नीमच। नीमच जिले में सरकारी पट्टे की कृषि भूमि से जुड़े करीब 17 साल पुराने जमीन बेचने के मामले में दुल्लाखेड़ा निवासी मधु बाई और उनके बेटे देवेंद्र मेघवाल ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर रजिस्ट्री निरस्त करने और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। परिवार का आरोप है कि ग्राम जेतपुरा स्थित उनकी जमीन को फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए दूसरे व्यक्ति के नाम बेच दिया गया।
पीड़ित परिवार के अनुसार, मामला वर्ष 2007 का है और जमीन ग्राम जेतपुरा के खसरा नंबर 28, रकबा 0.50 हेक्टेयर से संबंधित है। परिवार का कहना है कि यह कृषि भूमि उनके दिवंगत पिता स्व. बाबूलाल मेघवाल को शासन की ओर से पट्टे पर मिली थी।
परिवार ने आरोप लगाया है कि जमीन को बेचने के लिए फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कराई गई। इसके बाद जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई। अब करीब 17 साल बाद परिवार ने प्रशासन के समक्ष इस मामले में कार्रवाई की मांग उठाई है।
17 साल पुराने मामले में फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी का आरोप
पीड़ित मां-बेटे के अनुसार, गिरदोड़ा निवासी मांगूसिंह राजपूत ने 9 अक्टूबर 2007 को कथित तौर पर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी बनवाई। परिवार का आरोप है कि इसी दस्तावेज के आधार पर बाद में जमीन की बिक्री की गई। बताया गया है कि 16 नवंबर 2007 को उक्त जमीन करीब 1.40 लाख रुपए में भरत कुमार बैरागी के नाम बेच दी गई।
परिवार का आरोप है कि पावर ऑफ अटॉर्नी में किसी व्यक्ति के नाम या हस्ताक्षर की नकल अथवा धोखाधड़ी के जरिए संपत्ति पर अधिकार जताया गया। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है।
जमीन की रजिस्ट्री को लेकर उठाए सवाल
मधु बाई और देवेंद्र मेघवाल का कहना है कि संबंधित जमीन सरकारी पट्टे की थी। परिवार के अनुसार, ऐसी जमीन की बिक्री के लिए कलेक्टर की अनुमति आवश्यक थी। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि आवश्यक अनुमति के बिना ही जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई और इसके बाद नामांतरण भी किया गया। परिवार ने इसी आधार पर पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि सरकारी पट्टे की जमीन को निर्धारित प्रक्रिया और आवश्यक अनुमति के बिना बेचा गया है, तो संबंधित दस्तावेजों और रजिस्ट्री की जांच की जानी चाहिए।
कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर रखी मांग
मधु बाई और देवेंद्र मेघवाल ने मामले को लेकर कलेक्टर कार्यालय में आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित परिवार चाहता है कि वर्ष 2007 में हुई जमीन की रजिस्ट्री की जांच कर उसे निरस्त किया जाए। परिवार ने कथित फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी की भी जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही जिन लोगों की भूमिका इस पूरे मामले में सामने आए, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
पीड़ित परिवार की प्रमुख मांगें
पीड़ित मां-बेटे द्वारा प्रशासन के समक्ष मुख्य रूप से ये मांगें रखी गई हैं—
- वर्ष 2007 में हुई जमीन की रजिस्ट्री की जांच की जाए।
- कथित फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी की जांच कराई जाए।
- सरकारी पट्टे की जमीन की बिक्री में आवश्यक अनुमति की जांच हो।
- जमीन का नामांतरण किस आधार पर किया गया, इसकी जांच की जाए।
- विवादित रजिस्ट्री को निरस्त किया जाए।
- मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
खसरा नंबर 28 की 0.50 हेक्टेयर जमीन बेचने का मामला
यह पूरा विवाद ग्राम जेतपुरा स्थित खसरा नंबर 28 की 0.50 हेक्टेयर कृषि भूमि से जुड़ा बताया गया है। पीड़ित परिवार के अनुसार, जमीन मूल रूप से उनके दिवंगत पिता स्व. बाबूलाल मेघवाल को शासन की ओर से पट्टे पर मिली थी। परिवार का आरोप है कि बाद में इस जमीन को पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से बेच दिया गया। आवेदन में 9 अक्टूबर 2007 को पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार किए जाने और 16 नवंबर 2007 को करीब 1.40 लाख रुपए में बिक्री किए जाने का उल्लेख किया गया है।
मामले में अब परिवार ने प्रशासन से दस्तावेजों की जांच और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई की मांग की है।
17 साल बाद उठे मामले में जांच पर नजर
करीब 17 साल पुराने इस मामले में अब पीड़ित पक्ष द्वारा प्रशासन के सामने शिकायत रखने के बाद आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परिवार ने रजिस्ट्री निरस्त कराने के साथ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
फिलहाल, उपलब्ध शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर ही मामला सामने आया है। कथित फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी, रजिस्ट्री और नामांतरण की वैधता सहित अन्य बिंदुओं पर संबंधित दस्तावेजों और सक्षम प्रशासनिक अथवा कानूनी जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
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