Leopard Attack: नीमच के मंदिर में घुसा तेंदुआ, जाली बंद कर युवक ने दी मौत को मात!
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
08 मार्च 2026, (अपडेटेड 08 मार्च 2026, 11:26 पूर्वाह्न IST)

नीमच न्यूज़ : मध्य प्रदेश के नीमच जिले में इन दिनों भीषण गर्मी के साथ-साथ दहशत का पारा भी चढ़ा हुआ है। कुकड़ेश्वर-रामपुरा वन क्षेत्र से सटे इलाकों में अब जंगली जानवरों का खौफ सीधे इंसानी बस्तियों और आस्था के केंद्रों तक पहुँच चुका है।

शनिवार शाम को मां शेरावाली खोवाले मंदिर परिसर का एक ऐसा चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है, जिसने पूरे वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की नींद उड़ा दी है। इस ताज़ा तेंदुए का हमला (Leopard Attack) की घटना ने साबित कर दिया है कि इंसान और वन्यजीवों के बीच का संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ ले चुका है। गनीमत यह रही कि मंदिर में मौजूद एक युवक की फुर्ती ने एक बहुत बड़ी अनहोनी को टाल दिया।

मौत और जिंदगी के बीच सिर्फ एक लोहे की जाली

प्राप्त जानकारी और वायरल हो रहे सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, यह पूरी घटना उस वक्त घटी जब मंदिर परिसर में भीड़ नहीं थी। उस समय केवल एक व्यक्ति ही मौजूद था मंदिर में, जो दर्शन करने आया था 

तभी अचानक एक विशालकाय तेंदुआ मंदिर के मुख्य द्वार की तरफ से अंदर दाखिल हुआ। जैसे ही युवक की नज़र सामने खड़े इस खूंखार जानवर पर पड़ी, उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। लेकिन, इस भयानक तेंदुए का हमला (Leopard Attack) की स्थिति में घबराने या पीछे हटने के बजाय, युवक ने अकल्पनीय हिम्मत का परिचय दिया। सामने खड़े तेंदुए को देखते ही उसने बिजली जैसी फुर्ती दिखाई और पास ही मौजूद लोहे की मजबूत जाली वाला गेट अपनी ओर खींचकर तुरंत बंद कर लिया।

वायरल वीडियो में यह साफ तौर पर देखा जा सकता है कि युवक के गेट बंद करते ही तेंदुए ने पूरी आक्रामकता के साथ जाली के ऊपर से उस पर झपट्टा मारने की कोशिश की। लेकिन, मजबूत लोहे की जाली बीच में आ जाने और युवक द्वारा जोर-जोर से शोर मचाने के कारण तेंदुआ अपने शिकार तक पहुँचने में नाकाम रहा। घबराहट और शोरगुल के चलते वह खूंखार जानवर वापस घने जंगल की ओर भाग खड़ा हुआ।

24 घंटे के भीतर दूसरा बड़ा हमला: दहशत में ग्रामीण

वन विभाग और नीमच प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि इलाके में तेंदुए का हमला (Leopard Attack) की यह कोई इकलौती घटना नहीं है। महज 24 घंटे के भीतर तेंदुए की सक्रियता और आक्रामकता का यह दूसरा खौफनाक रूप सामने आया है।


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इससे ठीक शुक्रवार को इसी तेंदुए (या इसी वन क्षेत्र के किसी अन्य तेंदुए) ने मंदिर के पास ही स्थित अमेरी गांव में जमकर आतंक मचाया था। तेंदुआ दिनदहाड़े एक रिहायशी घर में घुस गया और वहां मौजूद 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला नानी बाई को अपना शिकार बनाने की कोशिश की। इस जानलेवा हमले में बुजुर्ग महिला बुरी तरह लहूलुहान हो गईं। उनके चीखने-चिल्लाने की भारी आवाज सुनकर जब तक परिजन और पड़ोसी हाथों में लाठी-डंडे लेकर वहां इकट्ठा हुए, तेंदुआ उन्हें गंभीर रूप से घायल कर वहां से फरार हो चुका था।

महिला को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई है। हालांकि उनकी जान बच गई है, लेकिन लगातार हो रहे इन हमलों से अमेरी और आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों में भारी रोष और दहशत व्याप्त है।

क्यों रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं जंगली जानवर?

