नीमच में कुदरत का कहर: भारी ओलावृष्टि से 100% फसलें खाक, मुआवजे के लिए हाईवे पर डटे किसान
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
02 फ़रवरी 2026, (अपडेटेड 02 फ़रवरी 2026, 3:12 अपराह्न IST)

नीमच। मध्य प्रदेश के नीमच जिले में कुदरत ने अन्नदाता पर ऐसा प्रहार किया है कि उनकी साल भर की मेहनत मिट्टी में मिल गई है। पिछले 24 घंटों में आई भीषण प्राकृतिक आपदा और नीमच ओलावृष्टि समाचार ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। सफेद आफत बनकर गिरे ओलों ने अफीम, गेहूं, लहसुन और चिया जैसी नकदी फसलों को पूरी तरह मटियामेट कर दिया है। इस भारी बर्बादी से आक्रोशित होकर 10 से अधिक गांवों के किसानों ने महू-नसीराबाद हाईवे पर चक्काजाम कर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

आसमान से बरसी बर्बादी: खेतों में बिछी सफेद चादर

नीमच जिले के किसानों के लिए यह सीजन उम्मीदों भरा था, लेकिन बीती रात हुए मौसम में बदलाव ने सब कुछ बदल दिया। नीमच ओलावृष्टि समाचार मिलते ही जब किसान अपने खेतों पर पहुंचे, तो वहां का नजारा देख उनकी रूह कांप गई। ओलों की मार इतनी भीषण थी कि अफीम के डोडे फट गए और गेहूं की बालियां जमीन चूमने लगीं। किसानों का कहना है कि अब खेतों में मवेशियों के चारे लायक भी कुछ शेष नहीं बचा है।

इन फसलों पर पड़ा 100% असर

जिले में हुई इस तबाही ने रबी की लगभग सभी फसलों को अपनी चपेट में लिया है। नीमच ओलावृष्टि समाचार के अनुसार सबसे ज्यादा नुकसान निम्नलिखित फसलों को हुआ है:

  • अफीम और लहसुन: नीमच की लाइफलाइन कही जाने वाली ये फसलें पूरी तरह गल चुकी हैं।

  • तिलहन और अनाज: सरसों, अलसी, गेहूं, चना और जो की फसलें ओलों की चोट से टूट गई हैं।

  • मसाले: मेथी, धनिया और कलौंजी में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है।

  • अन्य फसलें: चिया, किनवा और मसूर जैसी फसलों में शत-प्रतिशत नुकसान का दावा किया जा रहा है।

हाईवे पर आक्रोश: “साहब, अब हम क्या खाएंगे?

अपनी आंखों के सामने मेहनत की कमाई को उजड़ता देख किसानों का धैर्य टूट गया। भंवरासा, कचोली, खेताखेड़ा, केलुखेड़ा, बामनिया, पालसोड़ा, पिपलियाव्यास और विशन्या जैसे कई गांवों के किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ महू-नसीराबाद हाईवे पर भंवरासा फंटे पर जमा हो गए।

नीमच ओलावृष्टि समाचार के बीच किसानों ने करीब आधे घंटे तक हाईवे को पूरी तरह बंद रखा। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि प्रशासन बिना किसी जटिल कागजी कार्रवाई और ‘गिरदावरी’ के पुराने तरीकों को छोड़कर तुरंत अंतरिम राहत राशि और फसल बीमा का लाभ दे। किसानों का कहना है कि कर्ज लेकर बोई गई फसल अब कर्ज चुकाने लायक भी नहीं रही।

प्रशासनिक अधिकारियों का जमावड़ा और आश्वासन

जाम की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नवल सिंह सिसोदिया, अपर कलेक्टर बी एस क्लेश और सीएसपी किरण चौहान ने किसानों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनीं। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि राजस्व विभाग की टीमें तत्काल खेतों का दौरा कर सर्वे कार्य शुरू करेंगी और नुकसान की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।

प्रशासनिक समझाइश और त्वरित कार्रवाई के भरोसे के बाद किसानों ने जाम खोला, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

किसानों की मांग: विशेष राहत पैकेज की दरकार

क्षेत्र के किसान नेताओं का कहना है कि नीमच में आई यह आपदा सामान्य नहीं है। नीमच ओलावृष्टि समाचार केवल एक खबर नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य पर लगा ग्रहण है। सरकार को चाहिए कि अफीम किसानों के ‘पट्टे’ बचाने और फसल बीमा की जटिल शर्तों को शिथिल कर सीधे बैंक खातों में सहायता राशि प्रदान करे।


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Aakash Sharma
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