पिता ने लिखवाई रिपोर्ट, घर की चोरी में 19 साल का बेटा ही निकला मास्टरमाइंड, 3 गिरफ्तार

Chori

नीमच।नीमच जिले के हनुमंतिया व्यास गांव से अपराध का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ पारिवारिक रिश्तों की अहमियत को तार-तार कर दिया है, बल्कि पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। हम सुनते हैं कि डकैती या चोरी (Chori) की वारदातों को अंजाम देने वाले कोई बाहरी या पेशेवर शातिर अपराधी होते हैं। लेकिन, नीमच में हाल ही में सामने आए इस हैरान कर देने वाले मामले ने पुलिस प्रशासन और आम जनता दोनों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

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यहां एक मजबूर पिता ने अपने ही घर के आंगन से ट्रैक्टर, कार और बाइक गायब होने की रिपोर्ट पुलिस थाने में दर्ज कराई थी। लेकिन जब पुलिस ने तफ्तीश कर इस पूरी गुत्थी को सुलझाया, तो जो सच सामने आया वह रोंगटे खड़े करने वाला था। इस चोरी (Chori) को अंजाम देने वाला कोई अनजान व्यक्ति नहीं, बल्कि शिकायतकर्ता पिता का अपना 19 वर्षीय सगा बेटा ही निकला।

पिता का शक और पुलिस की त्वरित कार्रवाई

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कार और ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त

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इस चौंकाने वाली घटना की शुरुआत तब हुई जब हनुमंतिया व्यास गांव के रहने वाले फरियादी जितेंद्र नागदा सुबह नींद से उठे और उन्होंने अपने घर के परिसर से बेशकीमती गाड़ियां गायब देखीं। एक ही रात में घर से एक ट्रैक्टर, एक कार और एक बाइक का पार हो जाना कोई छोटी-मोटी घटना नहीं थी। इतनी बड़ी चोरी (Chori) से पूरे परिवार में हड़कंप मच गया और आस-पड़ोस में दहशत फैल गई। घबराए हुए जितेंद्र नागदा बिना कोई समय गंवाए तुरंत स्थानीय पुलिस थाने पहुंचे और अपनी आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई।

फरियादी ने पुलिस को दी गई अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया कि उन्हें इस चोरी (Chori) के पीछे अपने ही बेटे के कुछ दोस्तों पर गहरा शक है। उन्होंने बताया कि इन लड़कों का घर में लगातार आना-जाना लगा रहता था और उन्हें घर की हर छोटी-बड़ी बात, जैसे चाबियां कहां रखी जाती हैं, इसकी पूरी जानकारी थी। मामले की गंभीरता और फरियादी की परेशानी को देखते हुए थाना प्रभारी पुष्पा सिंह चौहान ने तुरंत एक्शन लिया। उन्होंने बिना देरी किए एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया और खुद इस हाई-प्रोफाइल मामले की तफ्तीश शुरू कर दी।

जांच की दिशा और कलयुगी बेटे का पर्दाफाश

पुलिस ने जब क्राइम सीन का बारीकी से मुआयना किया और तकनीकी साक्ष्यों को खंगालना शुरू किया, तो कहानी कुछ और ही इशारा कर रही थी। पुलिस के तजुर्बे ने यह भांप लिया कि इतनी बड़ी चोरी (Chori) की वारदात को बिना किसी ‘घर के भेदी’ के अंजाम देना लगभग नामुमकिन है। रात के अंधेरे में बिना कोई शोर किए भारी गाड़ियों को घर से बाहर निकालना किसी ऐसे व्यक्ति का ही काम हो सकता था, जिसे घर के चप्पे-चप्पे की समझ हो।

थाना प्रभारी पुष्पा सिंह चौहान के कुशल नेतृत्व में जब पुलिस टीम ने फरियादी के 19 वर्षीय बेटे दीपेश की दिनचर्या और उसकी संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की, तो पुलिस का शक और गहरा हो गया। पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए दीपेश को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया।

शुरुआत में तो वह पुलिस को गोलमोल जवाब देकर गुमराह करने की कोशिश करता रहा। लेकिन जब पुलिस ने अपने चिर-परिचित अंदाज में थोड़ी सख्ती बरती, तो दीपेश पूरी तरह से टूट गया। उसने जो सच उगला, वह उसके पिता के लिए किसी वज्रपात से कम नहीं था। दीपेश ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि इस पूरी चोरी (Chori)का मास्टरमाइंड वह खुद ही है।

दोस्तों के साथ मिलकर रची थी खौफनाक साजिश

कड़ी पूछताछ के दौरान इस संगीन अपराध की एक-एक परत पुलिस के सामने खुलने लगी। आरोपी बेटे दीपेश ने पुलिस को बताया कि इस वारदात में वह अकेला शामिल नहीं था। उसने अपने दो करीबी दोस्तों को भी इस साजिश में शामिल किया था। पुलिस की जानकारी के अनुसार, इनमें से एक आरोपी बरखेड़ा सिंधिया का रहने वाला सतीश है, जबकि दूसरा आरोपी दोबद का निवासी योगेश है। तीनों ने मिलकर कई दिनों तक पूरी प्लानिंग की थी कि घर से गाड़ियां कैसे निकालनी हैं, रात के किस पहर वारदात को अंजाम देना है और चोरी (Chori) की गई गाड़ियों को पुलिस की नज़रों से बचाकर कहां छिपाना है।

दीपेश की पुख्ता जानकारी पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए सतीश और योगेश के ठिकानों पर दबिश दी और उन्हें भी धर दबोचा। परिवार के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि पुलिस की मुस्तैदी के चलते ट्रैक्टर और कार आरोपियों के पास से सकुशल बरामद कर ली गई है।

क्या थी अपने ही घर में वारदात की असली वजह?

अब पुलिस और समाज के सामने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा है कि आखिर एक युवा बेटे को अपने ही घर में चोरी (Chori) करने की नौबत क्यों आन पड़ी? पुलिस ने कानूनी कार्रवाई पूरी करते हुए तीनों आरोपियों—दीपेश, सतीश और योगेश—को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीनों आरोपियों को 23 फरवरी तक के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

रिमांड अवधि के दौरान पुलिस अब इस पूरी साजिश के मुख्य कारण की तह तक जाने में जुटी है। क्या बेटे को किसी गलत काम, महंगे शौक या ऑनलाइन गेमिंग के लिए पैसों की सख्त जरूरत थी? क्या वह किसी खतरनाक नशे की लत का शिकार हो चुका है या फिर बुरी संगत ने उसे इस दलदल में धकेल दिया? इन तमाम अनसुलझे सवालों के जवाब पुलिस की आगामी पूछताछ में सामने आने की पूरी उम्मीद है।

इस घटना ने इलाके में एक नई बहस छेड़ दी है कि आज के दौर में युवा किस कदर भौतिक सुख-सुविधाओं की अंधी दौड़ में अपने ही परिवार को धोखा दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, नीमच पुलिस की त्वरित और सटीक कार्रवाई की पूरे इलाके में जमकर सराहना हो रही है। फिलहाल सभी की निगाहें 23 फरवरी तक चलने वाली रिमांड पर टिकी हैं, जिससे इस पूरी घटना के पीछे के असली मकसद का फाइनल खुलासा हो सकेगा।


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