India Oil Reserve सिर्फ 9.5 दिन का? RTI में चौंकाने वाला खुलासा, जानें क्या है सरकार का मास्टरप्लान
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
24 मार्च 2026, (अपडेटेड 24 मार्च 2026, 7:50 अपराह्न IST)

नीमच (India Oil Reserve) दुनिया इस वक्त भारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। रूस-यूक्रेन का न खत्म होने वाला युद्ध और लाल सागर में बढ़ते तनाव ने वैश्विक सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। इन सबके बीच किसी भी देश के लिए सबसे बड़ी चिंता उसकी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) होती है। इसी बीच, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा एक RTI (सूचना का अधिकार) के जवाब में जो खुलासा हुआ है, उसने आम जनता के बीच हलचल पैदा कर दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आपात स्थिति में काम आने वाला देश का India Oil Reserve (रणनीतिक तेल भंडार) केवल 9.5 दिनों की जरूरत ही पूरी कर सकता है। लेकिन क्या सच में यह घबराने वाली बात है? 

RTI से उठा पर्दा: क्या है India Oil Reserve का सच?

हाल ही में लगाई गई एक RTI के आधिकारिक जवाब में स्पष्ट किया गया कि हमारा ‘रणनीतिक कच्चे तेल का भंडार’ (Strategic Petroleum Reserve या SPR), आयात में पूरी तरह रुकावट आने पर देश की “लगभग 9.5 दिनों की आवश्यकता” को ही पूरा करने में सक्षम है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में यह आंकड़ा पहली नजर में डराने वाला लगता है।

लेकिन यह India Oil Reserve आम पेट्रोल पंपों या रिफाइनरियों का स्टॉक नहीं है। यह सरकार द्वारा धरती की गहराई में (Underground Rock Caverns) बनाए गए विशालकाय स्टोरेज होते हैं। इन्हें खास तौर पर युद्ध, प्राकृतिक आपदा या वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन पूरी तरह टूटने जैसी आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए सुरक्षित रखा जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो यह देश की ‘इमरजेंसी गुल्लक’ है।

भारत में कहाँ-कहाँ मौजूद हैं ये ‘इमरजेंसी‘ तहखाने?

देश को किसी भी आपातकालीन स्थिति से बचाने के लिए इन भूमिगत तहखानों को तटीय इलाकों के करीब बनाया गया है। RTI के जवाब के अनुसार, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार कार्यक्रम को 2004 में मंजूरी मिली थी और इसके लिए ‘इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व्स लिमिटेड’ (ISPRL) की स्थापना की गई थी।

वर्तमान में भारत के पास तीन अहम स्थानों पर कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) की रणनीतिक भंडारण क्षमता मौजूद है:

  • विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश): 1.33 मिलियन मीट्रिक टन

  • मंगलुरु (कर्नाटक): 1.5 मिलियन मीट्रिक टन

  • पाडुर (कर्नाटक): 2.5 मिलियन मीट्रिक टन (यह देश का सबसे बड़ा रिजर्व है)

क्या सच में घबराने की ज़रूरत है? 

अब उस सवाल पर आते हैं जो सबको परेशान कर रहा है—क्या वाकई हमारे पास सिर्फ 9.5 दिन का तेल है? इसका जवाब है—बिल्कुल नहीं!

रणनीतिक भंडार के 9.5 दिन के आंकड़े से पैनिक होने की कोई आवश्यकता नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स और सरकारी दावों के अनुसार, भारत के पास तेल का एक बहु-स्तरीय सुरक्षा चक्र है। अगर हम देश की वास्तविक स्थिति को देखें, तो पेट्रोलियम, अनरिफाइंड कच्चा तेल, कमर्शियल रिफाइनरियों के पास मौजूद विशाल स्टॉक, समुद्र में आ रहे जहाजों (Transit Oil) और इमरजेंसी स्टोर्स (SPR) को मिला दिया जाए, तो भारत के पास कुल मिलाकर 60 से 74 दिन का पर्याप्त तेल भंडार हमेशा मौजूद रहता है।

संसद में सरकार का स्पष्टीकरण और भविष्य की तैयारी

हाल ही में 23 मार्च, 2026 को राज्यसभा में सरकार द्वारा दिए गए एक बयान के अनुसार, वर्तमान में ISPRL के पास लगभग 3.372 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल का सुरक्षित भंडार है, जो कुल India Oil Reserve क्षमता का लगभग 64 प्रतिशत है।

हाल ही में संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों को आश्वस्त किया था कि भारत के पास ऊर्जा का पर्याप्त भंडार है। वहीं, जूनियर पेट्रोलियम मंत्री सुरेश गोपी ने भी स्पष्ट किया कि भारत के पास सभी तरह के फ्यूल को मिलाकर कुल 74 दिनों तक की ऊर्जा सुरक्षा उपलब्ध है।

इसके अलावा, भविष्य की बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतों को देखते हुए सरकार ने जुलाई 2021 में ही एसपीआर नेटवर्क के विस्तार को मंजूरी दे दी थी। इसके तहत चंडीखोल (ओडिशा) में 4 MMT और पाडुर (कर्नाटक) में 2.5 MMT के दो नए एक्स्ट्रा प्लांट्स बनाए जाएंगे। इनके पूरा होने पर भारत की विशुद्ध रणनीतिक क्षमता 12 दिनों के पार चली जाएगी।


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Aakash Sharma
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