7 ग्राम पंचायतों में चला स्वच्छता अभियान ने बदली नीमच के गांवों की तस्वीर

नीमच : किसी भी सभ्य और स्वस्थ समाज की पहली पहचान उसकी साफ-सफाई से होती है। यह सिर्फ एक दिन का काम या कोई सरकारी औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया और हमारी दैनिक जीवनशैली का एक अहम हिस्सा होना चाहिए। इसी महत्वपूर्ण उद्देश्य और दूरगामी सोच को धरातल पर उतारते हुए नीमच जिले में स्वच्छता (Swachhata) अभियान एक बेहद शानदार और प्रेरक पहल की गई है।
शनिवार का दिन जिले की कई ग्राम पंचायतों के लिए महज एक छुट्टी का दिन नहीं था, बल्कि यह एक उत्सव की तरह मनाया गया। इस विशेष दिन को नीमच स्वच्छता (Swachhata) अभियान शनिवार के रूप में मनाते हुए जिले भर में साफ-सफाई का एक अभूतपूर्व महा-अभियान चलाया गया, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों की पूरी तस्वीर ही बदल कर रख दी है।
कलेक्टर और सीईओ के कुशल मार्गदर्शन में हुई शुरुआत
किसी भी बड़े और व्यापक अभियान की सफलता पूरी तरह से उसके नेतृत्व और कुशल रणनीति पर निर्भर करती है। नीमच जिले में चलाए गए इस विशेष सफाई अभियान को सफल बनाने के पीछे जिला प्रशासन की अहम और सक्रिय भूमिका रही। नीमच कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा और जिला पंचायत सीईओ श्री अमन वैष्णव के स्पष्ट मार्गदर्शन और सख्त निर्देशों पर इस पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई थी।
प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सिर्फ सड़कों पर दिखावे के लिए झाड़ू लगाना नहीं था, बल्कि आम जनता के दिलो-दिमाग में नीमच स्वच्छता (Swachhata) अभियान के प्रति एक गहरी और स्थायी जागरूकता पैदा करना था। जिले के आला अधिकारियों की इसी दूरगामी सोच के परिणामस्वरूप यह कार्यक्रम महज एक सरकारी फरमान न रहकर एक बड़े जन-आंदोलन में तब्दील हो गया।
जन सहयोग और श्रमदान से चमके सार्वजनिक स्थल
इस पूरे महा-अभियान की सबसे खूबसूरत और सकारात्मक बात यह रही कि इसमें स्थानीय ग्रामीणों ने बिना किसी दबाव के बढ़-चढ़कर अपना योगदान दिया। ‘श्रमदान’ की जिस महान भारतीय परंपरा को हम आधुनिकता की दौड़ में अक्सर भूल जाते हैं, वह शनिवार को नीमच के गांवों में पूरी तरह से जीवंत हो उठी।
ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, सरपंचों और सचिवों के साथ-साथ आम नागरिकों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने भी अपने हाथों में फावड़े और झाड़ू थाम ली। ग्राम पंचायतों द्वारा अपने क्षेत्र के प्रमुख स्थानों, हाट-बाजारों, सार्वजनिक चौपालों, पंचायत भवनों के आसपास और मुख्य मार्गों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
सालों से जिन नालियों और रास्तों पर कचरे का अंबार लगा था, आज जन सहयोग से उन सभी स्थानों की सघन साफ-सफाई की गई। यह साबित करता है कि नीमच स्वच्छता (Swachhata) अभियान की असली मंजिल तभी हासिल की जा सकती है, जब प्रशासन और जनता कदम से कदम मिलाकर चलें।
इन ग्राम पंचायतों ने पेश की बेहतरीन मिसाल
जिले के अलग-अलग विकासखंडों में इस विशेष अभियान का व्यापक और सीधा असर देखने को मिला। जनपद पंचायत नीमच, जावद और मनासा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली विभिन्न ग्राम पंचायतों में अलसुबह से ही विशेष सफाई अभियान चलाए गए। मुख्य रूप से रूपपुरा, निलिया, मोरवन, जवासा, महागढ़ एवं भदाना जैसी ग्राम पंचायतों ने एक नई और अनुकरणीय मिसाल पेश की है।
इन गांवों में सुबह से ही भारी उत्साह का माहौल था। ग्रामीणों ने अपनी स्वेच्छा से आगे आकर अपने गांव को हमेशा स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने का दृढ़ संकल्प लिया। मुख्य चौराहों से लेकर स्कूल परिसरों और आंगनबाड़ी केंद्रों तक, हर जगह स्वच्छता मित्रों और आम ग्रामीणों ने मिलकर पसीना बहाया और पूरे गांव को चकाचक कर दिया।
बीमारियों से बचाव और स्वस्थ समाज का निर्माण
बदलते मौसम और बढ़ती गर्मी के साथ ग्रामीण इलाकों में कई तरह की गंभीर और मौसमी बीमारियों, जैसे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और वायरल फीवर का खतरा हमेशा मंडराता रहता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इन बीमारियों की मुख्य जड़ गंदगी, जमा हुआ दूषित पानी और जलभराव ही होता है।
प्रशासन द्वारा शुरू किया गया यह नीमच स्वच्छता (Swachhata) अभियान अभियान केवल गांव की बाहरी सुंदरता बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि इसका सीधा और सकारात्मक असर ग्रामीणों के स्वास्थ्य और उनके जीवन स्तर पर भी पड़ेगा।
जब गांव का कोना-कोना पूरी तरह साफ रहेगा, नालियों में गंदा पानी नहीं रुकेगा और ठोस कचरे का सही तरीके से निपटान होगा, तो निश्चित तौर पर बीमारियों के फैलने की आशंका भी नाममात्र की रह जाएगी। यह एक सशक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में उठाया गया एक बहुत बड़ा और प्रभावी कदम है।
आगे भी जारी रहेगा यह संकल्प
नीमच जिले में शनिवार को जो अद्भुत और प्रेरणादायक नजारा देखने को मिला, वह सिर्फ एक दिन का आयोजन या फोटो खिंचवाने का अवसर बनकर नहीं रहना चाहिए। जिला प्रशासन और जागरूक ग्रामीणों ने यह सामूहिक संकल्प लिया है कि नीमच स्वच्छता (Swachhata) अभियान की यह पावन अलख आगे भी इसी तरह निरंतर जगाई जाती रहेगी।
इस अभियान ने यह पूरी तरह साबित कर दिया है कि अगर सामूहिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो किसी भी गांव की सूरत बदलते देर नहीं लगती। अब पूरी उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में जिले की अन्य ग्राम पंचायतें भी इस सफल मॉडल को अपनाएंगी और साफ-सफाई के इस महा-यज्ञ में अपनी आहुति देंगी, ताकि पूरा नीमच जिला प्रदेश भर में एक आदर्श बन सके।
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