यह 1.298 हेक्टेयर जमीन पहले मरघट या शमशान के लिए दर्ज थी। ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग और संघर्ष के बाद, प्रशासन ने इसका मद परिवर्तन (Land Use Change) किया था। तय हुआ था कि यहाँ एक भव्य सामुदायिक भवन (Community Hall) बनाया जाएगा, ताकि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को शादी-ब्याह के लिए भटकना न पड़े।

लेकिन अब आरोप है कि नगर परिषद नयागांव अपने ही तय किए गए उद्देश्यों से भटक गई है। नियमों को ताक पर रखकर, उसी जमीन पर अब कमर्शियल दुकानें तानी जा रही हैं।

पूर्व मंत्री ने किया था भूमिपूजन, फिर क्यों रुका काम?

इस पूरे मामले में राजनीति भी चरम पर है। ग्रामीणों ने ज्ञापन में याद दिलाया कि इस जमीन पर सामुदायिक भवन बनाने के लिए पूर्व कैबिनेट मंत्री और क्षेत्रीय विधायक रहे ओमप्रकाश सखलेचा ने बाकायदा भूमिपूजन किया था। शिलान्यास हो चुका था, जनता को उम्मीद थी कि जल्द ही भवन खड़ा होगा।

लेकिन हैरानी की बात यह है कि भूमिपूजन के बाद वहां एक ईंट भी सामुदायिक भवन की नहीं लगी। इसके उलट, अब वहां दुकानों के पिलर खड़े किए जा रहे हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर किसके इशारे पर जनता की सुविधा को छीनकर व्यवसायिक निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है?

शादियों के लिए दर-दर भटक रहा समाज

वार्ड नंबर 09 और आसपास के मोहल्लों में प्रजापत, माली, जायसवाल और मीणा समाज की बड़ी आबादी रहती है। Nayagaon News से बातचीत में स्थानीय महिलाओं और बुजुर्गों ने अपना दर्द बयां किया। उनका कहना है, “हमारे पास आज तक कोई भी सामुदायिक भवन नहीं है। जब भी घर में शादी, सगाई या कोई बड़ा सामाजिक कार्यक्रम होता है, तो हमें शहर से दूर महंगे गार्डन या भवन लेने पड़ते हैं। कई बार गरीब परिवार इतना खर्च नहीं उठा पाते और उन्हें भारी आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती है।”

प्रशासन की अनदेखी के चलते इन समाजों को सामाजिक आयोजनों के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में जाना पड़ रहा है, जो न केवल असुविधाजनक है बल्कि असुरक्षित भी है।

राजकुमार अहीर का बड़ा हमला:“यह गरीबों के हक पर डाका है”

इस मुद्दे को लेकर किसान नेता राजकुमार अहीर के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर के नाम एक कड़ा ज्ञापन सौंपा है। अहीर ने प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए इसे ‘सरकारी जमीन पर कब्जा’ करने की साजिश बताया। उन्होंने जावद विधायक पर गंभीर और तीखे आरोप लगाते हुए कहा,

“यह सब कुछ चहेते लोगों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। सरकारी जमीन का उपयोग जनहित में होना चाहिए, न कि व्यापार के लिए। यदि समय रहते दुकानों का निर्माण नहीं रोका गया और सामुदायिक भवन का काम शुरू नहीं हुआ, तो हम चुप नहीं बैठेंगे।”

आंदोलन की चेतावनी और प्रशासन का आश्वासन

कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है। उन्होंने मांग की है कि:

  1. नियम विरुद्ध हो रहे दुकानों के निर्माण पर तत्काल रोक लगाई जाए।

  2. पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो कि आखिर प्लान किसने बदला।

  3. क्षेत्र की आवश्यकता को देखते हुए सामुदायिक भवन का निर्माण तुरंत शुरू हो।

अगर प्रशासन ने जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। फिलहाल, ज्ञापन लेते समय अधिकारियों ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन देखना यह होगा कि क्या वाकई में गरीबों को उनका सामुदायिक भवन मिल पाएगा या फिर यह जमीन भी ‘दुकानदारी’ की भेंट चढ़ जाएगी।


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