नीमच: क्या ‘खाकी’ ने ही ले ली ‘खाकी’ की जान? मौत से पहले वायरल हुआ वो 4 पन्नों वाला लेटर, हिल गई ऊपर तक की कुर्सी!
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
08 फ़रवरी 2026, (अपडेटेड 08 फ़रवरी 2026, 10:03 अपराह्न IST)

नीमच। नीमच पुलिस लाइन कनावटी से उठी एक दर्दनाक चीख आखिरकार हमेशा के लिए खामोश हो गई। पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे आरक्षक होशियार सिंह अहीर (50) ने दम तोड़ दिया है। यह केवल एक पुलिसकर्मी की Neemuch Constable Death नहीं है, बल्कि यह खाकी के भीतर पनप रहे कथित भ्रष्टाचार, मानसिक प्रताड़ना और सिस्टम की उस चुप्पी पर एक बहुत बड़ा तमाचा है, जिसने एक बेबस जवान को मौत के गले लगाने पर मजबूर कर दिया। आरक्षक की मौत के बाद पूरे जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है, और अब विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मौत से पहले ‘सिस्टम’ का पर्दाफाश: 4 पन्नों का शिकायती पत्र

आरक्षक होशियार सिंह की मृत्यु के साथ ही उनका चार पन्नों का एक शिकायती पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह पत्र नहीं, बल्कि विभाग के भीतर चल रहे कथित काले कारनामों का एक कच्चा चिट्ठा है। मृतक आरक्षक ने यह पत्र डीआईजी, डीजीपी और नीमच एसपी के नाम लिखा था। पत्र की इबारत इतनी तीखी है कि पढ़ने वाले के रोंगटे खड़े हो जाएं।

पत्र में आरक्षक ने साफ शब्दों में लिखा था—

“मेरा शिकायत पत्र वायरल हो गया है, विभाग में भारी भ्रष्टाचार है। मुझे अपने ही विभाग के लोग मार सकते हैं।”

यह पंक्तियाँ साबित करती हैं कि आरक्षक को अपनी मौत का अहसास पहले ही हो चुका था और उसने उच्च अधिकारियों को आगाह भी किया था, लेकिन अफसोस कि Neemuch Constable Death को टाला नहीं जा सका।

पद, पीसीआर और जिम… सब ‘बिकते’ हैं!

वायरल हुए इस पत्र में आरक्षक ने विभाग के कुछ अधिकारियों पर बेहद गंभीर आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। पत्र में उल्लेख किया गया है कि विभाग में पद और सुविधाएं मेरिट या मेहनत के दम पर नहीं, बल्कि ‘पैसों’ के दम पर दी जा रही हैं। आरक्षक ने आरोप लगाया कि थाना पोस्टिंग, पीसीआर ड्यूटी और यहाँ तक कि जिम की सुविधाएं भी पैसों के लेनदेन से जुड़ी हैं।

होशियार सिंह ने पत्र में अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए लिखा था कि शिकायत करने के बाद उनकी जान को खतरा बढ़ गया था। यह भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाई गई एक ऐसी आवाज थी जिसे सुनने के बजाय शायद दबाने की कोशिश की गई, जिसका परिणाम आज हमारे सामने एक दुखद Neemuch Constable Death के रूप में है।

अस्पताल में मार्मिक दृश्य: हरियाणा से था परिवार

Neemuch Constable Death की खबर मिलते ही ज्ञानोदय अस्पताल में गमगीन माहौल हो गया। मृतक का परिवार मूलतः हरियाणा का रहने वाला है। अस्पताल के गलियारों में आरक्षक की पत्नी और बेटी की चित्कार सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे बार-बार सिस्टम को कोस रहे हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए सीएसपी किरण चौहान अस्पताल पहुँचीं और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस बल की भारी तैनाती के बीच परिजनों को मीडिया से दूर रखा गया है, जो कहीं न कहीं विभाग की घबराहट को भी दर्शाता है।

हर्निया का ऑपरेशन, छुट्टी की गुहार और वो खौफनाक कदम

आरक्षक होशियार सिंह के करीबियों का कहना है कि कुछ समय पहले ही उनका हर्निया का ऑपरेशन हुआ था। शारीरिक अस्वस्थता के कारण वे अवकाश पर चल रहे थे। रविवार को वे अपनी छुट्टी बढ़वाने के लिए पुलिस कंट्रोल रूम पहुँचे थे। बताया जा रहा है कि वहां किसी बात को लेकर उन्हें काफी खिन्न किया गया या मानसिक रूप से ठेस पहुँचाई गई, जिसके तुरंत बाद उन्होंने वहीं जहरीला पदार्थ (Poison) गटक लिया।

जहर खाने के बाद वे स्वयं तड़पते हुए कंट्रोल रूम के भीतर पहुँचे थे। वहां से उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन शरीर में जहर फैलने और मानसिक तनाव के भारी बोझ के कारण इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। कैंट थाना प्रभारी नीलेश अवस्थी ने Neemuch Constable Death की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की मर्ग जांच की जा रही है।

पुलिस प्रशासन की चुप्पी और जवाबदेही

इस Neemuch Constable Death घटना ने मध्य प्रदेश पुलिस के आला अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जब आरक्षक ने पहले ही डीजीपी और एसपी को अपनी जान के खतरे और भ्रष्टाचार के बारे में सूचित कर दिया था, तो उस पर संज्ञान क्यों नहीं लिया गया? क्या यह Neemuch Constable Death एक ‘संस्थागत हत्या’ (Institutional Murder) है?

जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी फिलहाल ‘जांच चल रही है’ का रटा-रटाया जवाब दे रहे हैं, लेकिन आरक्षक के उन चार पन्नों का जवाब देना अब विभाग के लिए भारी पड़ेगा। क्या उन दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होगी जिनके नाम आरक्षक ने पत्र में लिखे हैं? या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

The Times of MP इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करता है ताकि मृतक आरक्षक होशियार सिंह के परिवार को न्याय मिल सके और पुलिस विभाग की छवि को धूमिल करने वाले भ्रष्ट चेहरों का पर्दाफाश हो सके।


यह भी पढ़ें: नीमच पुलिस महकमे में हड़कंप: आरक्षक ने संदिग्ध परिस्थितियों में गटका Poison, तड़पते हुए खुद पहुंचा कंट्रोल रूम

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Aakash Sharma
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