25 हजार की संजीवनी: गंभीर बीमारी से जूझ रही निधि के लिए कलेक्टर सहायता बनी बड़ी राहत
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
24 फ़रवरी 2026, (अपडेटेड 24 फ़रवरी 2026, 5:15 अपराह्न IST)

नीमच । नीमच जिले में एक बार फिर प्रशासन की संवेदनशीलता और इंसानियत की एक बेहद शानदार मिसाल देखने को मिली है। जब एक मजबूर परिवार अपनी बीमार बेटी के महंगे और जटिल इलाज के लिए उम्मीद खोता जा रहा था, तब प्रशासन की ओर से मिली कलेक्टर सहायता (Collector Help) उनके लिए किसी चमत्कार से कम साबित नहीं हुई।

जिला कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक अत्यंत गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जूझ रही मनासा की बेटी के इलाज के लिए जिला रेडक्रॉस सोसायटी से 25,000 रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता राशि मंजूर की है। प्रशासन के इस मानवीय कदम से न सिर्फ मरीज के परिवार की टूटती सांसों को एक नई उम्मीद मिली है, बल्कि पूरे जिले में इस त्वरित कार्यवाही की जमकर सराहना हो रही है।

मनासा की निधि को मिली यह महत्वपूर्ण संजीवनी 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा भावुक कर देने वाला मामला नीमच जिले के मनासा क्षेत्र का है। मनासा निवासी आशीष (जिनके पिता का नाम अनिल भाटी है) की बहन निधि (जिनके पिता स्व. मुकेश भाटी हैं) पिछले कुछ समय से एक बेहद दुर्लभ और जानलेवा बीमारी की चपेट में आ गई हैं। इस बीमारी को मेडिकल भाषा में जीबीएस (गुलियन-बैरे सिंड्रोम – Guillain-Barré Syndrome) कहा जाता है। इस गंभीर बीमारी ने निधि को शारीरिक रूप से पूरी तरह से कमजोर और लाचार कर दिया है।

चूंकि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है, इसलिए उनके पास इस गंभीर बीमारी के लाखों रुपये के इलाज के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। ऐसे मुश्किल और तनावपूर्ण समय में परिवार ने अपनी आखिरी उम्मीद जिला प्रशासन से बांधी और मदद की मार्मिक गुहार लगाई। उनकी यह पुकार सुनते ही बिना किसी देरी के कलेक्टर सहायता (Collector Help) की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

क्या है जीबीएस (GBS) बीमारी और क्यों है इसका इलाज महंगा? 

 मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि आखिर यह बीमारी है क्या? जीबीएस यानी गुलियन-बैरे सिंड्रोम एक बहुत ही दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल विकार (Neurological Disorder) है। इस अवस्था में इंसान के शरीर का अपना ही इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) गलती से शरीर की स्वस्थ नसों (nerves) पर जोरदार हमला कर देता है।

इसके शुरुआती लक्षणों में अचानक भयंकर कमजोरी आना, पैरों और हाथों में झुनझुनी होना शामिल है। अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह पूरे शरीर में पैरालिसिस (लकवा) का रूप ले लेता है।

इसका इलाज काफी महंगा और लंबा होता है, जिसमें कई बार आईसीयू और महंगे इंजेक्शंस की जरूरत पड़ती है। यह खर्च किसी भी गरीब या मध्यमवर्गीय परिवार की कमर तोड़ सकता है। ऐसे कठिन समय में एक बड़ी कलेक्टर सहायता (Collector Help) का मिलना किसी वरदान की तरह काम करता है।

रेडक्रॉस से तुरंत जारी हुए 25 हजार रुपये 

मरीज निधि के परिवार की बेबसी और बीमारी की गंभीरता को समझते हुए कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा ने सरकारी फाइलों को लालफीताशाही में नहीं उलझने दिया। उन्होंने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए रेडक्रॉस नीमच के आपातकालीन फंड से मदद की फाइल को तत्काल मंजूरी दे दी।

इस त्वरित फैसले के तहत 25 हजार रुपये की शुरुआती आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। इस त्वरित और मानवीय फैसले की वजह से आज पूरे क्षेत्र में इस कलेक्टर सहायता (Collector Help) की आम जनता के बीच खूब तारीफ हो रही है। इस राशि से निधि के प्रारंभिक और जरूरी उपचार में काफी अधिक मदद मिलेगी, जिससे इलाज में पैसों की कमी आड़े नहीं आएगी।

पारदर्शिता का पूरा ध्यान: आरटीजीएस (RTGS) से सीधे बैंक खाते में पहुंचे पैसे 

आज के डिजिटल युग में सरकारी मदद और योजनाओं में पूरी पारदर्शिता का ध्यान रखा जा रहा है। इसी नियम का सख्ती से पालन करते हुए कलेक्टर द्वारा स्वीकृत की गई यह 25 हजार रुपये की राशि किसी चेक या नकद के रूप में नहीं दी गई है।

यह पूरी राशि सीधे आवेदक के बैंक खाते में आरटीजीएस (RTGS) प्रणाली के माध्यम से सुरक्षित ट्रांसफर कर दी गई है। इस डिजिटल ट्रांसफर का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि अब पीड़ित परिवार को पैसे निकालने के लिए किसी भी सरकारी दफ्तर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इस पारदर्शी कलेक्टर सहायता (Collector Help) की बदौलत अब परिवार अपना पूरा ध्यान सिर्फ निधि की देखभाल और उसके इलाज पर लगा सकेगा।

प्रशासन की संवेदनशीलता जीत रही है जनता का दिल

जिले के आम नागरिकों का स्पष्ट मानना है कि जब जिले का मुखिया संवेदनशील और जनता के प्रति जवाबदेह होता है, तो जरूरतमंदों को समय पर न्याय और मदद दोनों मिलते हैं। नीमच में यह कोई पहला मौका नहीं है, जब कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने इस तरह की दरियादिली दिखाई है।

कलेक्टर सहायता (Collector Help) का यह सार्थक और जमीनी कदम इस बात को फिर से मजबूती से साबित करता है कि सरकारी तंत्र अगर ईमानदारी से ठान ले, तो वह किसी भी गरीब और बेसहारा इंसान का सबसे मजबूत सहारा बन सकता है।

अब पूरा मनासा क्षेत्र और नीमच जिला निधि के जल्द से जल्द पूर्ण रूप से स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहा है। पीड़ित परिवार ने इस मुश्किल वक्त में मिले इस बड़े आर्थिक सहयोग के लिए जिला प्रशासन और रेडक्रॉस सोसायटी का अश्रुपूर्ण नेत्रों से आभार व्यक्त किया है।


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Aakash Sharma
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