MP Electricity Rate Hike: कुप्रबंधन का बोझ जनता के कंधों पर, 4.80% महंगी हुई बिजली और ₹42 हजार करोड़ का घाटा
Reported by: News Desk | Edited by: आकाश शर्मा
26 मार्च 2026, (अपडेटेड 26 मार्च 2026, 8:23 अपराह्न IST)

जबलपुर (MP News) | मध्य प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए 1 अप्रैल की सुबह एक कड़वा सच लेकर आएगी। राज्य विद्युत नियामक आयोग (MPERC) ने साल 2026-27 के लिए नए टैरिफ (MP Electricity Rate Hike) को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत प्रदेश में बिजली की दरों में 4.80% की औसत बढ़ोतरी की गई है। लेकिन यह केवल एक सामान्य मूल्य वृद्धि नहीं है; यह बिजली कंपनियों के गहरे वित्तीय संकट, सरकार की अधूरी घोषणाओं और सिस्टम की नाकामी की एक लंबी कहानी है।

इस MP Electricity Rate Hike के पीछे का गणित केवल यूनिट रेट तक सीमित नहीं है। इसके पीछे 42,375 करोड़ रुपए का वह भारी-भरकम घाटा है, जिसे अब प्रदेश की जनता से वसूलने की तैयारी है।

MP Electricity Rate Hike की घाटे का गणित: जनता क्यों भरे कंपनियों का नुकसान?

प्रदेश की तीनों बिजली वितरण कंपनियां—पूर्व क्षेत्र, मध्य क्षेत्र और पश्चिम क्षेत्र—वित्तीय वेंटिलेटर पर हैं। कंपनियों ने आयोग के सामने जो आंकड़े पेश किए हैं, वे चौंकाने वाले हैं।

  • ₹42,375 करोड़ का संचित घाटा: कंपनियों का दावा है कि पिछले सालों का जमा हुआ नुकसान उनके अस्तित्व के लिए खतरा बन गया है।

  • अस्वीकृत प्रस्तावों का बोझ: कंपनियों का तर्क है कि 2014-15 से 2022-23 के बीच उन्होंने ₹3,451 करोड़ की वृद्धि के प्रस्ताव दिए थे, जिन्हें आयोग ने ठुकरा दिया। अब वे उस ‘बकाया’ वसूली को चालू दरों में जोड़ना चाहती हैं।

  • बिजली खरीद की लागत: बिजली कंपनियों ने बताया कि बिजली खरीदने पर उन्हें ₹300 करोड़ का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है, जिसे अब सीधे उपभोक्ताओं के बिल में ट्रांसफर किया जा रहा है।

स्मार्ट मीटर का ‘झूठ’ और ₹820 करोड़ की वसूली

MP Electricity Rate Hike में स्मार्ट मीटर को लेकर बिजली कंपनियों का रुख पूरी तरह बदल गया है। जब इन मीटरों को लगाने की शुरुआत हुई थी, तब बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि इससे बिजली चोरी रुकेगी और जनता पर कोई अतिरिक्त भार नहीं आएगा।

लेकिन MP Electricity Rate Hike में हकीकत इसके उलट है। कंपनियों ने अब कबूल किया है कि स्मार्ट मीटर लगाने पर ₹820 करोड़ खर्च हुए हैं। ताज्जुब की बात यह है कि अब यह पूरा खर्च उपभोक्ताओं की जेब से निकाला जाएगा। यह जनता के साथ एक तरह की ‘वादाखिलाफी’ है, क्योंकि जो तकनीक लाइन लॉस कम करके बचत देने वाली थी, वह खुद एक बोझ बन गई है।


कोयला सस्ता हुआ, फिर बिजली महंगी क्यों?

