Jio Network के लिए ‘मैदान’ में दौड़े वकील! गुस्से में अंबानी पर ठोंका केस

Jio Network
पानीपत। आज के डिजिटल युग में जहाँ 5G और हाई-स्पीड डेटा के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं हरियाणा के पानीपत से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने टेलीकॉम जगत में खलबली मचा दी है। पानीपत जिला न्यायालय परिसर में Jio Network की बदहाली से तंग आकर वकीलों ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। वकीलों ने न केवल कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोला है, बल्कि रिलायंस जियो के चेयरमैन आकाश अंबानी और मैनेजिंग डायरेक्टर ईशा अंबानी को भी कानूनी घेरे में लेते हुए लोक अदालत में पार्टी बना दिया है।
यह मामला केवल खराब सिग्नल का नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर न्याय प्रणाली में आ रही बाधाओं और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा है। Jio Network की इस विफलता ने वकीलों को मजबूर कर दिया है कि वे अपनी पैरवी छोड़कर पहले अपने संचार के साधनों को दुरुस्त करवाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएं।
क्या है पूरा मामला?
पानीपत कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वरिष्ठ एडवोकेट अमित राठी (43) पिछले काफी समय से Jio Network की खराब सेवाओं से जूझ रहे थे। उन्होंने अपनी शिकायत में विस्तार से बताया कि कोर्ट परिसर, विशेषकर वकीलों के चैंबर, दोनों मुख्य कोर्ट बिल्डिंग और टाइपिस्ट कॉम्प्लेक्स में Jio Network पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। राठी के अनुसार, स्थिति इतनी खराब है कि वकीलों को एक सामान्य फोन कॉल करने या सुनने के लिए अपनी सीट छोड़कर बिल्डिंग से बाहर खुले मैदान में भागना पड़ता है।
अमित राठी ने ‘लीगल सर्विसेज अथॉरिटीज एक्ट, 1987’ की धारा 22-C के तहत यह आवेदन दायर किया है। यह कानून सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं में विवाद निपटान से संबंधित है। उन्होंने बताया कि यह विवाद तब और बढ़ गया जब एक सुनवाई के दौरान उन्हें फेसबुक पर मौजूद कुछ डिजिटल साक्ष्य दिखाने थे, लेकिन Jio Network की रफ़्तार इतनी धीमी थी कि वे समय पर प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। इसी घटना के बाद उन्होंने इस मामले को कानूनी रूप देने का निर्णय लिया।
Jio Network की विफलता से पैदा हुई 4 बड़ी चुनौतियां
वकीलों ने अपनी याचिका में Jio Network की खराब गुणवत्ता के कारण होने वाली चार प्रमुख समस्याओं को सूचीबद्ध किया है:
कॉल ड्रॉप की गंभीर समस्या: कोर्ट की कंक्रीट इमारतों के भीतर मोबाइल सिग्नल लगभग गायब रहते हैं। मुवक्किलों और अन्य वकीलों से संपर्क साधना असंभव हो गया है, जिससे पेशेवर काम में भारी रुकावट आ रही है।
ऑनलाइन न्यायिक सेवाओं का ठप होना: वर्तमान में न्यायपालिका का अधिकांश कार्य ‘ई-कोर्ट’ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन होता है। Jio Network न चलने के कारण वकील न तो अदालती आदेश चेक कर पा रहे हैं और न ही केस की अगली तारीखों की जानकारी ले पा रहे हैं।
फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन में बाधा: कोर्ट फीस, स्टांप ड्यूटी और अन्य चालानों का भुगतान अब ऑनलाइन होता है। खराब Jio Network के कारण बैंक के ओटीपी (OTP) समय पर नहीं मिलते, जिससे भुगतान अटक जाता है और कानूनी कार्यवाही में अनावश्यक देरी होती है।
कानूनी रिसर्च में परेशानी: वकील अपनी बहस तैयार करने के लिए विभिन्न डिजिटल डेटाबेस और सुप्रीम कोर्ट/हाईकोर्ट के निर्णयों का ऑनलाइन अध्ययन करते हैं। Jio Network की कम स्पीड के कारण फाइलों को एक्सेस करना नामुमकिन हो गया है।
अंबानी परिवार को पक्षकार बनाने के पीछे का तर्क
अमित राठी ने इस मामले में रिलायंस जियो के मुख्यालय (नवी मुंबई) को संबोधित करते हुए आकाश अंबानी और ईशा अंबानी को प्रतिवादी बनाया है। शिकायतकर्ता का तर्क सीधा और स्पष्ट है—कंपनी के शीर्ष अधिकारी अपनी सेवाओं की गुणवत्ता के लिए सीधे तौर पर उत्तरदायी हैं। ट्राई (TRAI) के नियमों के अनुसार, यदि कोई कंपनी शुल्क वसूल रही है, तो उसे मानक गुणवत्ता वाली सेवा प्रदान करनी ही होगी। Jio Network की निरंतर विफलता यह दर्शाती है कि स्थानीय प्रबंधन से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक इस समस्या के प्रति लापरवाह है।
स्थानीय वकीलों में भारी रोष
पानीपत कोर्ट के अन्य वकीलों ने भी अमित राठी की इस पहल का पुरजोर समर्थन किया है। एडवोकेट जगविंद्र मलिक, सुनील वधवा, अशोक और दीपक मलिक का कहना है कि बार-बार कस्टमर केयर पर शिकायत करने के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। वकीलों का आरोप है कि रिलायंस जियो जैसी दिग्गज कंपनी का नेटवर्क एक जिला मुख्यालय के न्यायालय परिसर में विफल होना प्रशासनिक लापरवाही की पराकाष्ठा है।
स्थायी लोक अदालत ने याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए इसे विचारार्थ स्वीकार कर लिया है और रिलायंस जियो को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी 2026 को होनी तय की गई है। इस सुनवाई में यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी अपने Jio Network की इस बड़ी खामी पर क्या सफाई पेश करती है।
यह मामला न केवल पानीपत के लिए, बल्कि पूरे देश के उन करोड़ों मोबाइल यूजर्स के लिए एक मिसाल बन सकता है जो टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी और खराब सेवाओं से परेशान हैं। वकीलों की इस लड़ाई ने एक बात साफ कर दी है कि अगर सेवाएं सही नहीं मिल रही हैं, तो अब बड़ी से बड़ी कॉर्पोरेट हस्तियों को भी जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
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