285 करोड़ की Singoli road: 1 बड़ी लापरवाही और ठेकेदार ने बना दी जनता की जिंदगी नर्क!
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
27 फ़रवरी 2026, (अपडेटेड 27 फ़रवरी 2026, 11:56 पूर्वाह्न IST)

सिंगोली (राजेश कोठारी): विकास कार्यों का उद्देश्य जनता को सहूलियत देना होता है, लेकिन जब यही विकास कार्य विनाश और परेशानी का कारण बन जाएं, तो आम आदमी अपनी फरियाद लेकर कहां जाए? जिला मुख्यालय नीमच से लेकर राजस्थान के तिलस्वा घाट को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित सिंगोली सड़क (Singoli road) का निर्माण कार्य इन दिनों स्थानीय नागरिकों और राहगीरों के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं है।

राजस्थान की जानी-मानी सांवरिया कंस्ट्रक्शन कंपनी (Sanwariya Construction Company) द्वारा बनाई जा रही इस सड़क का काम ठेकेदार ने बीच शहर में ही अधूरा छोड़ दिया है। नतीजतन, अब यह अधूरी सड़क राहगीरों और स्थानीय व्यापारियों के लिए ‘आफत की पुड़िया’ बन चुकी है।

95 किलोमीटर का सफर और भारी-भरकम बजट

Singoli road

प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, नीमच से तिलस्वा घाट तक 95 किलोमीटर लंबी इस अहम सिंगोली सड़क (Singoli road) परियोजना की कुल लागत लगभग 285 करोड़ रुपये तय की गई है। इतने बड़े बजट और तमाम दावों के बावजूद, जमीनी हकीकत यह है कि निर्माण कार्य कछुआ गति से रेंग रहा है।

सबसे दयनीय और खतरनाक स्थिति सिंगोली नगर के मध्य की है। यहाँ तिलस्वा मार्ग से लेकर पेट्रोल पंप तक ठेकेदार और निर्माण एजेंसी ने सड़क बनाने के नाम पर करीब 3 फीट गहरी खाई खोदकर छोड़ दी है। महीनों से यह हिस्सा ऐसे ही खुला पड़ा है, जो अब सीधे तौर पर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहा है।

बुलेट की तरह हवा में उछल रहे गिट्टी-पत्थर, व्यापारी दहशत में

Singoli road
Singoli road

इस अधूरे और बेतरतीब निर्माण का सबसे भयानक खामियाजा स्थानीय व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है। सड़क पर सिर्फ गिट्टी बिछाकर काम को बीच में ही रोक दिया गया है। जब भी कोटा, बूंदी, तिलस्वा या चित्तौड़गढ़ की ओर जाने वाले भारी भरकम ट्रक और डंपर इस गिट्टी से होकर गुजरते हैं, तो टायरों के भारी दबाव से पत्थर और गिट्टियां हवा में किसी बंदूक की गोली की तरह उछलती हैं।

स्थानीय व्यापारी नवीन जैन, महावीर गुर्जर, संजय जैन और पप्पू ठाकुर ने भारी आक्रोश के साथ अपना दर्द बयां किया। उन्होंने बताया कि,

“पहले हम सिंगोली सड़क (Singoli road) की उड़ती हुई धूल और मिट्टी से परेशान थे। दुकानों में रखा लाखों का माल खराब हो रहा था। हमें लगा कि सड़क का काम शुरू हुआ है तो जल्दी ही इस परेशानी से राहत मिलेगी, लेकिन अब तो स्थिति और भी खौफनाक हो गई है।

व्यापारियों का कहना है कि अब धूल से ज्यादा खौफ उन पत्थरों से लगता है जो बड़े वाहनों के गुजरने पर सीधे दुकानों के अंदर और राहगीरों को आकर लगते हैं।

बाल-बाल बचे लोग, कभी भी घट सकती है बड़ी अनहोनी

ठेकेदार की इस घोर लापरवाही का एक जीता-जागता और डरावना उदाहरण कुछ ही दिन पहले देखने को मिला। निर्माणाधीन मार्ग के पास ही एक गारमेंट्स व्यापारी ने अपनी दुकान के कपड़ों को धूल से बचाने के लिए बाहर की तरफ कांच का एक बड़ा सेक्शन लगा रखा था। तभी इस सिंगोली सड़क (Singoli road) से एक भारी वाहन तेज रफ्तार से गुजरा और वहां पड़ी एक बड़ी गिट्टी जोर से उछलकर सीधे कांच पर जा लगी। पलक झपकते ही हजारों रुपये का वह पूरा कांच का सेक्शन चकनाचूर होकर सड़क पर बिखर गया।

यह तो गनीमत रही कि उस वक्त दुकान के बाहर या अंदर कांच के पास कोई ग्राहक या बच्चा मौजूद नहीं था, वरना कांच के नुकीले टुकड़े और पत्थर किसी की जान भी ले सकते थे। ऐसे जानलेवा हादसों का डर इस मार्ग पर अब रोजमर्रा की बात हो गई है। दोपहिया वाहन चालक तो आए दिन बिखरी हुई गिट्टी पर फिसलकर चोटिल हो रहे हैं।

रात के अंधेरे में ‘मौत का कुआं’ बन जाती है सड़क

पैदल चलने वाले आम राहगीरों को भी इस रास्ते से गुजरने के लिए अपनी जान हथेली पर रखनी पड़ती है। लोगों का स्पष्ट आरोप है कि निर्माण एजेंसी द्वारा काम एक साथ और व्यवस्थित तरीके से न करके, टुकड़ों-टुकड़ों में मनमर्जी से किया जा रहा है।

लंबे समय से अधूरा पड़ा होने के कारण पूरा मार्ग बुरी तरह ऊबड़-खाबड़ हो गया है। सबसे ज्यादा खौफनाक मंजर रात के समय देखने को मिलता है। इस सिंगोली सड़क (Singoli road) पर स्ट्रीट लाइट्स या पर्याप्त रोशनी का घोर अभाव है। अंधेरे में 3 फीट गहरे गड्ढे और चारों तरफ बिखरी हुई गिट्टी किसी को नजर नहीं आती। अनजान वाहन चालक अक्सर यहां संतुलन खोकर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।

प्रशासन से तत्काल और सख्त कार्रवाई की गुहार

सिंगोली के नागरिकों, व्यापारियों और राहगीरों का गुस्सा अब निर्माण एजेंसी और प्रशासन के खिलाफ सातवें आसमान पर है। रुक-रुक कर हो रहे इस निर्माण ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। लोगों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से कड़े शब्दों में मांग की है कि इस मामले में तुरंत दखल दिया जाए।

जनता की प्रमुख मांगें:

  • सिंगोली सड़क (Singoli road) के रुके हुए निर्माण कार्य में तुरंत तेजी लाई जाए और इसे जल्द से जल्द पूरा किया जाए।

  • निर्माण स्थल पर उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए नियमित रूप से दिन में कई बार पानी का छिड़काव हो।

  • ठेकेदार को सुरक्षा मानकों (Safety Norms) का कड़ाई से पालन करने के सख्त निर्देश दिए जाएं।

  • दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में उचित बैरिकेडिंग हो और रात के समय रिफ्लेक्टर या पर्याप्त लाइट की व्यवस्था की जाए।

अगर प्रशासन ने जल्द ही ठेकेदार की इस मनमानी और लापरवाही पर लगाम नहीं लगाई, तो भविष्य में किसी बड़ी और जानलेवा अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ प्रशासन आखिर कब जागता है और जनता को इस रोज-रोज की आफत से कब मुक्ति मिलती है।


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Aakash Sharma
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