नीमच में अतिक्रमण पर संग्राम: Nagar Palika की कार्रवाई में फूटा गुस्सा, रसूखदारों के आगे नतमस्तक प्रशासन?

Nagar Palika
नीमच। शहर की सड़कों को अतिक्रमण मुक्त कराने का दावा करने वाली Nagar Palika और जिला प्रशासन की टीम सोमवार को एक बार फिर एक्शन मोड में नजर आई। सोमवार सुबह किलेश्वर महादेव मंदिर मार्ग और केंद्रीय विद्यालय की दीवार से सटी करीब 15 से 20 अवैध गुमटियों को हटाने की बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। हालांकि, यह कार्रवाई जितनी प्रशासनिक सख्ती के लिए चर्चा में रही, उससे कहीं अधिक विवादों और तीखी बहस की भेंट चढ़ गई। इस दौरान न केवल सत्ताधारी दल के पार्षद और अधिकारियों के बीच जुबानी जंग हुई, बल्कि प्रशासन की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए।
किलेश्वर महादेव मार्ग पर भारी हंगामा: पार्षद बनाम अधिकारी


Nagar Palika की कार्रवाई की भनक लगते ही भाजपा पार्षद विनीत पाटनी मौके पर पहुंच गए और Nagar Palika के अमले को आड़े हाथों लिया। देखते ही देखते माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। पार्षद पाटनी का सीधा आरोप था कि प्रशासन केवल गरीबों की गुमटियां उजाड़ने में दिलचस्पी रखता है, जबकि शहर के असली ‘मगरमच्छ’ आज भी सुरक्षित हैं।
पार्षद ने अधिकारियों से सवाल किया कि आखिर Nagar Palika की यह कार्रवाई केवल कुछ दिनों का नाटक क्यों बनकर रह जाती है? उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्व में लायंस पार्क और सिटी रोड श्मशान घाट मार्ग से गुमटियां हटाई गई थीं, लेकिन आज वहां पहले से अधिक अवैध कब्जे हो चुके हैं। पाटनी ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि किलेश्वर मार्ग पर नियमों को ताक पर रखकर एक ही कतार में कई दुग्ध पार्लर संचालित हो रहे हैं, जो वास्तव में गुटखा, सिगरेट और अन्य नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री के अड्डे बन चुके हैं।
गायत्री मंदिर रोड: राजनीतिक दबाव के आगे पस्त प्रशासन!
इस पूरी कार्रवाई के दौरान शहर के जागरूक नागरिकों ने प्रशासन के दोहरे रवैये पर उंगली उठाई है। सबसे बड़ा सवाल गायत्री मंदिर रोड को लेकर है। हकीकत यह है कि Nagar Palika और प्रशासन की टीम इस मार्ग पर कार्रवाई करने से कतरा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, गायत्री मंदिर मार्ग पर दुकानदारों ने फुटपाथ तक कब्जा कर रखा है और अपना सामान सड़कों पर फैला दिया है।
हैरानी की बात यह है कि दिवाली के समय प्रशासन ने यहां 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन आज महीनों बीत जाने के बाद भी एक पत्थर तक नहीं हिलाया गया। फुटपाथ पर अवैध कब्जे के कारण दुकानों पर आने वाले ग्राहक अपने वाहन (बाइक और कार) सीधे सड़क पर खड़े कर देते हैं, जिससे इस मार्ग पर निकलना दूभर हो गया है। सूत्रों का कहना है कि गायत्री मंदिर रोड के रसूखदार दुकानदारों के पीछे भारी ‘राजनीतिक दबाव’ है, जिसके कारण Nagar Palika का अमला वहां जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। क्या नियम केवल बेसहारा गुमटी वालों के लिए हैं? क्या रसूखदारों को शहर की यातायात व्यवस्था बिगाड़ने का लाइसेंस मिल गया है?
अधिकारियों का पक्ष और भविष्य की चेतावनी
विवादों के बीच, Nagar Palika सीएमओ दुर्गा बामनिया ने स्पष्ट किया कि प्रशासन किसी भी दबाव में काम नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विद्यालय और किलेश्वर मार्ग को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। सीएमओ ने आश्वासन दिया कि दुग्ध पार्लरों की भी जांच की जाएगी और जो नियमों का उल्लंघन करेंगे, उन्हें हटाया जाएगा।
इसके साथ ही प्रशासन ने अब अपना अगला निशाना मनासा नाका स्थित पीजी कॉलेज के बाहर जमी गुमटियों को बनाया है। वहां भी नोटिस और मुनादी के जरिए अल्टीमेटम दिया जा चुका है। अधिकारियों का दावा है कि आने वाले दिनों में शहर के अन्य हिस्सों में भी सख्त कार्रवाई की जाएगी, लेकिन बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या गायत्री मंदिर रोड का अतिक्रमण कभी हटेगा या वह राजनीतिक संरक्षण में प्रशासन का मुंह चिढ़ाता रहेगा?
प्रशासन के लिए सीधी चुनौती
अगर Nagar Palika वाकई शहर का सौंदर्यीकरण और यातायात सुधारना चाहती है, तो उसे ‘पिक एंड चूज’ की नीति छोड़नी होगी। केवल गरीब रेहड़ी वालों को हटाकर वाहवाही लूटने के बजाय, उन रसूखदारों पर भी कार्रवाई करनी होगी जिन्होंने सड़कों और फुटपाथों को अपनी निजी जागीर समझ लिया है। जब तक गायत्री मंदिर रोड जैसे हॉटस्पॉट पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक प्रशासन की हर मुहिम केवल कागजी और दिखावटी ही मानी जाएगी।
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