नीमच। जिले में बलराम योजना को लेकर मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में एक ऐसा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद अधिकारियों और आम लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। ग्राम तुर्किया निवासी किसान किशोर गुर्जर और सामाजिक कार्यकर्ता पंकज तिवारी हाथों में कटोरा और अस्थि कलश लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। दोनों ने गले में “बलराम योजना की 13वीं” लिखी तख्तियां पहन रखी थीं और योजना में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रशासन से न्याय की मांग की।
जिला कलेक्टर हिमांशु चंद्रा को सौंपे गए आवेदन में किसान किशोर गुर्जर ने बलराम योजना के तहत स्वीकृत कार्य में गंभीर वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाया है। किसान का कहना है कि उसके खेत पर बलराम तालाब निर्माण कार्य स्वीकृत हुआ था, जिसके लिए सरकारी रिकॉर्ड में उसके नाम पर 1 लाख 19 हजार 108 रुपये का भुगतान दर्शाया गया है। लेकिन वास्तविकता में उसके बैंक खाते में केवल 15 हजार रुपये ही जमा हुए।
किसान ने दावा किया कि रिकॉर्ड और बैंक खाते में प्राप्त राशि के बीच बड़ा अंतर है, जिससे पूरे मामले में अनियमितता की आशंका पैदा होती है। उसने प्रशासन से भुगतान संबंधी सभी दस्तावेजों की जांच कराने और मामले की निष्पक्ष पड़ताल की मांग की है।
जनसुनवाई में उठाया बलराम योजना का मुद्दा
मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में किसान ने कहा कि बलराम योजना का उद्देश्य किसानों को लाभ पहुंचाना है, लेकिन यदि लाभार्थियों तक स्वीकृत राशि ही नहीं पहुंच रही है तो योजना के उद्देश्य पर सवाल खड़े होते हैं। किसान ने आरोप लगाया कि उसके नाम पर राशि जारी दिखाकर वास्तविक भुगतान नहीं किया गया।
आवेदन में उसने संबंधित अधिकारियों, पंचायत स्तर के जिम्मेदार कर्मचारियों, सरपंच, सचिव और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच करने की मांग की है। साथ ही यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई किए जाने की भी मांग की गई है।
शासन के आदेशों के उल्लंघन का भी आरोप
किसान किशोर गुर्जर ने अपने आवेदन में यह भी आरोप लगाया है कि बलराम योजना के तहत किए गए कार्य को मनरेगा से जोड़कर संचालित किया गया, जो शासन के 8 जनवरी 2020 के आदेशों के अनुरूप नहीं है। आवेदन के अनुसार पूरे मामले की तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जानी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
किसान का कहना है कि यदि भुगतान प्रक्रिया और संबंधित अभिलेखों की विस्तार से जांच की जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य उजागर हो सकते हैं। उसने मांग की कि यदि किसी स्तर पर सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है तो संबंधित लोगों से राशि की वसूली कर कार्रवाई की जाए।
अस्थि कलश और कटोरा बन गए विरोध का प्रतीक
जनसुनवाई में पहुंचे किसान और सामाजिक कार्यकर्ता ने विरोध दर्ज कराने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। दोनों हाथों में कटोरा और अस्थि कलश लेकर पहुंचे तथा गले में “बलराम योजना की 13वीं” लिखी तख्तियां पहन रखी थीं। उनका कहना था कि यह प्रतीकात्मक प्रदर्शन योजना की कथित बदहाल स्थिति और किसानों की पीड़ा को दर्शाने के लिए किया गया है।
प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद लोगों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा होती रही। कई लोगों ने किसान की शिकायत को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
7 दिन का अल्टीमेटम, फिर आमरण अनशन
सामाजिक कार्यकर्ता पंकज तिवारी ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सात दिनों के भीतर मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई और जांच शुरू नहीं हुई तो वे “अस्थि कलश-कटोरा सत्याग्रह” शुरू करेंगे।
उन्होंने कहा कि यदि इसके बाद भी किसान को न्याय नहीं मिला तो कलेक्ट्रेट परिसर में आमरण अनशन किया जाएगा। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और किसानों की शिकायतों का समय पर समाधान होना चाहिए।
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