चित्तौड़गढ़ किडनैपिंग केस: 90 मिनट में पुलिस ने युवक को मौत के मुंह से निकाला

चित्तौड़गढ़ किडनैपिंग केस
चित्तौड़गढ़। राजस्थान के ऐतिहासिक शहर चित्तौड़गढ़ में बुधवार की रात किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं थी। शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में शुमार ‘न्यू क्लॉथ मार्केट’ से एक युवक के सरेआम अपहरण की खबर ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया। इस चित्तौड़गढ़ किडनैपिंग केस में पुलिस की तत्परता और ‘क्विक रिस्पांस’ का ही नतीजा था कि महज 90 मिनट के भीतर मौत के साये में जी रहे युवक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
बाजार में रैकी और अचानक हमला
चित्तौड़गढ़ किडनैपिंग केस की शुरुआत बुधवार शाम करीब 7:30 बजे हुई। पीड़ित कालूलाल माली, जो बोरदा गांव का निवासी है, अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बूंदी रोड स्थित बाजार में अपना मोबाइल ठीक करवाने आया था। उसे रत्ती भर भी अंदाजा नहीं था कि उसकी हर हरकत पर पैनी नजर रखी जा रही है। आरोपी किशन माली और रतन माली अपने करीब सात-आठ साथियों के साथ पहले से ही घात लगाकर बैठे थे।
जैसे ही कालूलाल बाजार के एक सुनसान मोड़ पर पहुँचा, हमलावरों ने अचानक उसे घेर लिया। हमलावरों ने सबसे पहले कालूलाल की आंखों और मुंह में मिर्ची पाउडर झोंक दिया, जिससे वह पूरी तरह असहाय हो गया। इससे पहले कि कोई राहगीर मदद के लिए आगे आता, बदमाशों ने चाकू की नोक पर उसे जबरन एक सफेद रंग की स्कॉर्पियो गाड़ी में पटक लिया और तेज रफ्तार से शहर से बाहर निकल गए। चित्तौड़गढ़ किडनैपिंग केस की इस वारदात ने पूरे व्यापारिक क्षेत्र में दहशत फैला दी।
मौत का मंजर: रिवॉल्वर की नोक पर 90 मिनट
गुरुवार को अस्पताल में उपचार के दौरान पीड़ित कालूलाल ने उस खौफनाक मंजर की दास्तां बयां की। उसने बताया कि अपहरणकर्ता उसे बस्सी रोड से होते हुए दरगाह की ओर ले गए और फिर सैमलपुरा के पास कच्चे रास्तों पर गाड़ी दौड़ाते रहे। एक सुनसान मंदिर के पास गाड़ी रोककर दो बदमाशों ने उस पर रिवॉल्वर तान दी।
कालूलाल ने बताया,
“वे लोग आपस में फोन पर किसी से बात कर रहे थे और कह रहे थे कि इसे यहीं मारकर सुनसान जगह पर फेंक देते हैं।”
आरोपियों के इरादे बेहद खतरनाक थे, लेकिन इसी बीच पुलिस की जबरदस्त घेराबंदी की सूचना उन तक पहुँच गई। शहर के हर नाके पर पुलिस की मौजूदगी देख बदमाश घबरा गए। उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए अपने हथियार बाइक पर पीछे चल रहे साथियों को सौंप दिए और भागने की फिराक में लग गए।
पुलिस का ‘ऑपरेशन रेस्क्यू‘ और घेराबंदी
चित्तौड़गढ़ किडनैपिंग केस की गंभीरता को देखते हुए चित्तौड़गढ़ पुलिस ने तत्काल ‘ए श्रेणी’ की नाकाबंदी लागू कर दी। कोतवाली, गंगरार, साडास और आसपास के थानों की संयुक्त टीमों ने स्कॉर्पियो का पीछा शुरू किया। पुलिस ने गंगरार क्षेत्र में रणनीतिक रूप से बदमाशों को चारों तरफ से घेर लिया। चित्तौड़गढ़ किडनैपिंग केस में पुलिस की इस सूझबूझ का परिणाम यह रहा कि महज डेढ़ घंटे के भीतर कालूलाल को सुरक्षित बचा लिया गया।
चित्तौड़गढ़ किडनैपिंग केस में पकड़े गए आरोपियों की पहचान किशन माली, रतन माली और उनके साथियों के रूप में हुई है। पुलिस ने मौके से कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्हें कोर्ट में पेश कर एक दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि वारदात में इस्तेमाल हथियार कहाँ छिपाए गए हैं।
पुरानी रंजिश और गहरी साजिश
इस चित्तौड़गढ़ किडनैपिंग केस के पीछे की मुख्य वजह पुरानी रंजिश बताई जा रही है। कालूलाल के अनुसार, उसका किसी से सीधा कोई विवाद नहीं था, लेकिन एक रिश्तेदारी से जुड़े पुराने मामले में कुछ लोग उसके खिलाफ साजिश रच रहे थे। आरोपी किशन माली ने इससे पहले भी गांव में कालूलाल के अपहरण की कोशिश की थी, लेकिन तब ग्रामीणों की सजगता से उसकी जान बच गई थी। इस बार बदमाशों ने शहर के बाजार को चुना, लेकिन राजस्थान पुलिस की मुस्तैदी ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।
जनता ने की पुलिस की सराहना
बाजार क्षेत्र में हुई इस सनसनीखेज चित्तौड़गढ़ किडनैपिंग केस के बाद से स्थानीय व्यापारियों और आमजन में सुरक्षा को लेकर चिंता थी, लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने विश्वास बहाली का काम किया है। गुरुवार को दिनभर चित्तौड़गढ़ की गलियों और सोशल मीडिया पर पुलिस के इस सफल ऑपरेशन की चर्चा रही। लोगों का कहना है कि अगर 15 मिनट की भी देरी होती, तो बदमाशों के इरादे कुछ और ही थे।
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