मंदसौर। मध्य प्रदेश के मंदसौर और नीमच जिलों की सीमा पर स्थित गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य (Gandhi Sagar Wildlife Sanctuary) आज पर्यावरण संरक्षण का एक बेहतरीन उदाहरण बन चुका है।
जहां देश के बड़े शहर जहरीली हवा और बढ़ते प्रदूषण से जूझ रहे हैं, वहीं गांधी सागर क्षेत्र एक प्राकृतिक “ऑक्सीजन बैंक” के रूप में उभरकर सामने आया है। यहां मौजूद लाखों पेड़ लगातार वातावरण को शुद्ध कर रहे हैं।
1.5 करोड़ पेड़ बना रहे हैं जीवनदायिनी हवा
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार गांधी सागर और इसके जलग्रहण क्षेत्र में लगभग 1.5 करोड़ से अधिक पेड़ मौजूद हैं। यह पेड़ मिलकर करीब 65 लाख लोगों के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन तैयार करने की क्षमता रखते हैं।
यहां खैर, सलाई, पलाश, तेंदू और धावड़ा जैसे पेड़ों की भरमार है, जो बिना किसी मशीन या ऊर्जा के दिन-रात पर्यावरण को शुद्ध करते रहते हैं।
368 वर्ग किमी में फैला मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र
साल 1984 में अधिसूचित गांधी सागर अभयारण्य करीब 368.62 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां शुष्क पर्णपाती वन और घास के मैदान मिलकर एक संतुलित इकोसिस्टम बनाते हैं।
यह क्षेत्र केवल पेड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि जैव विविधता का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी है।
अफ्रीकी चीता प्रोजेक्ट से बढ़ी पहचान
गांधी सागर को अब अफ्रीकी चीता पुनर्वास के लिए भी चुना गया है। यहां पहले चरण में कुछ चीतों को बसाया जा चुका है और आने वाले समय में और चीतों को लाने की तैयारी है।
इस पहल से यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रहा है।
गिद्धों की बढ़ती संख्या पर्यावरण का संकेत
वन विभाग के अनुसार गांधी सागर क्षेत्र में 2025-26 के दौरान 7 प्रजातियों के 1000 से अधिक गिद्ध दर्ज किए गए हैं। गिद्धों की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि यहां का वातावरण स्वच्छ और सुरक्षित है।
जलजीव और मगरमच्छों का सुरक्षित ठिकाना
यह क्षेत्र जलजीवों के लिए भी बेहद अनुकूल है।
- 139 से अधिक प्रजातियों के जलपक्षी
- 8 से अधिक प्रकार के कछुए
- सैकड़ों मगरमच्छों का प्राकृतिक आवास
चंबल नदी का यह हिस्सा मगरमच्छों के प्रजनन के लिए जाना जाता है, जिससे गांधी सागर की पारिस्थितिकी और मजबूत होती है।
ड्रैगनफ्लाई जैसी प्रजातियां देती हैं स्वच्छता का संकेत
यहां 40 से अधिक प्रजातियों की ड्रैगनफ्लाई और डैमसेलफ्लाई पाई गई हैं। ये जीव पानी और हवा की शुद्धता के महत्वपूर्ण संकेतक माने जाते हैं। इससे स्पष्ट है कि गांधी सागर का पर्यावरण संतुलित और स्वस्थ बना हुआ है।
देश के लिए क्यों जरूरी है गांधी सागर
आज जब देश के कई शहरों में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है, ऐसे में गांधी सागर जैसे क्षेत्र पर्यावरण के लिए जीवनदायिनी भूमिका निभा रहे हैं। यह न केवल ऑक्सीजन का बड़ा स्रोत है, बल्कि जैव विविधता, जल संरक्षण और जलवायु संतुलन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
यदि ऐसे जंगलों का संरक्षण किया जाए, तो भविष्य में प्रदूषण की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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