मनासा/नीमच। आज के दौर में जब पारंपरिक खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है, तब नीमच जिले के मनासा क्षेत्र के एक छोटे से गांव भाटखेड़ी के किसान ने पूरी व्यवस्था को आइना दिखाया है। उज्जैन संभाग के कमिश्नर आशीष सिंह के हालिया भ्रमण के दौरान Bamboo Man के नाम से विख्यात प्रगतिशील कृषक कमलाशंकर विश्वकर्मा की उपलब्धियों ने न केवल प्रशासन का ध्यान खींचा, बल्कि खेती के भविष्य को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
प्रशासन के सामने पेश किया ‘भविष्य का मॉडल’
संभागायुक्त आशीष सिंह जब भाटखेड़ी पहुंचे, तो उनका स्वागत किसी भव्य सरकारी इमारत में नहीं, बल्कि प्रकृति की गोद में बने “विश्वकर्मा बैंबू फार्म एंड बायोडायवर्सिटी पार्क” में हुआ। यहाँ Bamboo Man ने यह साबित कर दिया कि यदि किसान सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन करें, तो बंजर जमीन भी सोना उगल सकती है। राष्ट्रीय बांस मिशन योजना के अंतर्गत तैयार इस फार्म में बांस की विभिन्न प्रजातियों का घना जंगल तैयार किया गया है।
कमिश्नर को जानकारी देते हुए Bamboo Man ने बताया कि उनका यह प्रोजेक्ट केवल मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि जैव विविधता (Biodiversity) को बचाने का एक गंभीर प्रयास है। यहाँ बांस के साथ-साथ जैविक खेती (Organic Farming) के जो प्रयोग किए जा रहे हैं, वे रासायनिक खेती के जहरीले चक्र को तोड़ने की क्षमता रखते हैं।
एक टूथब्रश, जो बदल सकता है पर्यावरण की दिशा
भ्रमण के दौरान सबसे अधिक चर्चा उस छोटे से उपहार की रही, जो Bamboo Man ने संभागायुक्त को भेंट किया। यह था बांस से बना ‘बायोडिग्रेडेबल एवं इको-फ्रेंडली बैंबू टूथब्रश’। दिखने में साधारण सा लगने वाला यह ब्रश उस वैश्विक समस्या का समाधान है जिसे ‘प्लास्टिक प्रदूषण’ कहते हैं।
कमिश्नर आशीष सिंह ने इस नवाचार की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने स्वीकार किया कि ऐसे छोटे-छोटे जमीनी नवाचार ही बड़े बदलाव की नींव रखते हैं। Bamboo Man का यह प्रयास दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी वैश्विक स्तर की सोच और उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।
सरकारी तंत्र और किसान के बीच का सेतु
इस भ्रमण के दौरान केवल तारीफों के पुल नहीं बांधे गए, बल्कि धरातल की चुनौतियों पर भी बात हुई। Bamboo Man ने जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया कि हर शनिवार को नीमच जिला मुख्यालय पर ‘जैविक हाट बाजार’ का आयोजन किया जा रहा है। यह एक कड़वा सच है कि किसान फसल तो उगा लेता है, लेकिन बाजार की कमी उसे तोड़ देती है। ऐसे में ‘जैविक हाट’ जैसी पहल किसानों को बिचौलियों के चंगुल से मुक्त कर रही है।
जिला कलेक्टर हिमांशु चंद्रा और कृषि विभाग के तमाम आला अधिकारी भी इस दौरान मौजूद थे। उप संचालक कृषि पीसी पटेल और उद्यानिकी विभाग के अतर सिंह कन्नौजे के साथ Bamboo Man ने तकनीकी विषयों पर चर्चा की। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक सीपी पचौरी ने भी माना कि कमलाशंकर के फार्म पर अपनाई गई तकनीकें वैज्ञानिक रूप से सटीक और भविष्य के लिए लाभकारी हैं।
कड़वा सच: क्यों जरूरी है “Bamboo Man” जैसे किसान?
साफ तौर पर कहा जाए तो आज का कृषि संकट केवल मानसून पर निर्भरता नहीं, बल्कि नवाचार की कमी है। Bamboo Man ने पारंपरिक गेहूं-चना के ढर्रे से बाहर निकलकर जोखिम लिया। उन्होंने बांस को चुना, जिसे ‘गरीब की लकड़ी’ कहा जाता था, लेकिन आज वही बांस ‘ग्रीन गोल्ड’ बन चुका है।
संभागायुक्त आशीष सिंह ने निरीक्षण के दौरान पाया कि इस फार्म में पक्षियों और मित्र कीटों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, जो इस बात का प्रमाण है कि रासायनिक खाद के बिना भी बेहतर परिणाम पाए जा सकते हैं। यह मॉडल उन किसानों के लिए एक चेतावनी भी है और प्रेरणा भी, जो केवल खाद और कीटनाशकों के भरोसे खेती कर रहे हैं।
प्रशंसा से आगे की राह
संभागायुक्त द्वारा की गई सराहना निश्चित रूप से Bamboo Man का मनोबल बढ़ाएगी, लेकिन असली सफलता तब होगी जब नीमच का यह मॉडल प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जाए। प्रशासन को चाहिए कि वह केवल भ्रमण तक सीमित न रहकर, ऐसे नवाचारी किसानों को प्रशिक्षण केंद्रों के रूप में विकसित करे।
कमलाशंकर विश्वकर्मा उर्फ Bamboo Man ने अपना काम कर दिया है—उन्होंने दिखा दिया है कि पर्यावरण की रक्षा और आर्थिक उन्नति एक साथ संभव है। अब गेंद सरकार और अन्य किसानों के पाले में है।
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