इस MP Electricity Rate Hike पर सबसे बड़ा सवाल ऊर्जा विशेषज्ञों ने उठाया है। पिछले साल केंद्र सरकार ने कोयले पर लगने वाला ₹400 प्रति टन का ‘जीएसटी सेस’ (कंपेंसेशन सेस) हटा दिया था।

एक्सपर्ट एनालिसिस: कोयले पर सेस हटने से बिजली उत्पादन की लागत में प्रति यूनिट कम से कम 17 से 18 पैसे की कमी आनी चाहिए थी। तर्क यह है कि यदि उत्पादन सस्ता हुआ, तो उसका फायदा उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए था। लेकिन यहाँ दरों को घटाने के बजाय 4.80% बढ़ा दिया गया। यह 18 पैसे की बचत आखिर किसकी जेब में गई?


चुनाव का 4,800 करोड़ का ‘मुफ्त’ दांव अब बना जी का जंजाल

2023 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले तत्कालीन सरकार ने एक बड़ा राजनीतिक कार्ड खेला था। 31 अगस्त 2023 तक के सभी बकाया बिजली बिलों की वसूली पर रोक लगा दी गई थी। यह राशि लगभग ₹4,800 करोड़ थी।

सरकार ने तब वादा किया था कि इस राशि की भरपाई वह खुद डिस्कॉम्स (बिजली कंपनियों) को करेगी। लेकिन आज की कड़वी हकीकत यह है कि बिजली कंपनियों को यह पैसा सरकार से नहीं मिला है। कंपनियों का कैश फ्लो बिगड़ चुका है, और इसी नकदी के संकट को दूर करने के लिए अब नए टैरिफ (MP Electricity Rate Hike) के जरिए आम आदमी से पैसा वसूला जा रहा है।

ऊर्जा मंत्री के वादे और जमीनी हकीकत

कुछ समय पहले ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने भोपाल में दावा किया था कि 2028 तक बिजली कंपनियां घाटे से मुक्त हो जाएंगी और जनता पर कोई बोझ नहीं डाला जाएगा। लेकिन उनके बयान के कुछ ही हफ्तों बाद यह MP Electricity Rate Hike में 4.80% की बढ़ोतरी सामने आ गई।

जब सब्सिडी की बात आती है, तो सरकार ‘अटल गृह ज्योति योजना’ का हवाला देती है, जहाँ 100 रुपए में बिजली मिल रही है। लेकिन सवाल उन मध्यमवर्गीय परिवारों और व्यापारियों का है, जो सब्सिडी के दायरे में नहीं आते और जिनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा अब बिजली बिल की भेंट चढ़ जाएगा।


MP Electricity Rate Hike EV चार्जिंग: दिन में राहत, रात में आफत

इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मालिकों के लिए यह टैरिफ मिला-जुला है। मध्य प्रदेश अब ‘टाइम ऑफ डे’ (ToD) आधारित बिलिंग की ओर बढ़ रहा है।

  • सुबह 9 से शाम 5 बजे: इस दौरान चार्जिंग करने पर 20% की छूट मिलेगी। यह कदम सोलर एनर्जी को प्रमोट करने के लिए उठाया गया है।

  • अन्य समय (Night/Peak Hours): यदि आप शाम को घर लौटकर गाड़ी चार्जिंग पर लगाते हैं, तो आपको 20% अतिरिक्त शुल्क देना होगा।

निष्कर्ष: क्या यह बढ़ोतरी जायज है?

बिजली कंपनियां अपने कुप्रबंधन और लाइन लॉस को ढंकने के लिए टैरिफ हाइक का सहारा ले रही हैं। जब ₹4,800 करोड़ की सब्सिडी सरकार नहीं दे पा रही और स्मार्ट मीटर के वादे खोखले साबित हो रहे हैं, तो जनता का गुस्सा जायज है। 1 अप्रैल से लागू होने वाले ये रेट प्रदेश की आर्थिक सेहत पर भी बुरा असर डालेंगे।


यह भी पढ़ें: नीमच में नशे के खिलाफ अभियान का शंखनाद: कलेक्टर और SP के नेतृत्व में संपन्न हुई NCORD Meeting, लिए गए 7 कड़े फैसले

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Aakash Sharma
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