रतनगढ़ में गाइडलाइन रेट बढ़ने से बढ़ी परेशानी, समाजसेवियों ने सिंगोली पहुंचकर जताई आपत्ति
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
21 मार्च 2026, (अपडेटेड 21 मार्च 2026, 2:34 अपराह्न IST)

रतनगढ़ (प्रदीप तिवारी)। नीमच जिले के रतनगढ़ क्षेत्र में हाल ही में बढ़ाई गई गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर समाजसेवियों, पार्षदों और ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल सिंगोली तहसील पहुंचा, जहां उन्होंने पंजीयन अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) में संशोधन की मांग की।

इस प्रतिनिधिमंडल में पिंकेश मंडोरा, केशव चारण, कन्हैयालाल चारण सहित कई प्रमुख लोग शामिल रहे। सभी ने एकजुट होकर कहा कि वर्तमान गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) ने क्षेत्र के आम नागरिकों, किसानों और निवेशकों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है।

बाजार मूल्य से अधिक गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) बनी बड़ी समस्या

Guideline Rate

ज्ञापन में यह प्रमुख रूप से बताया गया कि रतनगढ़ क्षेत्र में लागू की गई नई गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) वास्तविक बाजार मूल्य से अधिक है। सामान्यतः गाइडलाइन दरों का उद्देश्य पारदर्शिता लाना और संपत्ति लेन-देन को व्यवस्थित करना होता है, लेकिन यहां स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अधिक गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) के कारण जमीन की खरीद-बिक्री महंगी हो गई है। रजिस्ट्री के दौरान अधिक शुल्क देना पड़ रहा है, जिससे आम लोग जमीन खरीदने से पीछे हट रहे हैं। परिणामस्वरूप प्रॉपर्टी मार्केट की गतिविधियां धीमी पड़ती जा रही हैं।

कृषि भूमि पर भी पड़ा गहरा असर

रतनगढ़ क्षेत्र में कृषि भूमि की गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) में हुई वृद्धि को लेकर किसानों ने भी चिंता जताई है। ग्रामीण क्षेत्रों और नगर परिषद सीमा के अंतर्गत आने वाली जमीनों की दरों में भारी अंतर देखने को मिल रहा है, जिससे भ्रम और असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

किसानों का कहना है कि बढ़ी हुई गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) के कारण कृषि भूमि को व्यावसायिक उपयोग में बदलना अब पहले की तुलना में अधिक महंगा हो गया है। इससे न केवल किसानों की आय प्रभावित हो रही है, बल्कि क्षेत्र में संभावित विकास कार्य भी रुक सकते हैं।

प्रशासनिक लापरवाही के आरोप

स्थानीय पार्षद मनोहर सोनी ने इस मामले में प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि नगर परिषद और सीएमओ स्तर पर बिना पर्याप्त सर्वे और ठोस आधार के गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) बढ़ाई गई है।

उन्होंने कहा कि यदि गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) का निर्धारण वास्तविक बाजार मूल्य के आधार पर नहीं किया गया है, तो यह सीधे-सीधे आम जनता और निवेशकों के हितों के खिलाफ है। इस प्रकार के निर्णय क्षेत्रीय विकास को बाधित करते हैं और निवेश के माहौल को कमजोर बनाते हैं।

रजिस्ट्री शुल्क और बैंक लोन पर असर

बढ़ी हुई गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) का असर केवल जमीन की कीमत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव रजिस्ट्री शुल्क और बैंक लोन पर भी पड़ा है। वर्तमान में रजिस्ट्री शुल्क 6.3% से अधिक हो चुका है, जिससे संपत्ति खरीदना और महंगा हो गया है।

इसके अलावा बैंक भी लोन स्वीकृति के लिए गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) को आधार मानते हैं। ऐसे में कई लोगों को अपेक्षित ऋण नहीं मिल पा रहा है, जिससे मकान निर्माण और व्यवसायिक निवेश की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।

सरकार से संशोधन की उम्मीद

राज्य सरकारें अक्सर ऐसी परिस्थितियों में गाइडलाइन दरों की समीक्षा करती हैं। हाल ही में नीमच जिले के कुछ क्षेत्रों में भी गाइडलाइन दरों में संशोधन किया गया था, जिससे लोगों को राहत मिली थी।

स्थानीय नागरिकों को उम्मीद है कि रतनगढ़ क्षेत्र में भी बढ़ी हुई गाइडलाइन रेट (Guideline Rate) की समीक्षा की जाएगी और इसे वास्तविक बाजार मूल्य के अनुरूप लाया जाएगा। इससे क्षेत्र में विकास कार्यों को फिर से गति मिल सकेगी।

ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें

प्रतिनिधिमंडल ने पंजीयन अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें रखीं:

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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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