वन्यजीव विशेषज्ञों और स्थानीय पर्यावरणविदों का मानना है कि इस तरह के बढ़ते तेंदुए का हमला (Leopard Attack) के पीछे प्राकृतिक असंतुलन और मौसम का बहुत बड़ा हाथ है:

  1. पानी का गंभीर संकट: भीषण गर्मी के कारण जंगलों के भीतर मौजूद प्राकृतिक जल स्रोत तेजी से सूखने लगे हैं। अपनी प्यास बुझाने के लिए ये वन्यजीव मजबूरी में गांवों की ओर आ रहे हैं।

  2. आसान शिकार की तलाश: जंगलों में प्राकृतिक शिकार (हिरण, खरगोश आदि) की कमी के कारण तेंदुए अक्सर कुत्तों, बकरियों और अन्य पालतू मवेशियों को अपना निवाला बनाने के लिए इंसानी बस्तियों में घुसपैठ करते हैं।

  3. सिकुड़ते प्राकृतिक आवास: इंसानों द्वारा जंगलों के अतिक्रमण से वन्यजीवों का घर छिनता जा रहा है, जिससे वे अपना दायरा बढ़ाकर रिहायशी इलाकों तक पहुँच रहे हैं।

प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की गुहार

लगातार हो रही तेंदुए का हमला (Leopard Attack) की घटनाओं के बाद से कुकड़ेश्वर, रामपुरा और अमेरी गांव सहित आसपास के इलाकों में शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता है। लोग अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं।

खेतों में काम करने वाले किसानों और स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा दांव पर लगी है। स्थानीय निवासियों ने वन विभाग से तुरंत इलाके में पिंजरे लगाने और गश्ती टीम (Patrolling) बढ़ाने की पुरजोर मांग की है।

जब तक वन विभाग इस तेंदुए का रेस्क्यू नहीं करता, तब तक इलाके के लोगों को समूह में निकलने और रात के समय घरों के बाहर तेज रोशनी रखने की सलाह दी गई है।


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Aakash Sharma
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आकाश शर्मा मध्यप्रदेश के नीमच क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार और द टाइम्स ऑफ MP के संपादक हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया में 12 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है। लंबे समय से स्थानीय एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग, समाचार संपादन और समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने स्थानीय पत्रकारिता में व्यापक अनुभव हासिल किया है।द टाइम्स ऑफ MP के माध्यम से आकाश शर्मा नीमच, मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी कवरेज में स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था, जनसमस्याएं, नागरिक सुविधाएं, राजनीति, सामाजिक गतिविधियां, शिक्षा, कृषि, व्यापार और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।उनकी संपादकीय कार्यशैली में तथ्यपरक रिपोर्टिंग, स्रोत-आधारित जानकारी, निष्पक्ष प्रस्तुति और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता दी जाती है। संवेदनशील और अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखने तथा उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।पत्रकारिता के साथ आकाश शर्मा पिछले 4 वर्षों से पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इस भूमिका में वे कानूनी जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन में जिला उपाध्यक्ष (District Vice President) के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।अनुभव 12 वर्ष — प्रिंट मीडिया एवं पत्रकारिता का अनुभव 4 वर्ष — पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) के रूप में अनुभव संपादक — द टाइम्स ऑफ MP जिला उपाध्यक्ष — इंटरनेशनल ह्यूमन सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशनआकाश शर्मा का उद्देश्य स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण सूचनाओं को विश्वसनीय, स्पष्ट, तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाना तथा आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी मंच प्रदान करना है।विशेषज्ञता: स्थानीय पत्रकारिता | प्रिंट मीडिया | समाचार संपादन | डिजिटल पत्रकारिता | स्थानीय समाचार रिपोर्टिंग | जनहित के मुद्दे | कानूनी जागरूकता |

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