नीमच, 6 जुलाई। कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत मंगलवार, 7 जुलाई को नीमच जिले के हर्कियाखाल बालाजी मंदिर पहुंचेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वे यहां भगवान बालाजी के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे। राज्यपाल के प्रस्तावित दौरे को देखते हुए जिला पुलिस और प्रशासन ने आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है।
प्राप्त कार्यक्रम के अनुसार राज्यपाल का यह दौरा पूर्व निर्धारित है। उनके आगमन के दौरान मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि दर्शन व्यवस्था और कार्यक्रम सुचारु रूप से संचालित हो सके।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह पहुंचेगे मंदिर
कार्यक्रम के मुताबिक कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत मंगलवार सुबह 8 बजे नागदा से प्रस्थान करेंगे। इसके बाद वे सुबह 10:30 बजे नीमच जिले के हर्कियाखाल स्थित श्री बालाजी मंदिर पहुंचेंगे।
मंदिर में पहुंचने के बाद राज्यपाल भगवान बालाजी के दर्शन करेंगे तथा विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय प्रशासन आवश्यक व्यवस्थाओं की निगरानी करेगा।
पूजा-अर्चना के बाद नाथद्वारा के लिए रवाना होंगे
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मंदिर में पूजा-अर्चना संपन्न करने के बाद राज्यपाल सुबह 11 बजे हर्कियाखाल से नाथद्वारा के लिए प्रस्थान करेंगे। उनका मंदिर प्रवास निर्धारित समय के अनुसार रहेगा। प्रशासन द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार यात्रा का पूरा कार्यक्रम समयबद्ध रखा गया है।
पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर
राज्यपाल के आगमन को देखते हुए जिला पुलिस एवं प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी हैं। मंदिर परिसर तथा आसपास के क्षेत्रों में आवश्यक सुरक्षा प्रबंध किए जा रहे हैं।
प्रशासन का उद्देश्य राज्यपाल के कार्यक्रम को सुरक्षित एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराना है। इसके लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
हर्कियाखाल बालाजी मंदिर में बढ़ सकती है श्रद्धालुओं की आवाजाही
राज्यपाल के आगमन के मद्देनजर हर्कियाखाल बालाजी मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रहने की संभावना है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन द्वारा व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित रखने के लिए आवश्यक समन्वय किया जा रहा है। श्रद्धालुओं से भी अपेक्षा की जा रही है कि वे मंदिर परिसर में प्रशासन द्वारा किए गए प्रबंधों का पालन करें, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
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