नीमच SP जन सुनवाई: 22 मामलों का ‘On The Spot’ फैसला, सीएम हेल्पलाइन की पेंडिंग फाइलों पर अधिकारियों को मिली आखिरी चेतावनी

नीमच (The Times of MP,Neemuch): पुलिस और पब्लिक के बीच भरोसे की डोर को मजबूत करने और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने के उद्देश्य से मंगलवार का दिन नीमच जिले के लिए बेहद खास रहा। पुलिस कंट्रोल रूम के सभाकक्ष में फरियादियों की भीड़ और जिले के आला अधिकारियों की मौजूदगी के बीच नीमच SP जन सुनवाई का एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान पुलिस कप्तान की सख्ती और संवेदनशीलता का अनूठा संगम देखने को मिला, जहां न केवल पुराने मामलों की फाइलें खुलीं, बल्कि कई निराश आवेदकों के चेहरों पर तुरंत न्याय मिलने की चमक भी दिखाई दी।
उज्जैन आईजी के निर्देश: ‘पेंडिंग’ शब्द से मिले छुटकारा
आपको बता दें कि अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) और पुलिस महानिरीक्षक (IG) उज्जैन जोन ने हाल ही में स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि संभाग के सभी जिलों में मंगलवार को विशेष तौर पर जनसुनवाई और शिकायत निवारण शिविर आयोजित किए जाएं। इसका मुख्य उद्देश्य सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) और थानों में धूल फांक रही शिकायतों का तत्परता से निराकरण करना था। इन निर्देशों को अमलीजामा पहनाते हुए 17 फरवरी 2026 को नीमच SP जन सुनवाई एवं सीएम हेल्पलाइन शिविर का भव्य आयोजन किया गया।
SP अंकित जायसवाल ने खुद संभाली कमान
मंगलवार को पुलिस कंट्रोल रूम नीमच में आयोजित इस शिविर में जिले के तेजतर्रार पुलिस अधीक्षक (SP) श्री अंकित जायसवाल ने खुद मोर्चा संभाला। सुबह से ही जिले के सुदूर ग्रामीण अंचलों और शहरी क्षेत्रों से आवेदक अपनी समस्याएं लेकर पहुंचने लगे थे। इस नीमच SP जन सुनवाई में कुल 22 आवेदक अपनी फरियाद लेकर सीधे एसपी के समक्ष उपस्थित हुए।
एसपी श्री जायसवाल ने एक-एक कर सभी आवेदकों की समस्याओं को महज सुना नहीं, बल्कि बेहद गंभीरता से समझते हुए मौके पर मौजूद संबंधित थाना प्रभारियों को तलब कर लिया। जिन मामलों का निराकरण तुरंत संभव था, उन पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए। वहीं, सीएम हेल्पलाइन की कई ऐसी शिकायतें थीं जो आपसी समन्वय से हल हो सकती थीं, उनका संतुष्टिपूर्वक निराकरण करवाकर शिकायतों को मौके पर ही बंद करवाया गया।
इन प्रमुख मुद्दों पर रहा एसपी का विशेष फोकस

इस विशेष नीमच SP जन सुनवाई शिविर में आने वाली शिकायतों का दायरा काफी विस्तृत था, लेकिन एसपी का फोकस उन मामलों पर ज्यादा रहा जो आम आदमी के जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं:
भूमि विवाद एवं कब्जा: जमीनी रंजिशों, खेत की मेड़ के विवाद और अवैध कब्जे से जुड़े मामलों में पुलिस के त्वरित हस्तक्षेप की मांग की गई।
पुलिस कार्रवाई में देरी: कई आवेदकों की शिकायत थी कि थाने स्तर पर उनकी सुनवाई में देरी हो रही है या एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही।
सामाजिक सुरक्षा योजनाएं: बुजुर्गों, महिलाओं और सरकारी योजनाओं से जुड़े संवेदनशील प्रकरणों पर भी एसपी ने संवेदनशीलता दिखाई।
पारिवारिक व आर्थिक विवाद: पैसों के लेन-देन, धोखाधड़ी और घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में भी काउंसलिंग और एक्शन के निर्देश दिए गए।
लापरवाही पर अधिकारियों को दो टूक: ‘निष्पक्षता से करें समाधान‘
नीमच SP जन सुनवाई के दौरान एसपी श्री अंकित जायसवाल अपने मातहतों के प्रति काफी सख्त नजर आए। उन्होंने शिविर में मौजूद सभी राजपत्रित अधिकारियों (Gazetted Officers) और थाना प्रभारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि जनसुनवाई महज एक रस्म अदायगी नहीं होनी चाहिए। एसपी ने निर्देशित किया कि,
“हर आवेदन का समय सीमा के भीतर और निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित करें। जनता का विश्वास पुलिस पर बना रहे, इसके लिए जरूरी है कि छोटे से छोटे आवेदन को भी गंभीरता से लिया जाए।”
– एसपी श्री अंकित जायसवाल
उन्होंने खास तौर पर जोर देकर कहा कि महिला सुरक्षा, एससी-एसटी एक्ट और भूमि विवाद जैसे मामलों में किसी भी प्रकार की कोताही या लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिले का पूरा पुलिस अमला रहा मौजूद
इस जिला स्तरीय नीमच SP जन सुनवाई और शिकायत निवारण शिविर की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले के तमाम बड़े अधिकारी वहां मौजूद थे। शिविर में नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) सुश्री किरण चौहान, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस (SDOP) जावद श्री रोहित राठौर, प्रभारी एसडीओपी मनासा और उप पुलिस अधीक्षक (महिला सुरक्षा) सुश्री निकीता सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहीं। इसके अलावा जिले के समस्त थाना प्रभारी, चौकी प्रभारी और संबंधित शाखाओं के प्रभारी भी अपनी-अपनी प्रोग्रेस रिपोर्ट और फाइलों के साथ तैयार थे।
जनता के लिए राहत भरा कदम: न्याय की जगी उम्मीद
नीमच पुलिस की यह पहल बताती है कि विभाग अब ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ के साथ-साथ ‘सेंसिटिव पुलिसिंग’ (संवेदनशील पुलिसिंग) की ओर बढ़ रहा है। नीमच SP जन सुनवाई जैसे आयोजन न केवल पेंडिंग मामलों का बोझ कम करते हैं, बल्कि आम आदमी के मन में कानून के प्रति सम्मान और विश्वास को भी गहरा करते हैं। 17 फरवरी को आयोजित इस शिविर में हुए त्वरित फैसलों ने यह साबित कर दिया कि अगर नीयत साफ़ हो और प्रशासन चुस्त हो, तो न्याय मिलने में देर नहीं लगती। आवेदकों ने एसपी की इस पहल की सराहना की है।
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