Gandhi Sagar Drug Factory पर पुलिस का धावा, 13 करोड़ की ड्रग्स जब्त
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
08 फ़रवरी 2026, (अपडेटेड 08 फ़रवरी 2026, 11:56 पूर्वाह्न IST)

गांधी सागर(MP Neemuch News) न्यूज़। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में नशे के सौदागरों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया गया है। गरोठ थाना पुलिस और जिला पुलिस बल ने एक संयुक्त और साहसिक ऑपरेशन में गांधी सागर बांध के बैकवाटर क्षेत्र में संचालित हो रही एक अवैध Gandhi Sagar Drug Factory का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने न केवल करोड़ों की एमडी (MD) ड्रग्स जब्त की है, बल्कि नशे के उस पूरे सिंडिकेट को भी बेनकाब कर दिया है जो खेतों की आड़ में ‘सफेद मौत’ का सामान तैयार कर रहा था। यह ऑपरेशन क्षेत्र में नशा मुक्ति की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

8 थानों का अभेद्य घेरा और रातभर चला सर्च ऑपरेशन

क्षेत्र में सक्रिय मादक पदार्थों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए मुखबिर से मिली पुख्ता और सटीक जानकारी के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हेमलता कुरील के नेतृत्व में शनिवार शाम को इस विशेष मिशन की शुरुआत हुई। यह Gandhi Sagar Drug Factory भौगोलिक दृष्टि से इतनी दुर्गम और एकांत जगह पर स्थित थी कि पुलिस को अपनी हर चाल बेहद गोपनीय रखनी पड़ी। ऑपरेशन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए जिले के 8 अलग-अलग थानों—गरोठ, शामगढ़, भानपुरा सहित अन्य—से भारी पुलिस बल बुलाया गया था।

शनिवार रात करीब 7 बजे जब पूरा इलाका अंधेरे की आगोश में था, तब पुलिस की विभिन्न टीमों ने फैक्ट्री को चारों तरफ से घेर लिया। यह कार्रवाई रविवार सुबह तक निरंतर चलती रही। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के चलते पुलिस ने पूरे ऑपरेशन एरिया को सील कर दिया था और मीडियाकर्मियों तक को घटना स्थल से 2 किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया था, ताकि किसी भी तरह की सूचना लीक न हो और अपराधी भाग न सकें।

Gandhi Sagar Drug Factory से 13 करोड़ की ड्रग्स बरामद

जब पुलिस की टीम ने फैक्ट्री के भीतर प्रवेश किया, तो वहां का नजारा देखकर अनुभवी अधिकारी भी दंग रह गए। आबादी से मीलों दूर, लहलहाते खेतों के बीच एक साधारण दिखने वाले मकान को पूरी तरह से एक अत्याधुनिक ड्रग्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में तब्दील कर दिया गया था। इस Gandhi Sagar Drug Factory से पुलिस ने 12.50 किलो शुद्ध क्रूड एमडी ड्रग्स बरामद की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अनुमानित कीमत 13 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।

तलाशी के दौरान पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में मशीनरी और उपकरण भी जब्त किए हैं। इसमें बड़ी गैस भट्टियां, रिफाइनिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले स्टील के लंबे पाइप, हाई-टेक केमिकल मिक्सिंग मशीनें और दर्जनों बड़े ड्रम शामिल हैं। इन उपकरणों की उपस्थिति से स्पष्ट है कि यहाँ बहुत बड़े पैमाने पर ड्रग्स का उत्पादन किया जा रहा था।

केमिकल का विशाल जखीरा: 50 करोड़ तक पहुँच सकता था कारोबार

पुलिस की फॉरेंसिक टीम और जांच अधिकारियों ने Gandhi Sagar Drug Factory के अंदर से घातक रसायनों का एक विशाल जखीरा बरामद किया है। जब्त किए गए रसायनों में मुख्य रूप से एसीटोन, टॉल्यून, हाइड्रोक्लोरिक एसिड, सोडियम सल्फेट, सोडियम कार्बोनेट, ब्रोमिन वाटर और एथेनॉल शामिल हैं। पुलिस विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह सारा स्टॉक प्रोसेस हो जाता, तो इससे लगभग 50 किलो तैयार एमडी ड्रग्स बनाई जा सकती थी। इस तैयार माल की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 50 करोड़ रुपये के पार होती। यह तथ्य चौंकाने वाला है कि यह फैक्ट्री पिछले कई महीनों से बिना किसी की नजर में आए लगातार संचालित हो रही थी।

दो आरोपी गिरफ्तार, मास्टरमाइंड की तलाश में छापेमारी

पुलिस ने मौके से दो आरोपियों को घेराबंदी कर गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान सूरजनी गांव के निवासी दीपक लोहार सिकलीगर (32) और सुमित लोहार (19) के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे इस Gandhi Sagar Drug Factory में मुख्य रूप से ड्रग्स निर्माण और उसकी पैकेजिंग का काम देख रहे थे। हालांकि, इस पूरे काले कारोबार का मास्टरमाइंड विक्रम सिकलीगर अंधेरे और झाड़ियों का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और फरार सरगना की तलाश के लिए पुलिस की 5 विशेष टीमें गठित की गई हैं।

नशे के गढ़ पर पुलिस का अंतिम प्रहार

यह कार्रवाई मंदसौर पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि यह इलाका लंबे समय से मादक पदार्थों की तस्करी के लिए संवेदनशील रहा है। गौरतलब है कि इससे पहले जनवरी 2025 में भी गरोठ के खारखेड़ा गांव में एक संतरे के बगीचे में इसी तरह की ड्रग्स फैक्ट्री का खुलासा हुआ था। अब इस Gandhi Sagar Drug Factory के पकड़े जाने से यह साफ हो गया है कि ड्रग माफिया अब तस्करी के बजाय स्थानीय स्तर पर ही उत्पादन की नई और खतरनाक रणनीति अपना रहे हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यहाँ तैयार होने वाली ड्रग्स की सप्लाई किन बड़े शहरों या अंतरराष्ट्रीय बाजारों में की जा रही थी।


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Aakash Sharma
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