India-Israel Missile Deal: ₹78,217 करोड़ का ऐतिहासिक रक्षा सौदा, अब घर बैठे लाहौर-बीजिंग तक मार करने की क्षमता !

India-Israel Missile Deal

India-Israel Missile Deal

नीमच:India-Israel Missile Deal भारतीय उपमहाद्वीप में बदलते सामरिक समीकरण और 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद पैदा हुए सुरक्षा हालातों को देखते हुए भारत ने एक बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रीय सुरक्षा को अभेद्य बनाने की दिशा में भारत अपने पुराने और भरोसेमंद मित्र देश इज़राइल के साथ रक्षा सहयोग के एक नए अध्याय की शुरुआत कर रहा है। रक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों और 'इंडियन डिफेंस न्यूज़' की रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय वायुसेना (IAF) को महाबली बनाने के लिए India-Israel Missile Deal अपने अंतिम चरण में है। यह सौदा करीब 8.7 अरब डॉलर यानी लगभग ₹78,217 करोड़ का है।

इस डील के तहत भारत को ऐसी कटिंग-एज टेक्नोलॉजी वाली मिसाइलें और बम मिलेंगे, जो न केवल दुश्मनों के रडार को चकमा देने में सक्षम हैं, बल्कि घर बैठे दुश्मन के ठिकानों को शमशान बनाने की ताकत रखते हैं।

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India-Israel Missile Deal दो मोर्चों पर युद्ध की तैयारी और बदलती रणनीति

पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान और पूर्वी सीमा पर चीन की आक्रामकता किसी से छिपी नहीं है। मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान यह स्पष्ट हो गया था कि दुश्मन अब जीपीएस जैमिंग (GPS Jamming) जैसी तकनीकों का सहारा ले रहा है। ऐसे में भारत को अपनी ‘डीप स्ट्राइक’ क्षमता बढ़ाने की सख्त जरूरत थी।

इस India-Israel Missile Deal को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विज़िशन काउंसिल (DAC) से हरी झंडी मिल चुकी है। यह सौदा सिर्फ हथियारों की खरीद नहीं है, बल्कि यह चीन की उन्नत एयर डिफेंस प्रणाली और पाकिस्तान की नापाक साजिशों का मुंहतोड़ जवाब है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2020 से 2024 के बीच इज़राइल ने अपने कुल रक्षा निर्यात का 34% हिस्सा भारत को भेजा है, जो दोनों देशों के गहरे रिश्तों की गवाही देता है।

दुश्मन के लिए काल बनेंगी ये 3 मिसाइलें

India-Israel Missile Deal  इस मेगा डिफेंस पैकेज में मुख्य रूप से तीन तरह की मिसाइलें और गाइडेड बम शामिल हैं, जो भारतीय वायुसेना के बेड़े (Su-30MKI, MiG-29K और भविष्य में तेजस) को अजेय बना देंगे।

1. रैम्पेज (Rampage): रडार की पकड़ से बाहर

रैम्पेज मिसाइल, जिसे इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) ने विकसित किया है, पहले से ही भारतीय वायुसेना और नौसेना के पास सीमित संख्या में मौजूद है। 570 किलोग्राम वजनी यह मिसाइल सुपरसोनिक रफ्तार से हमला करती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘एंटी-जैमिंग’ तकनीक है। यानी अगर दुश्मन जीपीएस सिग्नल को जाम भी कर दे, तो भी यह मिसाइल अपने लक्ष्य को सटीक भेदने में सक्षम है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में आतंकी बंकरों को तबाह करने में इसकी भूमिका अहम रही थी।

2. एयर लोरा (Air LORA): हवा से जमीन पर तबाही

इस India-Israel Missile Deal का सबसे बड़ा आकर्षण ‘एयर लोरा’ (Air LORA) मिसाइल है। यह एक एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल है।

  • रेंज: 400 से 430 किलोमीटर।

  • रफ्तार: मैक-5 (ध्वनि की गति से 5 गुना तेज)।

  • सटीकता: इसका वार इतना सटीक है कि यह 10 मीटर से भी कम के दायरे में तबाही मचा सकती है। यह मिसाइल दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य अड्डों को पलक झपकते ही राख के ढेर में बदल सकती है।

3. आइस ब्रेकर (Ice Breaker): आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कमाल

आधुनिक युद्ध अब सिर्फ बारूद का नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी का है। ‘आइस ब्रेकर’ मिसाइल इसी सोच का नतीजा है। 300 किलोमीटर की रेंज वाली यह मिसाइल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस है। यह कम ऊंचाई पर उड़ते हुए दुश्मन के रडार को चकमा देती है और ‘ऑटोमैटिक टारगेट रिकग्निशन’ के जरिए भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी सिर्फ अपने लक्ष्य को पहचान कर हमला करती है।

आत्मनिर्भर भारत: टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर बड़ी सहमति

इस India-Israel Missile Deal सौदे की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत सिर्फ हथियार खरीद नहीं रहा, बल्कि उन्हें बनाना भी सीख रहा है। 2025 के अंत तक पूरी ‘टेक्नोलॉजी ट्रांसफर’ (ToT) पर सहमति बन गई है। इसका मतलब है कि भविष्य में India-Israel Missile Deal के तहत आने वाली एयर लोरा और आइस ब्रेकर जैसी मिसाइलें ‘मेड इन इज़राइल’ नहीं, बल्कि ‘मेड इन इंडिया’ होंगी।

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) मिलकर इनका निर्माण करेंगे। HAL जहाँ विमानों में इन मिसाइलों को फिट करने (इंटीग्रेशन) का काम संभालेगी, वहीं BEL इसके इलेक्ट्रॉनिक दिमाग यानी गाइडेंस सिस्टम को तैयार करेगी। इसमें DRDO की मदद भी ली जाएगी।


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