मणिकर्णिका घाट की परंपरा: चिता भस्म पर ‘94’ क्यों लिखा जाता है, जानिए इसका आध्यात्मिक रहस्य
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
04 नवम्बर 2025, (अपडेटेड 04 नवम्बर 2025, 5:22 अपराह्न IST)

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वाराणसी (काशी)। मणिकर्णिका घाट—जहाँ मृत्यु नहीं, मोक्ष का द्वार खुलता है। यहाँ एक ऐसी परंपरा है, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं। जब किसी शव की चिता पूरी तरह शांत हो जाती है, तब मुखाग्नि देने वाला व्यक्ति चिता की भस्म पर ‘94’ अंक लिखता है। इस रहस्य को केवल खांटी बनारसी और घाट के अनुभवी शवदाहक ही जानते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, मनुष्य के जीवन में 100 शुभ कर्म माने गए हैं। इनमें से 94 कर्म उसके अपने अधीन होते हैं — जैसे सत्य बोलना, अहिंसा, दान, सेवा, संयम, भक्ति आदि। लेकिन 6 कर्म ब्रह्मा के अधीन माने जाते हैं — हानि, लाभ, जीवन, मरण, यश और अपयश।

कहा जाता है कि जब चिता की अग्नि बुझती है, तो व्यक्ति के ये 94 कर्म भस्म हो जाते हैं। शेष 6 कर्म आत्मा के साथ अगले जन्म तक चलते हैं। यही कारण है कि चिता की राख पर ‘94’ लिखा जाता है — जो यह संकेत देता है कि अब केवल वे 6 कर्म ही शेष हैं, जो अगले जीवन का मार्ग तय करेंगे।

गीता में भी कहा गया है कि मृत्यु के बाद मन पाँच ज्ञानेन्द्रियों के साथ जाता है — मन और पाँच इन्द्रियाँ मिलकर छह हो जाती हैं। यही “6 कर्म” आगे के जन्म का कारण बनते हैं।

इस परंपरा के पीछे यह भाव निहित है कि —

“विदा यात्री, तेरे 94 कर्म भस्म हुए, शेष 6 तेरे साथ जा रहे हैं।”

यह आस्था न केवल मृत्यु का दार्शनिक अर्थ बताती है, बल्कि जीवन में सत्कर्म करने की प्रेरणा भी देती है।

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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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