Neemuch Woman Poison Case: दूसरी शादी की सजा 9.5 लाख जुर्माना और 14 साल का बहिष्कार, समाज के तानों से तंग आकर लक्ष्मी ने निगला जहर
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
13 दिसम्बर 2025, (अपडेटेड 13 दिसम्बर 2025, 4:47 अपराह्न IST)

नीमच :21वीं सदी के भारत में जहां हम महिला सशक्तिकरण और आधुनिकता की बातें करते हैं, वहीं ग्रामीण अंचलों में आज भी खाप पंचायतों और जातीय ठेकेदारों का तुगलकी फरमान कानून व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहा है। मध्य प्रदेश के नीमच जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसे हम Neemuch Woman Poison Case के रूप में देख रहे हैं। यहां एक महिला को अपनी मर्जी से दूसरी शादी करना इतना भारी पड़ा कि समाज के ठेकेदारों ने उसका जीना मुहाल कर दिया। समाज से बहिष्कार और लाखों के जुर्माने के बोझ तले दबी 25 वर्षीय लक्ष्मी ने अंततः मौत को गले लगाने की कोशिश की।

Neemuch Woman Poison Case न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि उस सामाजिक व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न है जो आज भी महिलाओं की स्वतंत्रता को कुचलने पर आमादा है।

तानों और मानसिक प्रताड़ना की इंतहा

नीमच जिले के जावद थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम ‘नई बावल’ की रहने वाली 25 वर्षीय लक्ष्मी फिलहाल जिला अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। लक्ष्मी का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने अपने जीवन को नई दिशा देने के लिए एक साहसिक फैसला लिया और प्रवीण नामक युवक से दूसरी शादी कर ली। लेकिन, यह फैसला समाज के ठेकेदारों को नागवार गुजरा।

बीते तीन महीनों से लक्ष्मी और उसके पति प्रवीण को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। समाज से बेदखल करने की धमकी और आर्थिक दंड के बोझ ने लक्ष्मी को गहरे अवसाद (Depression) में धकेल दिया। अंततः, रोज-रोज के तानों और अपमान को सहन न कर पाने के कारण उसने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। उसकी तबीयत बिगड़ते ही पति प्रवीण उसे आनन-फानन में नीमच जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसका उपचार जारी है।

क्या है पूरा मामला ? 

Neemuch Woman Poison Case में पीड़िता के पति प्रवीण ने मीडिया को बताया कि लक्ष्मी की पहली शादी करीब सात साल पहले रामपुरा में हुई थी। लेकिन वहां रिशते नहीं चल पाए। रक्षाबंधन के पर्व पर जब लक्ष्मी अपने मायके आई, तो वहां भी उसे अस्वीकृति का सामना करना पड़ा। प्रवीण के अनुसार, लक्ष्मी के माता-पिता ने उसे अपने साथ रखने से साफ मना कर दिया।

ऐसी कठिन परिस्थिति में, जब लक्ष्मी के पास कोई सहारा नहीं था, तब उसने तीन महीने पहले प्रवीण के साथ विवाह कर लिया। यह विवाह दोनों की रजामंदी से हुआ था, लेकिन समाज के तथाकथित ‘पंचों’ को यह रास नहीं आया। प्रवीण और लक्ष्मी एक खुशहाल जीवन जीने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन समाज के नियम और पुरानी रूढ़ियां उनके आड़े आ गईं।

पंचायती फरमान: 9.5 लाख का जुर्माना और हुक्का-पानी बंद

Neemuch Woman Poison Case में सबसे चौंकाने वाला मोड़ 6 दिसंबर को आया। प्रवीण का आरोप है कि उनकी दूसरी शादी से नाराज होकर समाज के लोगों ने एक पंचायत बुलाई। इस पंचायत में करीब 500 लोग शामिल हुए। भीड़ तंत्र और समाज के प्रभाव के बीच पति-पत्नी को अपराधी की तरह पेश किया गया।

प्रवीण ने आरोप लगाया कि पंचायत में समाज के अध्यक्ष कारूलाल रैगर, उपाध्यक्ष मोहनलाल रैगर और अन्य पदाधिकारियों ने एक तुगलकी फरमान सुनाया। फैसले के मुताबिक:

  1. दंपति पर 9 लाख 50 हजार रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया गया।

  2. उन्हें 14 साल के लिए समाज से बहिष्कृत (हुक्का-पानी बंद) करने का आदेश दिया गया।

एक साधारण परिवार के लिए साढ़े नौ लाख रुपये की रकम बहुत बड़ी होती है। प्रवीण ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि वे इतना बड़ा जुर्माना भर सकें। उन्होंने पंचायत के सामने अपनी मजबूरी भी बताई, लेकिन किसी ने उनकी एक न सुनी। उल्टा, फैसला सुनाने के बाद उन पर मानसिक दबाव और बढ़ गया।

पति की गुहार: ‘जिम्मेदारों पर हो सख्त कार्रवाई’

Neemuch Woman Poison Case में अस्पताल में पत्नी का इलाज करा रहे प्रवीण की आंखों में आंसू और सिस्टम के प्रति गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था। उन्होंने कहा, “मेरी पत्नी ने यह कदम समाज के फैसले और लगातार बनाए जा रहे दबाव के कारण उठाया है। हमें जीने नहीं दिया जा रहा है। 14 साल के लिए समाज से निकालना और इतना बड़ा जुर्माना लगाना कहां का न्याय है?”

प्रवीण ने जिला प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि समाज के उन पदाधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए जिन्होंने उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रथा कई सालों से चल रही है और अब इसे रोकने की जरूरत है। प्रशासन को इस मामले में हस्तक्षेप कर पीड़ित परिवार को सुरक्षा मुहैया करानी चाहिए और Neemuch Woman Poison Case को एक नजीर के रूप में पेश करना चाहिए ताकि भविष्य में किसी और लक्ष्मी को जहर न खाना पड़े।

फिलहाल पुलिस ने Neemuch Woman Poison Case मामले को संज्ञान में ले लिया है और बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या कानून का डर इन खाप पंचायतों के फैसलों पर रोक लगा पाएगा?


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Aakash Sharma
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