मंदसौर (Nakli Ghee MP News)। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में मिलावटखोरों के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ को अंजाम दिया है। शहर के अभिनंदन नगर स्थित कर्मचारी कॉलोनी में शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने एक ऐसी अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है, जहाँ आपकी सेहत के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा था। इस कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में Nakli Ghee और नकली शहद बरामद किया गया है।
आधी रात को पुलिस का छापा, रंगे हाथों पकड़े गए आरोपी
मंदसौर पुलिस को पिछले कुछ दिनों से मुखबिरों के जरिए यह पुख्ता जानकारी मिल रही थी कि शहर के रिहायशी इलाकों के पीछे छिपे हुए ठिकानों पर Nakli Ghee बनाने का काला कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सीएसपी जितेंद्र कुमार भास्कर, सिटी कोतवाली टीआई पुष्पेंद्र सिंह राठौर और नई आबादी टीआई कुलदीप सिंह राठौर के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई।
रात के करीब 12:30 बजे, जब पूरा शहर गहरी नींद में था, पुलिस और फूड सेफ्टी टीम ने कर्मचारी कॉलोनी की एक झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाके में अचानक दबिश दी। पुलिस की टीम जब मौके पर पहुँची, तो वहाँ का नजारा देखकर दंग रह गई। आरोपी उस समय भट्टी सुलगाकर Nakli Ghee तैयार करने की प्रक्रिया में पूरी तरह मशगूल थे। पुलिस ने मौके से लगभग 25 से 30 लीटर तैयार नकली घी और करीब दो लीटर नकली शहद जब्त किया है।
सोयाबीन तेल और खतरनाक केमिकल का खौफनाक ‘फॉर्मूला’
जांच में जो खुलासा हुआ है, वह किसी भी आम आदमी की रूह कंपा देने के लिए काफी है। यह Nakli Ghee किसी दूध या मलाई से नहीं, बल्कि सोयाबीन तेल और डालडा (वनस्पति घी) के मिश्रण से तैयार किया जा रहा था। आरोपियों ने पूछताछ में कुबूल किया कि वे पहले सोयाबीन तेल को गर्म करते थे और फिर उसमें खास तरह के रसायनों और ‘आर्टिफिशियल देसी घी फ्रेगरेंस’ को मिलाते थे।
ये केमिकल इतने तेज और प्रभावी होते हैं कि इसकी चंद बूंदें डालते ही साधारण तेल से शुद्ध देसी घी जैसी खुशबू आने लगती है। आम उपभोक्ता के लिए असली और इस Nakli Ghee में फर्क करना नामुमकिन हो जाता है। पुलिस ने मौके से घी बनाने में इस्तेमाल होने वाले बड़े बर्तन, गैस सिलेंडर, चूल्हा और रसायनों की बोतलें भी बरामद की हैं।
ग्रामीण इलाकों को बनाते थे निशाना, 1000 रुपये तक में बेचते थे ‘ज़हर’
पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपियों की पहचान नानू पिता वज्जु बागरी, बंशी पिता राजेश बागरी और करण पिता गोरिया बागरी के रूप में हुई है। ये तीनों आरोपी आपस में रिश्तेदार हैं और इसी इलाके के निवासी हैं। इनका नेटवर्क केवल शहर तक सीमित नहीं था, बल्कि ये लोग Nakli Ghee की सप्लाई ग्रामीण अंचलों में भी करते थे।
आरोपी रोजाना सुबह अपनी मोटरसाइकिलों पर इस नकली घी को लेकर गाँवों की ओर निकल जाते थे। वहाँ वे भोली-भाली जनता को शुद्ध घी का झांसा देकर 500 रुपये से लेकर 1000 रुपये प्रति किलो तक के दाम पर इसे बेचते थे। इस तरह वे न केवल लोगों की जेब काट रहे थे, बल्कि उनके स्वास्थ्य के साथ भी गंभीर खिलवाड़ कर रहे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के केमिकल युक्त घी के सेवन से लीवर और किडनी की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
14 दिनों में दूसरी बड़ी कार्रवाई: मंदसौर पुलिस का कड़ा रुख
मंदसौर में मिलावटखोरों के खिलाफ पुलिस का यह अभियान थमने का नाम नहीं ले रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले 14 दिनों के भीतर यह दूसरी बड़ी सफलता है। इससे पहले 31 जनवरी को सीतामऊ फाटक क्षेत्र में एक किराए के मकान से 150 लीटर Nakli Ghee पकड़ा गया था। बार-बार मिल रही इन फैक्ट्रियों से यह संकेत मिलता है कि शहर में मिलावटखोरों का एक बड़ा सिंडिकेट सक्रिय है।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 4 से 6 मोबाइल फोन और 3 मोटरसाइकिलें भी जब्त की हैं। पुलिस इन मोबाइल फोन्स के कॉल रिकॉर्ड्स खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस Nakli Ghee के कारोबार के तार और कहाँ-कहाँ जुड़े हैं। क्या कोई बड़ा व्यापारी भी इस गिरोह को संरक्षण दे रहा था? इस बिंदु पर भी सघन जांच जारी है।
सीएसपी जितेंद्र भास्कर ने स्पष्ट किया है कि खाद्य सुरक्षा विभाग ने जब्त किए गए घी और शहद के सैंपल लैब टेस्ट के लिए भेज दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों के खिलाफ और भी सख्त कानूनी धाराएं जोड़ी जाएंगी। प्रशासन की इस सक्रियता से मिलावटखोरों में हड़कंप मच गया है।
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