जब पुराना विवाद बना खूनी संघर्ष का कारण, बीच चौराहे पर चले लाठी-डंडे, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

नीमच (Neemuch News)। मध्य प्रदेश के नीमच जिले से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने शहर की कानून-व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। नीमच सिटी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले व्यस्ततम भगवानपुरा चौराहे पर बुधवार की सुबह उस वक्त भारी अफरा-तफरी मच गई, जब एक पुराना विवाद (purana vivad) अचानक सड़क पर खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया। देखते ही देखते दो गुट आमने-सामने आ गए और बीच चौराहे पर लाठी-डंडे चलने लगे। इस भयानक वारदात में दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, लेकिन सबसे ज्यादा बवाल स्थानीय पुलिस की कथित लापरवाही को लेकर मचा हुआ है।
भगवानपुरा चौराहे पर कैसे शुरू हुआ खूनी खेल?
दीपू ग्वाल और प्रदीप ग्वाल के बीच लंबे समय से कोई पुराना विवाद (purana vivad) चला आ रहा है। बुधवार की सुबह दीपू ग्वाल अपने एक अन्य साथी के साथ नीमच सिटी थाना क्षेत्र के भगवानपुरा चौराहे पर शांति से खड़ा हुआ था। वे अपनी रोजमर्रा की बातों में व्यस्त थे, तभी अचानक वहां का माहौल पूरी तरह से तनावपूर्ण हो गया। आरोप है कि प्रदीप ग्वाल अपने कुछ अन्य साथियों के साथ पूरी तैयारी और हथियारों के साथ वहां पहुंचा।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आरोपियों ने आते ही दीपू और उसके साथी को चारों तरफ से घेर लिया। इससे पहले कि पीड़ित पक्ष कुछ समझ पाता या अपना बचाव कर पाता, उन पर लाठी और डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया गया। यह पुराना विवाद (purana vivad) इतना उग्र हो गया कि बीच सड़क पर हुई इस गुंडागर्दी से मौके पर मौजूद आम राहगीरों में भारी दहशत फैल गई और वहां लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।
पहले से रची गई साजिश के गंभीर आरोप
पुराना विवाद (purana vivad) के इस खूनी संघर्ष में घायल हुए दीपू ग्वाल ने सीधा आरोप लगाया है कि यह हमला कोई अचानक भड़का गुस्सा नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था। पीड़ित पक्ष का कहना है कि आरोपी पक्ष द्वारा पिछले काफी समय से उन्हें लगातार डराया-धमकाया जा रहा था।
लगातार दी जा रही जान से मारने की धमकियों और गाली-गलौज के बाद बुधवार को इस खूनी वारदात को अंजाम दिया गया। शहर में एकपुराना विवाद (purana vivad) के चलते हुई इस तरह की आपराधिक गतिविधि के कारण स्थानीय लोगों में गहरी चिंता देखी जा रही है।
पुलिस थाने में क्या हुआ? पीड़ित परिवार का छलका दर्द
बीच चौराहे पर हुई इस मारपीट और बवाल की सूचना मिलते ही नीमच सिटी थाना पुलिस का दल तुरंत मौके पर पहुंचा। पुलिस ने स्थिति को किसी तरह काबू में करते हुए दोनों पक्षों को हिरासत में लिया और थाने ले आई। लेकिन मामले ने तूल तब पकड़ा जब पीड़ित परिवार ने नीमच सिटी पुलिस की कार्यप्रणाली पर ही गंभीर सवालिया निशान लगा दिए।
घायल दीपू ग्वाल और उनके परिजनों का स्पष्ट कहना है कि जब वे अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंचे, तो पुलिस ने उनकी बात को बिल्कुल भी गंभीरता से नहीं लिया। आरोप है कि पुलिस ने हमलावरों के खिलाफ वह सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की, जिसकी ऐसे मामलों में सख्त आवश्यकता होती है। थाने में सही ढंग से सुनवाई न होने और आरोपियों को कथित तौर पर बचाने के प्रयास से आहत होकर पीड़ित परिवार ने अब न्याय के लिए आला अधिकारियों का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है।
न्याय की गुहार लेकर SP कार्यालय पहुंचा पीड़ित परिवार
स्थानीय थाने की सुस्त कार्रवाई से पूरी तरह असंतुष्ट और निराश दीपू ग्वाल के भाई सहित परिवार के अन्य सदस्य सीधे पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय जा पहुंचे। एसपी कार्यालय में पीड़ित परिवार ने आला अधिकारियों से मुलाकात की और एक पुराना विवाद (purana vivad) के चलते अपने साथ हुए इस पूरे अन्याय की दास्तान सुनाई। परिवार ने पुरजोर मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच हो और जानलेवा हमला करने वाले सभी आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया जाए।
शहर की शांति और पुलिस प्रशासन पर उठते सवाल
पुराना विवाद (purana vivad) की इस पूरी घटना ने पुलिस प्रशासन के सामने कई बड़ी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। बीच चौराहे पर दिनदहाड़े इस तरह से लाठी-डंडे चलना अपराधियों के बुलंद हौसलों को साफ तौर पर दर्शाता है। यदि पुलिस द्वारा समय रहते इस तरह के किसी भी पुराना विवाद (purana vivad) पर सख्ती से लगाम कसी जाती, तो शायद आज यह खूनी नौबत नहीं आती।
फिलहाल, वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में यह पूरा मामला आने के बाद पुलिस अब इस प्रकरण की गहनता से जांच में जुट गई है। अब पूरे शहर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एसपी कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद पीड़ित परिवार को इंसाफ मिल पाता है या नहीं, और पुलिस असल आरोपियों के खिलाफ क्या ठोस और सख्त कदम उठाती है।
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