नीमच में मासूमों के साथ ‘सिस्टम’ का सौतेला व्यवहार: मंदसौर में 13 तक छुट्टी, तो नीमच के बच्चे कड़ाके की ठंड में ठिठुरने को मजबूर क्यों?

Neemuch School Holiday

Neemuch School Holiday

नीमच (Neemuch School Holiday)। कहावत है कि “पड़ोसी के घर में आग लगे तो आंच अपने घर तक भी आती है”, लेकिन मध्य प्रदेश के नीमच और मंदसौर जिलों में प्रशासन की कार्यप्रणाली को देखकर लगता है कि यहाँ मौसम के मापदंड भी ‘सीमा’ देखकर बदल जाते हैं। मंदसौर जिला प्रशासन ने जहाँ गिरते तापमान और शीतलहर को भांपते हुए बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी, वहीं नीमच जिला प्रशासन की Neemuch School Holiday अदूरदर्शिता का खामियाजा आज सुबह हजारों मासूम बच्चों को भुगतना पड़ा।

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नीमच में ‘जीरो विजिबिलिटी’ और कांपते बचपन की हकीकत

आज शुक्रवार सुबह जब नीमच की सड़कों पर घना कोहरा चादर ताने खड़ा था और विजिबिलिटी (दृश्यता) महज 10 मीटर रह गई थी, तब छोटे-छोटे बच्चे स्कूल बसों के इंतजार में ठिठुर रहे थे। आज से जिले के सभी स्कूल अपने पुराने समय (सुबह 9:00 बजे) पर खुल गए। इसका मतलब यह था कि दूर-दराज से आने वाले बच्चों को सुबह 7:30 से 7:45 के बीच अपने घरों से निकलना पड़ा।

उस वक्त पारा 8 डिग्री से भी नीचे महसूस हो रहा था। कोहरा इतना घना था कि सड़कों पर हाथ को हाथ दिखाई नहीं दे रहा था। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या Neemuch School Holiday केवल कागजों तक सीमित है? क्या बच्चों की जान जोखिम में डालकर स्कूल खोलना अनिवार्य था?

मंदसौर Vs नीमच: एक ही मौसम, दो अलग फैसले

पड़ोसी जिले मंदसौर में जिला शिक्षा अधिकारी टेरेसा मिंज ने दूरदर्शिता दिखाते हुए नर्सरी से कक्षा 5वीं तक के बच्चों के लिए 7 जनवरी से 13 जनवरी 2026 तक का लंबा अवकाश घोषित कर दिया है। यहाँ तक कि 6ठी से 8वीं तक के स्कूलों का समय भी बढ़ाकर सुबह 10:00 बजे कर दिया गया है।

इसके उलट, नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्र ने केवल Neemuch School Holiday 2 दिनों की राहत देकर अपना पल्ला झाड़ लिया। आज सुबह जब स्कूल खुले, तो अभिभावकों के मन में एक ही चुभता हुआ सवाल था— “क्या नीमच के बच्चों को ठंड नहीं लगती? या यहाँ के प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार है?”

ग्राउंड रिपोर्ट: बस ड्राइवरों और अभिभावकों का छलका दर्द

‘द टाइम्स ऑफ़ एमपी’ (The Times of MP) की टीम ने जब धरातल पर स्थिति देखी, तो मंजर डरावना था। कोहरे के कारण स्कूल बसें रेंगती हुई चल रही थीं। एक बस ड्राइवर ने बताया,

“साहब, सामने का कुछ दिख नहीं रहा है। आज कोहरा इतना ज्यादा है कि 10-15 मिनट की देरी सामान्य बात है। बच्चों को इस मौसम में बुलाना सरासर गलत है।”

वहीं, अपने बच्चे को बस स्टॉप पर छोड़ने आए एक अभिभावक ने गुस्से में कहा, “मंदसौर में कलेक्टर बच्चों का ख्याल रख रहे हैं, लेकिन हमारे नीमच के ‘राजा’ को शायद ये ठंड महसूस नहीं हो रही। 13 जनवरी तक अवकाश नीमच में भी होना चाहिए था।”

प्रशासन की विफलता या संवेदनहीनता?

जब मौसम विभाग लगातार चेतावनी दे रहा है कि शीतलहर से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है, तो फिर नीमच प्रशासन ने स्कूलों को खोलने की जल्दबाजी क्यों की? Neemuch School Holiday को लेकर सोशल मीडिया पर भी आक्रोश है। लोग इसे मासूमों के साथ ‘सौतेला व्यवहार’ करार दे रहे हैं।

प्रशासन का तर्क हो सकता है कि परीक्षाएं नजदीक हैं, लेकिन मंदसौर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षाएं अपने समय पर होंगी, सिर्फ नियमित कक्षाओं को राहत दी गई है। तो फिर नीमच में यह मॉडल क्यों नहीं अपनाया गया? अंधेरी और कोहरे से भरी सड़कों पर दौड़ती स्कूल बसें किसी भी वक्त बड़े हादसे का सबब बन सकती हैं।

जागिए हुजूर, बच्चे आपके भी हैं!

नीमच कलेक्टर और शिक्षा विभाग को यह समझना होगा कि शिक्षा जरूरी है, लेकिन जीवन की कीमत पर नहीं। मंदसौर के फैसले से सीख लेते हुए Neemuch School Holiday भी तुरंत अवकाश की अवधि बढ़ाई जानी चाहिए। छोटे बच्चे इस कड़ाके की ठंड को सहने के काबिल नहीं हैं। यदि इस घने कोहरे में कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर जिला प्रशासन की होगी।


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