नीमच में बेमौसम बरसात :आसमान से बरसी ‘आफत’, अफीम और गेहूं की फसलें खेतों में बिछीं; अन्नदाता की आंखों में आंसू

Rain

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नीमच (MP NEWS): मालवा के शांत और खुशहाल खेतों में बुधवार को कुदरत ने ऐसा कोहराम मचाया कि किसानों के चेहरों की रौनक पल भर में गायब हो गई। नीमच और आसपास के इलाकों में मौसम ने अचानक करवट ली और देखते ही देखते तेज हवाओं के साथ हुई बारिश (Rain) ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया। जिसे किसान ‘अमृत’ समझ रहा था, वह इस बेमौसम बारिश (Rain) के रूप में जहर बन गया और खेतों में खड़ी रबी की फसलों को ले डूबा।

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कुदरत का क्रूर मजाक: मेहनत पर फिरा पानी

बुधवार की सुबह जब किसान अपने खेतों की ओर निकले थे, तो उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि दोपहर होते-होते उनकी किस्मत बदल जाएगी। आसमान में काले बादलों का जमावड़ा हुआ और फिर गरज-चमक के साथ शुरू हुई बेमौसम बरसात (Heavy Rain) ने खेतों की तस्वीर बदल दी। यह बारिश अकेली नहीं आई, अपने साथ ओलावृष्टि भी लाई।

करीब 10 से 15 मिनट तक गिरे चने के आकार के ओलों और निरंतर हुई बेमौसम बरसात (Rain) ने रबी की फसलों की कमर तोड़ दी। जो गेहूं की बालियां कल तक सूरज की रोशनी में चमक रही थीं, आज वे कीचड़ में सनी हुई और ज़मीन पर लेटी हुई नज़र आ रही हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि फसल पकने के समय अगर वह गिर जाए , तो दाने का विकास रुक जाता है और फंगस लगने का डर कई गुना बढ़ जाता है।

‘काला सोना’ हुआ बर्बाद: अफीम किसानों पर दोहरी मार
ओलों से किसान की फसलों को सीधा आर्थिक नुकसान।

नीमच और मंदसौर का क्षेत्र दुनिया भर में अपनी अफीम (Opium) की खेती के लिए जाना जाता है। इसे यहाँ का किसान ‘काला सोना’ कहता है। लेकिन इस बार की बेमौसम बरसात (Rain) ने इस सोने की चमक फीकी कर दी है।

वर्तमान में अफीम के खेतों में ‘लूनी-चिरनी’ का नाजुक दौर चल रहा है। यह वह समय होता है जब किसान डोडों पर चीरा लगाते हैं ताकि उनसे दूध (लेटेक्स) इकट्ठा किया जा सके। लेकिन ठीक इसी समय हुई बेमौसम बरसात (Rain) ने उस दूध को धो दिया।

रामपुरा क्षेत्र के एक बुजुर्ग किसान ने नम आंखों से बताया,
“साहब, अफीम की खेती जुए जैसी हो गई है। पट्टा बचाने की चिंता अलग होती है और मौसम की मार अलग। इस बेमौसम बरसात (Rain) ने हमारी लागत भी नहीं छोड़ी। जो दूध (Gum) डोडों पर आया था, वह सब पानी में बह गया। अब न तो क्वालिटी बचेगी और न ही वजन।”

गेहूं, चना और सब्जियों का भी हुआ बुरा हाल

नुकसान का दायरा सिर्फ अफीम तक सीमित नहीं है। जिले में बड़े पैमाने पर बोई गई गेहूं और चने की फसलें भी इस बेमौसम बरसात (Rain) की चपेट में आ गई हैं। तेज हवाओं के कारण गेहूं की खड़ी फसलें आड़ी पड़ गई हैं, जिससे हार्वेस्टर से कटाई करना मुश्किल हो जाएगा। वहीं, चने में इल्ली का प्रकोप बढ़ने की आशंका है।

सब्जी उत्पादक किसानों के लिए भी यह बेमौसम बरसात (Rain) मुसीबत बनकर आई है। खेतों में पानी भर जाने से प्याज और लहसुन की जड़ें गलने का खतरा पैदा हो गया है। मंडियों में भी गीली फसल आने से किसानों को उचित दाम नहीं मिल पाएंगे, जिससे उन्हें सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

मौसम विभाग का अलर्ट: अभी खतरा टला नहीं

अगर आपको लगता है कि मुसीबत गुजर गई, तो भारतीय मौसम विभाग (IMD) की चेतावनी डराने वाली है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर भारत में एक पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय हुआ है, जिसका सीधा असर मध्य प्रदेश के मौसम पर पड़ रहा है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि बेमौसम बरसात (Rain) का यह दौर अभी थमने वाला नहीं है। नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन सहित प्रदेश के करीब 21 जिलों में अगले 48 घंटों तक ‘येलो अलर्ट’ और ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ फिर से बेमौसम बरसात (Rain) होने की संभावना है।

प्रशासन से मुआवजे की आस

इस प्राकृतिक आपदा के बाद अब पीड़ित किसानों की उम्मीदें सिर्फ सरकार पर टिकी हैं। किसान संगठनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि कागजी खानापूर्ति छोड़कर खेतों में जाकर सर्वे किया जाए। राजस्व विभाग और कृषि विभाग की संयुक्त टीमों को तुरंत नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए जाने चाहिए।

फिलहाल, नीमच का किसान आसमान की तरफ देख रहा है, इस प्रार्थना के साथ कि अब और बेमौसम बरसात (Rain) न हो, वरना जो थोड़ी-बहुत उम्मीद बची है, वह भी मिट्टी में मिल जाएगी। आने वाले दो दिन इस क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बेहद नाजुक साबित होने वाले हैं।


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