10 वर्षीय दिव्या के लिए वरदान बनी फ्री Heart Surgery, बिना एक रुपया खर्च किए मिला नया जीवन
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
16 मार्च 2026, (अपडेटेड 16 मार्च 2026, 4:37 अपराह्न IST)

नीमच (Neemuch News)मध्यप्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजना मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना एक बार फिर गरीब परिवार के लिए जीवनदायिनी साबित हुई है। नीमच जिले के मनासा ब्लॉक के धाकड़खेड़ी गांव की 10 वर्षीय बच्ची दिव्या को इस योजना के तहत समय पर इलाज मिला और उसकी सफल ह्रदय शल्य चिकित्सा (Heart Surgery) कराई गई। इस ऑपरेशन के बाद बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है और उसका परिवार बेहद खुश है।

जिला कलेक्टर हिमांशु चन्द्रा के निर्देशानुसार जिले में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत जन्मजात बीमारियों से पीड़ित बच्चों की पहचान के लिए व्यापक सर्वे अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दिव्या की जांच की, जिसमें उसके दिल में छेद होने की गंभीर समस्या सामने आई।

गांव में जांच के दौरान सामने आई बीमारी

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम जब धाकड़खेड़ी गांव में बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर रही थी, तब दिव्या की जांच में दिल से जुड़ी समस्या का संकेत मिला। टीम में शामिल डॉ. स्वाति जैन ने बच्ची की विस्तृत जांच की और पाया कि उसके दिल में छेद है।

डॉक्टर ने तुरंत परिवार को स्थिति के बारे में बताया और आगे के उपचार के लिए बच्ची को जिला चिकित्सालय नीमच रेफर किया। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की जांच में भी इस बीमारी की पुष्टि हुई और बच्ची की जल्द ह्रदय शल्य चिकित्सा (Heart Surgery) कराने की सलाह दी गई।

मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना बनी सहारा

दिव्या के पिता मुकेश, जो एक साधारण परिवार से आते हैं, उनके लिए इतनी बड़ी सर्जरी का खर्च उठाना संभव नहीं था। लेकिन मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत बच्ची के इलाज की पूरी जिम्मेदारी सरकार ने उठाई।

योजना के अंतर्गत दिव्या को इंदौर के मान्यता प्राप्त निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उसकी ह्रदय शल्य चिकित्सा (Heart Surgery) सफलतापूर्वक की। इस पूरी प्रक्रिया में परिवार को किसी प्रकार का खर्च नहीं करना पड़ा।

सफल ह्रदय शल्य चिकित्सा (Heart Surgery) के बाद पूरी तरह स्वस्थ

डॉक्टरों के अनुसार ह्रदय शल्य चिकित्सा (Heart Surgery) के बाद दिव्या की स्थिति लगातार बेहतर होती गई और अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। अब वह सामान्य बच्चों की तरह स्कूल जा सकेगी और खेलकूद में भी भाग ले सकेगी।

दिव्या के माता-पिता ने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यदि यह योजना नहीं होती तो इतनी महंगी ह्रदय शल्य चिकित्सा (Heart Surgery) कराना उनके लिए संभव नहीं था।

0 से 18 वर्ष तक के बच्चों को मिल रहा लाभ

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जन्मजात बीमारियों और विकृतियों की समय पर पहचान कर उनका इलाज कराना है।

इसके तहत दिल की बीमारी सहित कई गंभीर रोगों की सर्जरी सरकारी और मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों में निःशुल्क कराई जाती है। इससे हजारों जरूरतमंद बच्चों को नया जीवन मिल रहा है।

गरीब परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही योजना

मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के माध्यम से प्रदेश में अब तक हजारों बच्चों की ह्रदय शल्य चिकित्सा (Heart Surgery) सफलतापूर्वक की जा चुकी है। यह योजना उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन गई है जो आर्थिक तंगी के कारण अपने बच्चों का महंगा इलाज नहीं करा पाते।

नीमच जिले की दिव्या की कहानी इस बात का उदाहरण है कि समय पर सरकारी सहायता मिलने से किसी बच्चे की जान बचाई जा सकती है और उसका भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है।


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Aakash Sharma
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