युद्ध की आहट से दहला Share Market Crash में निवेशकों के ₹6 लाख करोड़ खाक, सेंसेक्स 1000 अंक टूटा

Share Market Crash

नई दिल्ली: वैश्विक राजनीति के मंच पर ईरान और इजरायल के बीच गहराते तनाव ने भारतीय निवेशकों की नींद उड़ा दी है। सोमवार को कारोबारी हफ्ते की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही और भारतीय शेयर बाजार में एक बड़ा Share Market Crash देखने को मिला। युद्ध की खबरों के बीच निवेशकों ने भारी बिकवाली की, जिससे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के दोनों प्रमुख सूचकांक ताश के पत्तों की तरह ढह गए। इस अचानक आई गिरावट ने बाजार की पिछले कई दिनों की तेजी को पूरी तरह सोख लिया है।

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बाजार में मची हाहाकार: आंकड़ों का गणित

सोमवार की सुबह जैसे ही बाजार खुला, सेंसेक्स में 1000 अंकों से ज्यादा की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1.21 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 80,282 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। दूसरी ओर, निफ्टी भी 300 अंकों की भारी चोट सहकर 24,900 के अहम स्तर के नीचे फिसल गया। इस Share Market Crash की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शुक्रवार को बीएसई का कुल मार्केट कैप जो 463.50 लाख करोड़ रुपये था, वह महज कुछ घंटों में गिरकर 457.50 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानी निवेशकों के लगभग 6 लाख करोड़ रुपये झटके में स्वाहा हो गए।

आखिर क्यों आया यह Share Market Crash?

इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे प्रमुख कारण मिडिल ईस्ट में ईरान-इजरायल के बीच जारी युद्ध की स्थिति है। वैश्विक बाजारों को डर है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर युद्ध का दायरा बढ़ा, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में थोड़ी सी भी बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है। इसी अनिश्चितता के चलते आज एक भयावह Share Market Crash की स्थिति बनी।

दिग्गज शेयरों में भारी बिकवाली

आज के इस Share Market Crash में कोई भी बड़ा सेक्टर सुरक्षित नहीं रहा। बीएसई टॉप-30 के 29 शेयर लाल निशान में डूबे रहे।

  • इंडिगो (IndiGo): विमान ईंधन (ATF) महंगा होने की आशंका से शेयर 5 फीसदी तक टूट गया।

  • एल एंड टी (L&T): मिडिल ईस्ट में कंपनी के बड़े प्रोजेक्ट्स पर संकट के डर से शेयर 4 फीसदी नीचे गिरा।

  • अडानी पोर्ट (Adani Port): वैश्विक व्यापार में बाधा के डर से शेयर में 3 फीसदी की गिरावट रही। दिलचस्प बात यह रही कि इतनी भारी बिकवाली के बीच रक्षा क्षेत्र की कंपनी बीईएल (BEL) का शेयर एकमात्र ऐसा रहा जिसमें 1 फीसदी की तेजी देखी गई।

सेक्टरवार तबाही और मेटल की सुरक्षा

बाजार के लगभग सभी प्रमुख सेक्टर जैसे ऑटो, आईटी, बैंकिंग, एफएमसीजी और हेल्थकेयर लाल निशान पर कारोबार कर रहे थे। वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयरों में भी जबरदस्त गिरावट रही। हालांकि, इस Share Market Crash के दौरान मेटल सेक्टर में कुछ खरीदारी देखी गई। जानकारों के अनुसार, निवेशक अस्थिरता के समय में सुरक्षित संपत्ति (Safe Assets) के रूप में धातुओं में निवेश करना पसंद करते हैं, जिससे मेटल इंडेक्स में थोड़ी मजबूती रही।

लोअर सर्किट और निवेशकों का डर

बाजार की हालत इतनी खराब थी कि बीएसई पर सक्रिय 3,660 शेयरों में से 2,985 शेयरों में गिरावट देखी गई। सिर्फ 510 शेयरों ने ही बढ़त बनाने की हिम्मत दिखाई। इस Share Market Crash के दौरान 162 शेयरों में लोअर सर्किट लग गया, जिसका अर्थ है कि वहां सिर्फ बेचने वाले थे और खरीदार पूरी तरह नदारद थे। इसके अलावा, 663 शेयर अपने 52 हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गए, जो बाजार में व्याप्त गहरे खौफ को दर्शाता है।

एक्सपर्ट्स की चेतावनी: अभी संभलकर चलें

बाजार के दिग्गज विश्लेषकों का मानना है कि यह Share Market Crash अभी और गहरा सकता है। अगर ईरान और इजरायल के बीच सीधी सैन्य कार्रवाई शुरू होती है, तो भारतीय बाजार में और बड़ी गिरावट के लिए तैयार रहना चाहिए। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे अभी ‘पैनिक सेलिंग’ (Panic Selling) से बचें, लेकिन नए निवेश के लिए भी थोड़ा इंतजार करें। जब तक वैश्विक परिस्थितियां सामान्य नहीं होतीं, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहने की पूरी संभावना है।


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