श्री राम हॉस्पिटल में बड़े आयुष्मान घोटाला का पर्दाफाश, ‘डबल वसूली’ से मचा हड़कंप

Ayushman Scam
नीमच । मध्य प्रदेश के नीमच जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार करने वाली खबर सामने आई है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना, जो गरीब और असहाय लोगों को गंभीर बीमारियों में मुफ्त इलाज की गारंटी देती है, अब कुछ लालची निजी अस्पतालों के लिए भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है।
हाल ही में कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई के दौरान सामने आए इस आयुष्मान घोटाला (Ayushman Scam) ने पूरे जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे की नींद उड़ा दी है। मालवा अंचल में इस तरह की घटना ने आम जनता के विश्वास को गहरी ठेस पहुंचाई है।
महाघोटाले के केंद्र में श्री राम हॉस्पिटल
इस कथित लूट और महाघोटाले के केंद्र में नीमच शहर का चर्चित ‘श्री राम हॉस्पिटल’ है। इस अस्पताल प्रबंधन पर आरोप है कि उन्होंने एक गरीब मरीज के डरे-सहमे परिवार से न केवल नगद लाखों रुपये ऐंठ लिए, बल्कि सरकार की आंखों में धूल झोंकते हुए पोर्टल से भी इलाज का फर्जी क्लेम उठा लिया।
इस दोहरी लूट ने आयुष्मान घोटाला (Ayushman Scam की गहरी जड़ों को उजागर कर दिया है और सिस्टम की मॉनिटरिंग पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मजबूरी का फायदा और लाखों की अवैध वसूली
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मनासा तहसील के अंतर्गत आने वाले छोटे से गांव भाटखेड़ी के रहने वाले राजू बंजारा के परिवार पर उस वक्त मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा, जब उनके घर के एक सदस्य को अचानक गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
बेहतर इलाज की उम्मीद लिए इस परिवार ने नीमच के श्री राम हॉस्पिटल का रुख किया। राजू के पास सरकार द्वारा जारी किया गया कार्ड मौजूद था, जिससे उन्हें पूरी उम्मीद थी कि अब 5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त हो जाएगा और उन्हें साहूकारों से कर्ज नहीं लेना पड़ेगा।
लेकिन, हकीकत इसके बिल्कुल उलट थी। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने इस कार्ड को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया। मरीज की गंभीर हालत का हवाला देकर परिजनों पर तुरंत नगद पैसे जमा करने का भारी दबाव बनाया गया। इस बड़े आयुष्मान घोटाला (Ayushman Scam में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है
कि अस्पताल ने संवेदनशीलता को ताक पर रखकर दोनों हाथों से लूट मचाई। पीड़ित परिवार का स्पष्ट आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने उनसे इलाज के नाम पर 1.5 लाख रुपये नगद जमा करवा लिए। जब जीवन भर की गाढ़ी कमाई सौंपने के बाद परिवार ने पक्के बिल की मांग की, तो उन्हें कोई भी आधिकारिक रसीद नहीं दी गई और लगातार टालमटोल किया जाता रहा।
एक मरीज, दो तरफ से लूट: कैसे हुआ खेल?
धोखाधड़ी और गबन की यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। आरोप है कि पीड़ित से 1.5 लाख रुपये कैश लेने के साथ-साथ, अस्पताल प्रबंधन ने गुपचुप तरीके से उसी मरीज के कार्ड का इस्तेमाल किया और सरकारी पोर्टल से भी इलाज की पूरी राशि का क्लेम उठा लिया।
यानी, एक ही मरीज के इलाज के नाम पर गरीब की जेब भी काटी गई और सरकारी खजाने को भी चूना लगाया गया। स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यह आयुष्मान घोटाला (Ayushman Scam न केवल अनैतिक है बल्कि 420 (धोखाधड़ी) का एक स्पष्ट और पूरी तरह से आपराधिक कृत्य है।
जनसुनवाई में छलका दर्द, एक्शन में प्रशासन
मंगलवार को नीमच कलेक्ट्रेट में जब राजू बंजारा ने रुंधे गले से अपना दर्द बयां किया, तो वहां मौजूद हर एक अधिकारी सन्न रह गया। राजू ने बताया, “हम गरीब लोग हैं। हमने कार्ड इसीलिए बनवाया था ताकि मुसीबत में काम आए। लेकिन अस्पताल वालों ने हमसे डेढ़ लाख रुपये भी ले लिए और बिल मांगने पर हमें भगा देते हैं। हमें सिर्फ न्याय चाहिए।”
इस हाई-प्रोफाइल आयुष्मान घोटाला (Ayushman Scam की गूंज उठते ही नीमच जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया है। कलेक्टर कार्यालय ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष टीम को निष्पक्ष जांच के सख्त निर्देश दिए हैं।
लाइसेंस रद्द होने और एफआईआर की तलवार
सूत्रों की मानें तो जांच कमेटी अस्पताल के रिकॉर्ड और सरकारी पोर्टल के डेटा का मिलान कर रही है। यदि जांच रिपोर्ट में श्री राम हॉस्पिटल पर लगे ये संगीन आरोप सही साबित होते हैं, तो अस्पताल का रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द किया जा सकता है।
इसके साथ ही अस्पताल के संचालकों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा भी दर्ज हो सकता है। अब नीमच और मंदसौर जिले की जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस आयुष्मान घोटाला (Ayushman Scam मामले में कितनी सख्त नजीर पेश करता है, ताकि भविष्य में कोई भी अस्पताल गरीबों के हक का पैसा लूटने की हिम्मत न कर सके।
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