नीमच। नीमच में इन दिनों आयोजित हो रहा निःशुल्क मार्शल आर्ट शिविर बच्चों और युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। खेल प्रतिभाओं को आगे लाने और विद्यार्थियों को आत्मरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस शिविर में बड़ी संख्या में खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। जूडो, कराते, ताइक्वांडो और वूशु जैसी विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए रोजाना छात्र-छात्राएं उत्साह के साथ पहुंच रहे हैं।
यह निःशुल्क मार्शल आर्ट शिविर 1 मई 2026 से नोडल खेल विद्यालय पीएम श्री शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-2, नीमच में संचालित किया जा रहा है। शिविर का आयोजन लोक शिक्षण संचालनालय मध्यप्रदेश, स्कूल शिक्षा विभाग, खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा नीमच जिला जूडो एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
शाम 5 से 7 बजे तक दिया जा रहा प्रशिक्षण
शिविर में प्रतिदिन शाम 5 बजे से 7 बजे तक खिलाड़ियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस निःशुल्क मार्शल आर्ट शिविर में मुख्य प्रशिक्षक एवं मास्टर ट्रेनर भरत सिंह कुमावत खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनके साथ जय कुमावत, लक्की पाटीदार, कमलेश नागदा, तृषिता सोलंकी, भावना सोलंकी, खूबी देपन और अल्फिया मंसूरी भी प्रशिक्षण कार्य में सहयोग कर रहे हैं।
प्रशिक्षकों द्वारा खिलाड़ियों को खेल तकनीकों के साथ अनुशासन, फिटनेस और आत्मविश्वास का महत्व भी समझाया जा रहा है। शिविर में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से आए विद्यालयीन एवं गैर-विद्यालयीन छात्र-छात्राएं लगातार भाग ले रहे हैं।
जूडो और कराते की आधुनिक तकनीकों का अभ्यास
इस निःशुल्क मार्शल आर्ट शिविर में खिलाड़ियों को जूडो की मूल तकनीकों से लेकर एडवांस अभ्यास तक कराया जा रहा है। इसमें रोल, फॉल, हिप थ्रो, शोल्डर थ्रो, लेग थ्रो, लॉक और चोक तकनीकों का अभ्यास शामिल है। इसके अलावा फाइटिंग स्किल्स को बेहतर बनाने के लिए विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है।
ताइक्वांडो, कराते और वूशु के अंतर्गत खिलाड़ियों को स्टांस, ब्लॉक, पंच, किक और थ्रो तकनीकों का अभ्यास कराया जा रहा है। प्रशिक्षकों का कहना है कि नियमित अभ्यास से खिलाड़ी भविष्य में राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।
आत्मरक्षा प्रशिक्षण बना विशेष आकर्षण
शिविर में आत्मरक्षा प्रशिक्षण को विशेष महत्व दिया जा रहा है। खिलाड़ियों को निहत्थे बचाव, चाकू हमले से बचाव और लाठी से सुरक्षा की तकनीकें सिखाई जा रही हैं। बालिकाओं में इस प्रशिक्षण को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
वर्तमान समय में आत्मरक्षा की जानकारी हर विद्यार्थी के लिए जरूरी है। यही वजह है कि यह निःशुल्क मार्शल आर्ट शिविर केवल खेल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाने का भी काम कर रहा है।
प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को मिलेगा विशेष अवसर
इस निःशुल्क मार्शल आर्ट शिविर के माध्यम से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का चयन कर उन्हें वर्षभर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। चयनित खिलाड़ियों को विभिन्न मान्यता प्राप्त प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर भी मिलेगा।
मुख्य प्रशिक्षक भरत सिंह कुमावत ने बताया कि पूर्व वर्षों में उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त कई खिलाड़ी जिला, संभाग, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके हैं। कई खिलाड़ियों का चयन शासकीय सेवाओं में भी हुआ है। इसी सफलता को देखते हुए इस वर्ष भी शिविर में बड़ी संख्या में खिलाड़ी पहुंच रहे हैं।
ग्रामीण प्रतिभाओं को मिल रहा मंच
शिविर की खास बात यह है कि इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ी भी उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षकों का कहना है कि गांवों में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत केवल सही प्रशिक्षण और अवसर की होती है। यह निःशुल्क मार्शल आर्ट शिविर ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।
विद्यार्थियों से की गई भाग लेने की अपील
संकुल प्राचार्य ओ.पी. बंसल ने अधिक से अधिक बालक-बालिकाओं से इस निःशुल्क मार्शल आर्ट शिविर का लाभ लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इच्छुक विद्यार्थी शाम 5 से 7 बजे के बीच विद्यालय पहुंचकर अपना पंजीयन करा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि खेल गतिविधियां विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करती हैं। साथ ही आत्मरक्षा प्रशिक्षण उन्हें जीवन में हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार करता है।
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