नीमच भूमि विवाद: माधोपुरी बालाजी की बेशकीमती जमीन पर ‘भू-माफिया’ की नजर? धाकड़ परिवार ने प्रशासन के सामने खोले कई राज

नीमच भूमि विवाद
नीमच न्यूज : शहर के हृदय स्थल कहे जाने वाले महू रोड स्थित माधोपुरी बालाजी क्षेत्र एक बार फिर सुर्खियों में है। यहाँ बगीचा नंबर-21 की बेशकीमती पुश्तैनी जमीन को लेकर एक पुराना मसला फिर से गर्मा गया है। नीमच भूमि विवाद के इस ताजे मामले में धाकड़ परिवार ने प्रशासन का दरवाजा खटखटाते हुए विनोबागंज निवासी संजय गोहर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित परिवार का दावा है कि उनकी वैध निजी संपत्ति को साजिश के तहत हड़पने की कोशिश की जा रही है, जिससे पूरा परिवार दहशत के साये में जीने को मजबूर है।
क्या है पूरा मामला?
नीमच शहर में रियल एस्टेट के दाम आसमान छू रहे हैं, और इसी के साथ जमीनी झगड़ों की सूची भी लंबी होती जा रही है। ताज़ा मामला माधोपुरी बालाजी मंदिर के ठीक पीछे स्थित बगीचा नंबर-21 का है। धाकड़ परिवार, जो दशकों से इस भूमि का स्वामी है, अब अपनी ही जमीन को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
परिवार के मुखिया और सदस्यों ने जिला कलेक्टर और मुख्य नगरपालिका अधिकारी को लिखित आवेदन देकर गुहार लगाई है। उनका कहना है कि संजय गोहर नामक व्यक्ति प्रशासन को गुमराह कर उनकी पुश्तैनी जमीन को ‘शासकीय’ घोषित करने की कोशिश कर रहा है, ताकि उस पर अवैध कब्जा जमाया जा सके।
1968 की रजिस्ट्री और पुख्ता सबूत
इस नीमच भूमि विवाद में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब धाकड़ परिवार ने अपने दावे के समर्थन में दस्तावेजी सबूत पेश किए। परिवार का स्पष्ट कहना है कि विवादित भूमि की रजिस्ट्री वर्ष 1968 से उनके नाम पर विधिवत रूप से दर्ज है।
शासकीय अभिलेख: जमीन का रिकॉर्ड सरकारी फाइलों में स्पष्ट है।
संपत्तिकर (Property Tax): परिवार का दावा है कि वे वर्षों से नगर पालिका को नियमित रूप से इस जमीन का संपत्तिकर भरते आ रहे हैं।
सवाल यह उठता है कि जिस जमीन का टैक्स नगर पालिका वसूल रही है और जिसकी रजिस्ट्री 50 साल से भी ज्यादा पुरानी है, उसे अचानक शासकीय बताकर कब्जा करने की कोशिश क्यों की जा रही है?
धार्मिक स्थल की आड़ में खेल?
धाकड़ परिवार ने अपनी शिकायत में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। आरोप है कि आरोपी पक्ष न केवल अवैध रूप से मिट्टी भराव कर रहा है, बल्कि एक कथित ‘धार्मिक स्थल’ का हवाला देकर जमीन पर कब्जा जमाने की फिराक में है।
अक्सर देखा गया है कि विवादित जमीनों पर धार्मिक चिन्ह स्थापित कर प्रशासन के हाथ बांधने की कोशिश की जाती है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि आरोपी इसी रणनीति का इस्तेमाल कर रहा है ताकि इस नीमच भूमि विवाद को धार्मिक रंग देकर कार्रवाई से बचा जा सके।
दहशत में महिलाएं और बच्चे
जमीन के इस झगड़े ने अब एक मानवीय त्रासदी का रूप ले लिया है। धाकड़ परिवार ने आरोप लगाया है कि संजय गोहर द्वारा जनसुनवाई में बार-बार झूठी और भ्रामक शिकायतें की जा रही हैं। इसका मकसद परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना है।परिवार के सदस्यों ने बताया,
“क्षेत्र में जानबूझकर विवाद का माहौल बनाया जा रहा है। हमारे घर की महिलाएं और बच्चे भय के वातावरण में जी रहे हैं। असामाजिक तत्वों की आवाजाही बढ़ गई है, जिससे पूरे इलाके की शांति व्यवस्था खतरे में पड़ गई है।“
हालिया कार्रवाई और प्रशासन की भूमिका
गौरतलब है कि हाल ही में इसी भूमि पर अवैध निर्माण की शिकायत मिलने पर नगर पालिका के अमले ने कार्रवाई की थी। उस कार्रवाई के बाद से यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। धाकड़ परिवार ने अब प्रशासन से दो टूक मांग की है:
वास्तविक तथ्यों और 1968 के दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच हो।
निर्दोष परिवार को अनावश्यक परेशानियों और मानसिक प्रताड़ना से राहत मिले।
आरोपी पक्ष पर प्रशासन को गुमराह करने के लिए सख्त कार्रवाई हो।
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