10वीं बार हाईकोर्ट को बम की खौफनाक धमकी: ईमेल में RDX का जिक्र, CJI का दौरा रद्द करने की भयानक चेतावनी

High Court

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जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक बार फिर बेहद सनसनीखेज और चिंताजनक खबर सामने आई है। शहर में स्थित हाईकोर्ट (High Court) की जयपुर बेंच को एक बार फिर से बम से उड़ाने की खौफनाक धमकी मिली है। शुक्रवार सुबह मिले एक अज्ञात ईमेल ने पूरे पुलिस महकमे, खुफिया एजेंसियों और न्यायिक प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

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इस बार यह धमकी केवल एक डराने वाला सामान्य संदेश नहीं था, बल्कि इसमें सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के प्रस्तावित दौरे को रद्द करने की स्पष्ट मांग की गई है। ईमेल भेजने वाले अज्ञात व्यक्ति ने दावा किया है कि कोर्ट परिसर में कई जगह RDX बम प्लांट किए गए हैं और दोपहर 12 बजे तक इमारत को खाली करने का सख्त अल्टीमेटम दिया गया है।

धमकी भरे ईमेल में क्या लिखा था?

इस सनसनीखेज धमकी भरे ईमेल में क्या लिखा था, इसे लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार की सुबह जैसे ही प्रशासन ने अपनी आधिकारिक ईमेल आईडी चेक की, उसमें यह खौफनाक संदेश मौजूद था। इस मेल में स्पष्ट शब्दों में लिखा था कि,

“CJI का दौरा तुरंत कैंसिल कराओ। हमने पूरे परिसर में खतरनाक RDX बम प्लांट कर दिए हैं। दोपहर 12 बजे से पहले हाईकोर्ट (High Court) को पूरी तरह से खाली करवा लो, वरना ऐसी भारी तबाही होगी जिसे कोई रोक नहीं पाएगा।”

इस चेतावनी के मिलते ही वहां सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए। आनन-फानन में जयपुर के आला पुलिस अधिकारियों को सूचित किया गया और देखते ही देखते पूरे न्यायिक परिसर को एक अभेद्य छावनी में तब्दील कर दिया गया।

सघन तलाशी अभियान और पुलिस की मुस्तैदी

इस अत्यंत गंभीर मामले को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने कोई भी जोखिम लेना उचित नहीं समझा। तुरंत प्रभाव से बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉयड, क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) और एटीएस (ATS) के कमांडो मौके पर पहुंच गए। पूरे हाईकोर्ट (High Court) परिसर के चप्पे-चप्पे की बेहद बारीकी से जांच शुरू की गई। वकीलों के चैंबर्स, सभी कोर्ट रूम, जजों के कक्ष, अंडरग्राउंड पार्किंग, रिकॉर्ड रूम और शौचालयों की सघन तलाशी ली गई।

हालांकि, कई घंटों तक चली इस मैराथन चेकिंग के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी राहत की सांस ली। गनीमत यह रही कि परिसर से कोई भी संदिग्ध वस्तु, लावारिस बैग या विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई। लेकिन, इस पूरे घटनाक्रम और व्यापक तलाशी अभियान के कारण नियमित न्यायिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ। रोजाना सुबह 10:30 बजे शुरू होने वाली अहम सुनवाई इस अफरा-तफरी के कारण करीब आधे घंटे की देरी से, सुबह 11 बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के साये में ही शुरू हो सकी।

साइबर सिक्योरिटी सेमिनार और CJI का दौरा

यह खौफनाक धमकी ऐसे नाजुक समय में आई है जब गुलाबी नगर में एक बहुत बड़ा और राष्ट्रीय स्तर का आयोजन होने जा रहा है। दरअसल, शुक्रवार को ही सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत यहां पहुंच रहे हैं। उनका यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि वे यहां एक बड़े ‘साइबर सिक्योरिटी सेमिनार’ का विधिवत उद्घाटन करने वाले हैं।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि असामाजिक तत्वों और अपराधियों ने इसी हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम को निशाना बनाने और आम जनता व न्यायपालिका में दहशत फैलाने के नापाक मकसद से यह मेल किया है। इससे ठीक एक दिन पहले यानी गुरुवार को भी बिल्कुल इसी तरह की एक धमकी मिली थी, लेकिन तब भी घंटों की तलाशी के दौरान पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा था।

