Heart Attack: 9 साल की बच्ची की दिल के दौरे से खौफनाक मौत, 4 महीने पहले भाई ने भी ऐसे ही तोड़ा था दम

Heart Attack
नागौर । आजकल कम उम्र में दिल की बीमारियों के मामले लगातार डरा रहे हैं, लेकिन राजस्थान के नागौर से एक ऐसा दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है जिसने हर माता-पिता की नींद उड़ा दी है। नागौर के एक निजी स्कूल में 9 साल की मासूम छात्रा का दिल के दौरे (Heart Attack) के कारण दर्दनाक मौत हो गई।
बच्ची स्कूल के मैदान में खेल रही थी, तभी अचानक वह लड़खड़ाई और बेहोश होकर गिर पड़ी। सबसे दुखद और हैरान करने वाली बात यह है कि महज 4 महीने पहले इसी बच्ची के बड़े भाई की भी बिल्कुल इसी तरह जान गई थी।
घटना का पूरा विवरण: हंसते-खेलते कैसे गई जान?

यह रूह कंपा देने वाली घटना नागौर जिले के गोटन कस्बे में स्थित गोटन इंटरनेशनल स्कूल की है। तालनपुर के रहने वाले राजेंद्र बापेडिया की 9 वर्षीय बेटी दिव्या इसी स्कूल में पांचवीं कक्षा की छात्रा थी। हमेशा की तरह 23 फरवरी की सुबह दिव्या खुशी-खुशी स्कूल पहुंची थी। सुबह करीब 7:48 बजे प्रार्थना (प्रेयर) शुरू होने में कुछ समय बाकी था, इसलिए वह अन्य बच्चों के साथ स्कूल के ग्राउंड में खेल रही थी।
ग्राउंड में खेलते समय अचानक दिव्या को चक्कर आया और वह सीधे जमीन पर गिर पड़ी। स्कूल के डायरेक्टर रामकुंवार ओला ने बताया कि बच्ची के अचानक गिरने से वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्कूल स्टाफ ने तुरंत बच्ची को संभाला और परिवार को सूचना देते हुए बिना कोई देरी किए उसे गोटन के राजकीय अस्पताल ले जाया गया। लेकिन दुर्भाग्यवश, अस्पताल पहुंचने से पहले ही दिल के दौरे (Heart Attack) ने उस मासूम की सांसें छीन ली थीं। डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़: 4 महीने पहले उजड़ चुका है एक चिराग
इस घटना ने बापेडिया परिवार को ऐसे गहरे सदमे में डाल दिया है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। डॉक्टरों के अनुसार, दिव्या के शरीर पर किसी भी तरह की बाहरी चोट के कोई निशान मौजूद नहीं थे। जांच में मौत का कारण स्पष्ट रूप से कार्डियक अरेस्ट ही माना गया है। हालांकि, सदमे में डूबे परिजनों ने बच्ची का पोस्टमॉर्टम करवाने से साफ इनकार कर दिया, जिसके बाद शव परिवार को सौंप दिया गया।
परिवार वालों ने जो जानकारी दी, वह मेडिकल साइंस के लिए भी चिंता का विषय है। दिव्या के बड़े भाई अभिषेक की मौत भी महज 4 महीने पहले 9 सितंबर 2025 को ठीक इसी तरह हुई थी। वह भी घर पर सामान्य रूप से खेलते समय अचानक बेहोश हो गया था और अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। एक ही परिवार में दो सगे भाई-बहन की दिल के दौरे (Heart Attack) से मौत ने जेनेटिक कारणों की तरफ एक बहुत बड़ा इशारा किया है।
आखिर 9 साल के बच्चों को क्यों आ रहा है कार्डियक अरेस्ट?
डॉक्टरों के अनुसार, इतनी कम उम्र में बच्चों को कार्डियक अरेस्ट आने के मुख्य रूप से 2 बड़े कारण हो सकते हैं:
आर्टरी में दिक्कत: अगर बचपन से ही बच्चे की आर्टरी (धमनियों) में कोई जन्मजात समस्या या सिकुड़न है, तो 20 साल की उम्र तक कार्डियक अरेस्ट का भारी खतरा बना रहता है।
हार्ट की पंपिंग रेट: दिल की धड़कन या पंपिंग रेट में अचानक होने वाली गड़बड़ी भी अचानक आने वाले दिल के दौरे (Heart Attack) का एक प्रमुख कारण बन सकती है।
Heart Attack के इन सामान्य लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज
अक्सर हम बच्चों की शिकायतों को गैस या थकान मान लेते हैं, लेकिन मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार इन लक्षणों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए:
अचानक बहुत ज्यादा बीमार या कमजोर महसूस करना।
रुक-रुककर चक्कर आना या आंखों के आगे अंधेरा छाना।
पुरुषों या लड़कों के सीने में तेज दर्द उठना।
बिना कोई भारी काम किए तेजी से पसीना आना।
जबड़े, गर्दन या बाएं हाथ में दर्द महसूस होना।
महिलाओं और बच्चियों की पीठ में अचानक ज्यादा दर्द होना।
सांस लेने में भारी कठिनाई महसूस करना।
बहुत ज्यादा और बिना कारण थकान महसूस करना।
क्यों बढ़ रहे हैं हार्ट के मामले ?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दिल की दिक्कत आमतौर पर खराब लाइफस्टाइल और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से होती है। ओवर ईटिंग, मोटापा (Obesity), और डायबिटीज इसके बड़े कारण हैं। इसके अलावा फेफड़ों में क्लॉटिंग और सबसे महत्वपूर्ण ‘जेनेटिक’ (Genetics) हिस्ट्री भी दिल के दौरे (Heart Attack) के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हो सकती है। दिव्या के मामले में भी भाई-बहन दोनों की समान परिस्थितियों में हुई मौत मजबूत जेनेटिक हिस्ट्री की ओर ही इशारा करती है।
अगर आपके परिवार में भी किसी सदस्य को कम उम्र में हार्ट की समस्या रही है, तो अपने बच्चों की नियमित कार्डियक स्क्रीनिंग (ईसीजी आदि) जरूर करवाएं, ताकि समय रहते किसी बड़ी अनहोनी को टाला जा सके।
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