जावद। जावद विधानसभा क्षेत्र के बांगरेड गांव में वर्षों से अधूरी पड़ी सड़क की समस्या अब ग्रामीणों के सब्र की सीमा पार करती दिखाई दे रही है। बांगरेड रोड की खराब हालत को लेकर ग्रामीणों ने भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा के गांव दौरे के दौरान खुलकर विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों का कहना है कि कई वर्षों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं।
बारिश के मौसम में बांगरेड रोड की स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। सड़क पर कीचड़ और जलभराव के कारण लोगों का पैदल निकलना तक मुश्किल हो जाता है। गांव की नई आबादी को जोड़ने वाला लगभग तीन किलोमीटर लंबा यह मार्ग लंबे समय से मरम्मत और निर्माण का इंतजार कर रहा है।
बारिश में दलदल में बदल जाती है बांगरेड रोड
ग्रामीणों के अनुसार मनासा-मोलोन बाईपास बनने से पहले इस मार्ग का उपयोग नियमित रूप से किया जाता था और यहां बसों का संचालन भी होता था। लेकिन बाईपास बनने के बाद सड़क की ओर ध्यान कम हो गया। परिणामस्वरूप आज बांगरेड रोड पूरी तरह जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी है।
बुधवार को ग्रामीणों ने सड़क की खराब स्थिति के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए। वीडियो में सड़क पर फैला कीचड़, पानी और फिसलन साफ दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार दोपहिया वाहन भी इस मार्ग से नहीं निकल पाते और लोगों को ट्रैक्टर का सहारा लेना पड़ता है।
मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए बनी बड़ी समस्या
बांगरेड रोड की बदहाली का सबसे गंभीर असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क खराब होने के कारण एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में बीमार मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए चारपाई या खाट का सहारा लेना पड़ता है।
ग्रामीणों के मुताबिक कई बार आपात स्थिति में मरीजों को मुख्य सड़क तक हाथों पर उठाकर ले जाना पड़ता है, जहां से आगे वाहन की व्यवस्था की जाती है। लोगों का कहना है कि सड़क की समस्या अब केवल सुविधा का नहीं बल्कि जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा बन चुकी है।
स्कूली बच्चों की पढ़ाई भी हो रही प्रभावित
ग्रामीणों ने बताया कि इसी मार्ग से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शासकीय हायर सेकेंडरी विद्यालय पहुंचते हैं। बारिश के दौरान सड़क पर कीचड़ और पानी भर जाने से विद्यार्थियों को स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है।
इस संबंध में ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने जिला जनसुनवाई में ज्ञापन भी सौंपा था। ज्ञापन में नागेश्वर मंदिर से नई आबादी, लक्ष्मीपुरा, श्मशान घाट और बालाजी मंदिर तक के मार्ग की खराब स्थिति का उल्लेख किया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या के कारण बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हो रही है।
शिकायतों के बाद भी नहीं निकला समाधान
ग्रामीणों के अनुसार बांगरेड रोड के निर्माण की मांग को लेकर कई बार संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर भी शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
लोगों का आरोप है कि शिकायतों का निराकरण कागजों में कर दिया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। सड़क निर्माण को लेकर कई बार घोषणाएं भी हुईं, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया।
अस्पताल भवन के भूमिपूजन के दौरान जताया विरोध
रविवार को विधायक एवं पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा गांव में नए अस्पताल भवन के भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इसी दौरान ग्रामीणों ने सड़क की समस्या को लेकर विरोध दर्ज कराया।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब अस्पताल तक पहुंचने के लिए उचित सड़क ही उपलब्ध नहीं होगी तो नए भवन का लाभ लोगों को कैसे मिल पाएगा। उनका कहना था कि पहले बांगरेड रोड का निर्माण होना चाहिए, ताकि गांव के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।
वर्षों की अनदेखी से बढ़ा आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से समस्या बने रहने और समाधान नहीं मिलने के कारण लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका मानना है कि सड़क निर्माण होने से गांव की नई आबादी, विद्यार्थियों, किसानों और मरीजों सभी को राहत मिलेगी।
फिलहाल ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जल्द से जल्द बांगरेड रोड के निर्माण की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
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