चार महीने में 10वीं बार धमकी: पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती

प्रशासन के लिए यह कोई नई बात नहीं है, लेकिन धमकियों की यह फ्रीक्वेंसी बेहद डराने वाली है। पिछले महज साढ़े तीन से चार महीनों के भीतर यह 10वीं बार है जब हाईकोर्ट (High Court) को ऐसा धमकी भरा मेल मिला है। लगातार आ रहे इन फर्जी मेल्स ने सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • पहली धमकी: 31 अक्टूबर 2025 को पहली बार ऐसा ही एक धमकी भरा मेल प्रशासन को प्राप्त हुआ था।

  • दिसंबर का खौफ: इसके बाद अपराधियों के हौसले बढ़ते गए और 5 दिसंबर, 8, 9, 10 और 11 दिसंबर 2025 को लगातार धमकियों का सिलसिला जारी रहा।

  • फरवरी में फिर शुरू हुआ खेल: नए साल 2026 में भी यह खौफनाक सिलसिला नहीं रुका। 6 फरवरी, 17 फरवरी और फिर 19 फरवरी को भी बम विस्फोट की अफवाहें फैलाई गईं।

साइबर एक्सपर्ट की राय: अपराधी को पकड़ना मुश्किल, पर नामुमकिन नहीं

लगातार मिल रही इन धमकियों के पीछे आखिर कौन सा मास्टरमाइंड काम कर रहा है, यह अब तक जयपुर पुलिस के लिए एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है। साइबर क्राइम और साइबर लॉ के मशहूर जानकार तथा वरिष्ठ वकील आदर्श सिंघल का इस गंभीर मामले पर कहना है कि ऐसे शातिर अपराधियों को डिजिटल दुनिया में ट्रैक करना थोड़ा जटिल जरूर है, लेकिन यह किसी भी कीमत पर नामुमकिन नहीं है।एडवोकेट सिंघल विस्तार से बताते हैं,


“इस तरह की बड़ी वारदातों को अंजाम देने वाले हाई-टेक अपराधी वीपीएन (Virtual Private Network) जैसी आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हैं। वीपीएन का इस्तेमाल करने से इंटरनेट पर उस यूजर का आईपी (IP) एड्रेस हर सेकंड बदलता रहता है और उसकी असली भौगोलिक लोकेशन पूरी तरह से छिप जाती है। इसी तकनीकी अड़चन की वजह से पुलिस शुरुआती जांच में केवल आईपी एड्रेस के जरिए मुख्य आरोपी तक नहीं पहुंच पाती है।”

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वह अपराधी हमेशा कानून की गिरफ्त से बाहर ही रहेगा। जो भी विदेशी या देशी कंपनी यह वीपीएन सर्विस प्रोवाइड करती है, उसके सर्वर पर यूजर का ओरिजिनल लॉग और पूरा डेटा सुरक्षित रहता है। पुलिस और साइबर सेल अगर अंतरराष्ट्रीय संधियों और उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत उन कंपनियों से आधिकारिक तौर पर डेटा की मांग करे, तो मेल करने वाले का असली आईपी एड्रेस और उसकी पहचान तुरंत उजागर हो सकती है।

लगातार मिल रही इन धमकियों से न केवल न्यायिक अधिकारियों बल्कि आम जनता और वकीलों में भी भय का माहौल बन रहा है। हर बार जब इस तरह का ईमेल आता है, तो पूरी सरकारी मशीनरी को अलर्ट पर आना पड़ता है। फिलहाल, जयपुर पुलिस की स्पेशल साइबर सेल इस हाईकोर्ट (High Court) बम धमकी मामले की बहुत ही गहराई से तकनीकी जांच कर रही है और प्रशासन को उम्मीद है कि जल्द ही इसके पीछे के मास्टरमाइंड को बेनकाब कर सख्त से सख्त सजा दिलवाई जाएगी।


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