गांधीसागर बर्ड वॉचिंग सेंटर: 35 प्रजातियों ने खोली इको-टूरिज्म की नई दिशा
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
13 अप्रैल 2026, (अपडेटेड 13 अप्रैल 2026, 10:54 पूर्वाह्न IST)

मंदसौर। चंबल नदी के शांत और प्राकृतिक परिवेश में स्थित गांधीसागर अब एक नई पहचान की ओर बढ़ रहा है। यहां रविवार को आयोजित बर्ड वॉक के बाद यह साफ हो गया है कि यह क्षेत्र भविष्य में एक बड़े गांधीसागर बर्ड डेस्टिनेशन के रूप में उभर सकता है। महज दो घंटे के भीतर 35 पक्षी प्रजातियों की पहचान ने इस संभावना को और मजबूत कर दिया है।

अटावी-बर्डिंग भारत और मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों, प्रकृति प्रेमियों, छात्रों और फोटोग्राफर्स ने उत्साह के साथ भाग लिया। सुबह की ठंडी हवा, जलाशय का शांत वातावरण और पक्षियों की मधुर आवाजों ने इस अनुभव को बेहद खास बना दिया।

प्राकृतिक संपदा का जीवंत उदाहरण

गांधीसागर क्षेत्र लंबे समय से अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब यह व्यवस्थित रूप से पहचान बना रहा है। बर्ड वॉक के दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को विभिन्न पक्षियों की पहचान, उनकी आवाज, उड़ान शैली और रहने के स्थान के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

इस दौरान जलाशय के आसपास कई प्रकार के जलीय पक्षी, प्रवासी पक्षी और स्थानीय प्रजातियां देखी गईं। विशेषज्ञों के अनुसार, यहां 250 से अधिक पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं, जो इसे एक आदर्श गांधीसागर बर्ड  हॉटस्पॉट बनाती हैं।

दो घंटे की बर्ड वॉक, बड़ा संदेश

रविवार को आयोजित बर्ड वॉक सिर्फ एक इवेंट नहीं था, बल्कि यह प्रकृति संरक्षण और जागरूकता का एक सशक्त माध्यम बनकर सामने आया। दो घंटे के भीतर 35 प्रजातियों की पहचान इस बात का प्रमाण है कि यदि इस क्षेत्र को सही तरीके से विकसित किया जाए, तो यह देश के प्रमुख बर्ड वॉचिंग स्थलों में शामिल हो सकता है।

प्रतिभागियों ने बताया कि उन्होंने पहली बार इतने करीब से पक्षियों को देखा और उनके व्यवहार को समझा। यह अनुभव उनके लिए ज्ञानवर्धक और रोमांचक दोनों रहा।

इको-टूरिज्म को मिलेगा नया आधार

गांधीसागर बर्ड वॉचिंग सेंटर के रूप में इस क्षेत्र का विकास इको-टूरिज्म को नई दिशा देगा। इससे न केवल पर्यटक आकर्षित होंगे, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

पर्यटन से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि यहां इंफ्रास्ट्रक्चर, गाइड्स और सुविधाओं का विकास किया जाए, तो यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना सकता है।

स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर

इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। गाइड, टूर ऑपरेटर, नेचुरलिस्ट और फोटोग्राफी जैसे क्षेत्रों में युवाओं को नए विकल्प मिलेंगे।

यदि नियमित रूप से बर्ड वॉक और अन्य गतिविधियां आयोजित की जाती हैं, तो यह क्षेत्र आर्थिक रूप से भी विकसित हो सकता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी आय के स्रोत बढ़ेंगे।

हर रविवार आयोजित होगी बर्ड वॉक

आयोजकों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में हर रविवार को नियमित रूप से बर्ड वॉक आयोजित की जाएगी। इससे लोगों की भागीदारी बढ़ेगी और धीरे-धीरे यह एक स्थायी गतिविधि बन जाएगी।

इसी के साथ इंदौर और भोपाल में भी समानांतर रूप से बर्ड वॉक आयोजित की जा रही है, जिससे पूरे मध्यप्रदेश में इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिल रहा है।

संरक्षण और जागरूकता पर जोर

गांधीसागर में शुरू हुई यह पहल केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के प्रति लोगों को जागरूक करना है।

विशेषज्ञों ने बताया कि यदि स्थानीय समुदाय इस अभियान से जुड़ता है, तो पक्षियों के प्राकृतिक आवास को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। गांधीसागर बर्ड पहल इस दिशा में एक मजबूत कदम है, जो आने वाले समय में बड़ा बदलाव ला सकती है।


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Aakash Sharma
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