सड़क किनारे ‘मौत के ढेर’, रेत से हो रहे हादसों पर SDM का कड़ा रुख
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
17 फ़रवरी 2026, (अपडेटेड 17 फ़रवरी 2026, 9:18 अपराह्न IST)

मनासा (दिलीप बोराना) मध्यप्रदेश के नीमच जिले के अंतर्गत आने वाले मनासा नगर में इन दिनों विकास की चमक के पीछे ‘मौत का अंधेरा’ सड़कों पर पसरा हुआ है। नगर के प्रमुख व्यापारिक मार्ग, विशेषकर रामपुरा रोड से लेकर हांसपुर फंटे तक, बिल्डिंग मटेरियल के रसूखदार व्यापारियों ने सरकारी सड़क को अपनी निजी दुकान बना लिया है। सड़क की मुख्य धार से सटकर डंप की गई Sand (बालू रेती) के विशाल ढेरों के कारण आए दिन हो रही जानलेवा दुर्घटनाओं का मामला अब प्रशासन की चौखट तक पहुंच गया है। मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आता दिखाई दे रहा है।

जनसुनवाई में गूंजा अवैध रेत (Sand) का काला कारोबार

मंगलवार को जिला प्रशासन के निर्देशानुसार मनासा में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब नगर परिषद मनासा के वार्ड क्रमांक 02 के पार्षद प्रतिनिधि एवं वरिष्ठ भाजपा नेता दिनेश राठौर ने इस गंभीर अव्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। राठौर ने एसडीएम श्रीमती किरण आंजना को साक्ष्यों के साथ शिकायत सौंपते हुए बताया कि किस तरह मनासा की सड़कों पर अवैध रेत (Sand) का साम्राज्य फैला हुआ है।

शिकायत में यह चौंकाने वाला खुलासा भी किया गया कि मनासा के इन प्रमुख मार्गों पर बेची जा रही रेत (Sand) का एक बड़ा हिस्सा पड़ोसी राज्य राजस्थान से बिना किसी वैध रॉयल्टी (Royalty) के तस्करी कर लाया जा रहा है। रात के अंधेरे में भारी ट्रकों के जरिए डंप की जाने वाली यह रेत (Sand) न केवल सरकारी राजस्व को लाखों का चूना लगा रही है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन के साथ भी खिलवाड़ कर रही है।

सड़क सुरक्षा की धज्जियां: महज 5 फीट पर मौत के ढेर

भाजपा नेता दिनेश राठौर ने ग्राउंड जीरो की हकीकत बयां करते हुए प्रशासन को बताया कि रामपुरा रोड पर व्यापारियों ने सड़क के किनारे को पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिया है। नियमानुसार सड़क से एक निश्चित दूरी तक कोई भी निर्माण सामग्री नहीं रखी जा सकती, लेकिन यहाँ व्यापारी मुख्य सड़क से महज 5 फीट की दूरी पर ही रेत (Sand) खाली करवा रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि सड़क के किनारे एक या दो नहीं, बल्कि चार से पांच बड़े-बड़े रेत (Sand) के ढेर एक साथ लगा दिए गए हैं। इससे सड़क की प्रभावी चौड़ाई काफी कम हो गई है। जब दो बड़े वाहन आमने-सामने से गुजरते हैं, तो दोपहिया वाहन चालकों के पास सड़क से नीचे उतरने की जगह नहीं बचती और वे इन ढेरों से टकराकर चोटिल हो रहे हैं। राठौर ने कड़े शब्दों में कहा, “हमने पूर्व में भी शासन-प्रशासन को इस मामले में आगाह किया था, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल नोटिस जारी कर औपचारिकता निभाई जाती रही है।”

उड़ती ‘Sand’ और आंखों में चुभती मौत

मनासा क्षेत्र में इन दिनों चल रहे आंधी-तूफान और तेज हवाओं के मौसम ने राहगीरों की मुश्किलों को दोगुना कर दिया है। सड़क किनारे बिना किसी ढके हुए पड़ी यह सूखी रेत (Sand) हवा के झोंकों के साथ उड़कर वाहन चालकों की आंखों में जा रही है। अचानक आंखों में रेती जाने के कारण चालक अपना संतुलन खो देते हैं, जिससे अनियंत्रित होकर गिरना और अन्य वाहनों से टकराना एक आम बात हो गई है।

विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालक और स्कूल जाने वाले बच्चे इस रेत (Sand) के उड़ने से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन और नगर परिषद की लापरवाही के कारण रामपुरा रोड अब ‘हादसों का रोड’ बनता जा रहा है। यदि समय रहते इन ढेरों को नहीं हटाया गया, तो किसी बड़े सड़क हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

एसडीएम किरण आंजना का कड़ा एक्शन और निर्देश

जनसुनवाई में मौजूद शिकायतों के अंबार के बीच जब रेत (Sand) से जुड़ी यह गंभीर समस्या एसडीएम श्रीमती किरण आंजना के सामने आई, तो उन्होंने मामले को पूरी गंभीरता से लिया। मौके पर ही उन्होंने नगर परिषद मनासा के सीएमओ (Chief Municipal Officer) को सख्त लहजे में फोन पर निर्देश दिए।

एसडीएम ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सड़कों पर किसी भी प्रकार का अस्थायी अतिक्रमण या व्यावसायिक भंडारण पूर्णतः अवैध है। उन्होंने आदेश दिया कि तत्काल प्रभाव से टीम गठित कर रामपुरा रोड से लेकर हांसपुर फंटे तक सड़क किनारे रखी गई पूरी रेत (Sand) को जब्त किया जाए। साथ ही, उन व्यापारियों को चिह्नित कर उन पर भारी अर्थदंड लगाया जाए जो बार-बार मना करने के बावजूद सड़क को बाधित कर रहे हैं। प्रशासन की इस सख्ती के बाद अब अवैध रेत कारोबारियों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।

क्या प्रशासन की कार्रवाई टिकाऊ होगी ?

मनासा की जनता के मन में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या एसडीएम के ये निर्देश धरातल पर क्रियान्वित होंगे? अक्सर देखा गया है कि प्रशासन की कार्रवाई के एक-दो दिन बाद व्यापारी फिर से वही ढर्रा अपना लेते हैं। अवैध रेत (Sand) का यह व्यापार केवल यातायात की समस्या नहीं है, बल्कि यह प्रशासन की साख का भी सवाल है।

दिनेश राठौर ने मांग की है कि प्रशासन और पुलिस बल को नियमित गश्त करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में कोई भी व्यापारी सड़क किनारे रेत (Sand) डंप न कर सके। यदि नगर परिषद का अमला ईमानदारी से कार्रवाई करता है, तभी मनासा के नागरिकों को इस जानलेवा खतरे से मुक्ति मिल पाएगी।


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Aakash Sharma
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