Mobile Recovery: एक कॉल ने बदल दी 160 लोगों की तकदीर, जानिए नीमच पुलिस के ‘हर्ष’ की इनसाइड स्टोरी
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
19 दिसम्बर 2025, (अपडेटेड 19 दिसम्बर 2025, 10:22 अपराह्न IST)

नीमच (Mobile Recovery स्पेशल रिपोर्ट): कल्पना कीजिए… आपका हजारों रुपये का महंगा मोबाइल महीनों पहले बाजार की भीड़ में कहीं गुम हो गया था। आपने उम्मीद छोड़ दी थी, नया फोन ले लिया था और पुराने फोन को एक “बुरे सपने” की तरह भूल चुके थे। लेकिन अचानक, 19 दिसंबर की सुबह आपके पास पुलिस थाने से एक कॉल आती है- “आपका फोन मिल गया है, आकर ले जाइये।”

क्या आपको यकीन होगा? शायद नहीं। लेकिन नीमच में शुक्रवार को ठीक ऐसा ही हुआ। शहर के 160 लोगों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। Mobile Recovery के इस मिशन को पुलिस ने नाम दिया था- ‘अभियान हर्ष’। लेकिन इस हर्ष (खुशी) के पीछे सायबर सेल की रातों की नींद और एक गहरे तकनीकी जाल की कहानी छिपी है।

सन्नाटे में काम करती रही ‘सायबर टीम’

जब आप सो रहे थे, तब नीमच पुलिस की सायबर सेल की स्क्रीन्स जगमगा रही थीं। पुलिस अधीक्षक (SP) श्री अंकित जायसवाल ने एक ‘सीक्रेट मिशन’ की तरह इस ऑपरेशन को शुरू किया था। शहर में मोबाइल चोरी और गुम होने की घटनाएं आम हो रही थीं, लेकिन पुलिस खामोश थी—क्योंकि वे एक बड़े प्रहार की तैयारी कर रहे थे।

शुक्रवार को जब एसपी ऑफिस के हॉल में टेबल पर 160 स्मार्टफोन्स की कतार लगी, तो नजारा देखने लायक था। 26 लाख रुपये से ज्यादा की कीमत के ये वो फोन थे, जो नीमच से गायब होकर हरियाणा की गलियों, दिल्ली के बाजारों, राजस्थान के रेगिस्तानों और उत्तर प्रदेश के गांवों तक पहुंच चुके थे। Mobile Recovery की टीम ने डिजिटल फुटप्रिंट्स का पीछा किया और पाताल से भी ये फोन ढूंढ निकाले।

26 लाख का ‘खजाना’ और लोकेशन का चक्रव्यूह

इस ऑपरेशन की कमान संभाल रहे थे सायबर सेल प्रभारी प्रधान आरक्षक प्रदीप शिन्दे। उनकी टीम ने CEIR (Central Equipment Identity Register) पोर्टल को अपना हथियार बनाया। जैसे ही किसी चोर या अनजान व्यक्ति ने गुम मोबाइल में नई सिम डाली, पुलिस के रडार पर ‘लाल बत्ती’ जल उठी।

रिकवर किए गए मोबाइलों का गणित चौंकाने वाला है:

  • सबसे सस्ता फोन: 8 हजार रुपये।

  • सबसे महंगा फोन: 65 हजार रुपये (प्रीमियम सेगमेंट)।

  • कुल रिकवरी: 26,21,500/- (छब्बीस लाख इक्कीस हजार पांच सौ रुपये)।

यह केवल लोहे और कांच के टुकड़े नहीं थे, यह 160 लोगों का भरोसा था जिसे पुलिस ने Mobile Recovery के जरिए वापस जीता है।

साल 2025: जब पुलिस ने तोड़े रिकॉर्ड

कहानी सिर्फ आज की नहीं है। साल 2025 की शुरुआत से ही नीमच पुलिस ‘मिशन मोड’ में है। एसपी श्री अंकित जायसवाल और एएसपी श्री नवलसिंह सिसौदिया की जोड़ी ने अब तक (1 जनवरी से 19 दिसंबर तक) कुल 360 मोबाइल रिकवर किए हैं, जिनकी कुल कीमत 71 लाख रुपये के करीब है। यह आंकड़ा बताता है कि अपराधी चाहे कितने भी शातिर क्यों न हों, पुलिस की ‘तीसरी आंख’ (तकनीक) से बच नहीं सकते।

वो चेहरे, जिन्होंने मुमकिन किया यह मिशन

इस सस्पेंस भरी कहानी के असली हीरो वो पुलिसकर्मी हैं जो पर्दे के पीछे रहे। Mobile Recovery में प्रधान आरक्षक प्रदीप शिन्दे, आदित्य गौड़, आरक्षक लखन प्रतापसिंह, कुलदीपसिंह, विश्वेन्द्रसिंह और हितेश खटीक ने जो सर्विलांस का जाल बुना, उसी का नतीजा है कि आज 160 चेहरों पर मुस्कान है।

सावधानी: अगला नंबर आपका न हो

इस कहानी का अंत सुखद है, लेकिन शुरुआत आपकी लापरवाही से हो सकती है। पुलिस ने चेतावनी दी है—भीड़भाड़ में सतर्क रहें। और अगर फिर भी फोन गुम हो जाए, तो CEIR पोर्टल पर तुरंत रिपोर्ट करें। क्योंकि आपकी एक रिपोर्ट पुलिस को वो सुराग देती है, जिससे Mobile Recovery का रास्ता खुलता है।

आज नीमच पुलिस ने साबित कर दिया है कि खाकी वर्दी सिर्फ कानून नहीं चलाती, बल्कि खोई हुई खुशियां भी लौटाती है।


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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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