Mahashivratri: तिरुपति नगर में गूंजा हर-हर महादेव, 56 भोग और दिव्य श्रृंगार ने मोह लिया भक्तों का मन

Mahashivratri

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नीमच। आस्था और विश्वास के महापर्व Mahashivratri पर आज पूरा नीमच शहर शिवमय हो गया। विशेष रूप से तिरुपति नगर स्थित तिरुपति महादेव मंदिर में सुबह से ही भक्तों का भारी हुजूम देखने को मिला। आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर इस दिन की शुरुआत रुद्राभिषेक से हुई, जो देर रात महाप्रसादी के वितरण तक निरंतर जारी रही। मंदिर परिसर की भव्य सजावट और भगवान भोलेनाथ के मनमोहक श्रृंगार ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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भोर में रुद्राभिषेक से हुई पावन शुरुआत

Mahashivratri के इस पावन अवसर पर तिरुपति नगर के महादेव मंदिर में सुबह से ही अनुष्ठान प्रारंभ हो गए थे। विद्वान पंडितों के सानिध्य में यजमानों ने भगवान आशुतोष का पंचामृत अभिषेक किया। दूध, दही, घी, शक्कर और शहद की धाराओं के बीच ‘ओम् नमः शिवाय’ के जाप से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिन सच्चे मन से किया गया अभिषेक जीवन के समस्त कष्टों को हर लेता है। सुबह से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें देखी गईं, जहाँ बच्चे, बूढ़े और युवा सभी महादेव की एक झलक पाने को बेताब थे।

आकर्षक श्रृंगार और मंदिर की दिव्य साज-सज्जा

जैसे-जैसे दिन चढ़ा, Mahashivratri का उत्साह बढ़ता गया। दोपहर के समय बाबा भोलेनाथ का विशेष ‘आकर्षण श्रृंगार’ किया गया। ताजे फूलों, भांग और सूखे मेवों से भगवान का ऐसा दिव्य रूप तैयार किया गया कि हर कोई बस देखता ही रह गया। आयोजक ने पूरे परिसर को रंग-बिरंगी लाइटों और गुब्बारों से सजाया था। प्रवेश द्वार से लेकर गर्भगृह तक की गई सजावट इस महोत्सव की भव्यता को दर्शा रही थी। इस विशेष श्रृंगार के दर्शन के लिए दोपहर में भी भक्तों की भारी भीड़ जमा रही।

शाम को 56 भोग और भव्य महाआरती

संध्या काल में Mahashivratri पर्व का मुख्य आकर्षण ’56 भोग’ रहा। भगवान भोलेनाथ को विभिन्न प्रकार के मिष्ठान्न, फल और पकवानों का नैवेद्य अर्पित किया गया। छप्पन भोग की यह झांकी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रही। इसके पश्चात ढोल-धमाकों और शंखनाद के साथ महाआरती की गई। आरती के समय मंदिर का वातावरण इतना ऊर्जावान था कि हर भक्त शिव की भक्ति में झूमता नजर आया। दीपों की रोशनी से जगमगाते मंदिर में महाकाल के जयकारों ने एक अलग ही अलौकिक समां बांध दिया।

प्रसादी वितरण और जन-सैलाब

महाआरती के संपन्न होने के बाद प्रसादी का वितरण शुरू हुआ। Mahashivratri के उपलक्ष्य में विशेष रूप से तैयार की गई 56 भोग की प्रसादी का वितरण भक्तों के बीच किया गया। भक्तों ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया।

एकजुटता और सेवा का संदेश

तिरुपति नगर में आयोजित यह Mahashivratri उत्सव न केवल एक धार्मिक आयोजन था, बल्कि इसने सामाजिक समरसता की मिसाल भी पेश की।कुल मिलाकर, तिरुपति नगर में मनाया गया यह Mahashivratri महापर्व अपनी भव्यता, भक्ति और व्यवस्था के लिए लंबे समय तक याद किया जाएगा। भोलेनाथ की कृपा से पूरा क्षेत्र खुशहाली और शांति के रंग में रंगा नजर आया।


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